Monday, September 16, 2019

आदिवासियों की समस्याओं का निराकरण, एकता की ताकत दिखाते हुए सामूहिक संघर्ष करना ही एकमात्र विकल्प

आदिवासियों की समस्याओं का निराकरण, एकता की ताकत दिखाते हुए सामूहिक संघर्ष करना ही एकमात्र विकल्प 

दक्षिण भारत के किसी राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ आदिवासियों के अधिकारों को लेकर महारैली व कार्यक्रम का आयोजन 

मैसूर (कर्नाटक) में मनाया गया आदिवासी अधिकार दिवस 

कर्नाटक/मैसूर। गोंडवाना समय। 
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 13 सितंबर, 2007 को आदिवासियों के अधिकारों के रूप में 46 अनुच्छेद घोषित किए गए थे। इसी के उपलक्ष में प्रतिवर्ष 13 सितंबर को आदिवासी अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रति वषार्नुसार इस वर्ष भी आदिवासी समन्वय मंच, भारत द्वारा 12-13 सितंबर 2019 को मैसूर कर्नाटक में 15 राज्यों के कार्यकतार्ओं की उपस्थिति आदिवासी अधिकार दिवस समारोह मनाया गया।
कार्यक्रम के पहले दिन दिनांक 12 सितंबर, 2019 को आदिवासी अधिकार महारैली नंजाराजा बहादुर चोल्ट्री से महाराजा कॉलेज, मैसूर तक निकाली गई तत्पश्चात महाराजा कॉलेज के सैंटनरी हॉल में समारोह के अतिथियों की उपस्थिति में प्रकृति व पूर्वजों की पूजा अर्चना के साथ कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।

कर्नाटक राज्य की टीम ने प्रस्तुत किया सांस्कृतिक नृत्य

शुरूआत में आदिवासी संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक नृत्य कर्नाटक राज्य की टीम द्वारा प्रस्तुति दी गई। कर्नाटक राज्य के स्थानीय संगठन राज्य मूला आदिवासी वैदिक, कर्नाटक के अध्यक्ष आप विट्टल के एन जी के द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। दिनांक 12 सितंबर, 2019 के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आप फुलमन चौधरी जी, उपाध्यक्ष, यूनाइटेड नेशन्स परमानेंट फोरम आॅन इंडिजिनियस इश्यूज, न्यूयॉर्क तथा विशेष अतिथि के रूप में आप वी सोमन्ना जी, केंद्रीय मंत्री, कर्नाटक सरकार,अमर सिंह भाई चौधरी, संस्थापक अध्यक्ष, आदिवासी समन्वय मंच, भारत, अशोक भाई चौधरी,राष्ट्रीय संयोजक,आदिवासी समन्वय मंच,भारत एवं महासचिव, आदिवासी एकता परिषद, रमेश तावड़कर, पूर्व केंद्रीय मंत्री, आदिम जाति कल्याण विभाग, गोवा सरकार, प्रोफेसर हेमंत कुमार, वाइस चांसलर, यूनिवर्सिटी आफ मैसूर, प्रोफेसर टी टी बासावना गौडा़, डायरेक्टर, ट्राईबल रिसर्च सेंटर इंस्टिट्यूट, कर्नाटक, डॉक्टर जर्री पायस, पूर्व सलाहकार यूनिसेफ कंबोडिया, डॉ अभय खाखा, फैकेल्टी, सोशियोलॉजी, जेएनयू ,नई दिल्ली, साधना बहन मीणा, राजस्थान, राजू पांढरा, महाराष्ट्र, एस एस कुमरे(आईएएस) मध्यप्रदेश शासन एवं प्रांतीय उपाध्यक्ष, आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास), मध्य प्रदेश, निकोलस बारला, राष्ट्रीय सह संयोजक, आदिवासी समन्वय मंच, भारत, वी मुत्तैया, सचिव, राज्य मूला आदिवासी वैदिक, कर्नाटक आदि थे। अथितियों एवं अलग-अलग राज्यों के कार्यकतार्ओं द्वारा सभा को संबोधित किया गया । जिसमें आप डेमी उरांव, उड़ीसा, नक्ताराम भील, राजस्थान, डॉक्टर एच पी ज्योथि, सहायक प्राध्यापक, मैसूर (कर्नाटक),आडा़ हनुमंतराव, तमिलनाडु, डॉक्टर सुनील पराड़ , महाराष्ट्र आदि प्रमुख थे । आदिवासी गायक आप जगन भाई द्वारा प्रेरणा गीत प्रस्तुत किया गया । बीच-बीच में कर्नाटक राज्य के आदिवासी नृत्य समूह द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गई।

सांस्कृति नृत्य दल व पारंपरिक परिधानों से लैस होकर निकाली गई आदिवासी अधिकार महारैली 

दिनांक 13 सितंबर, 2019 को कार्यक्रम की शुरूआत भी आदिवासी अधिकार महारैली के रूप में हुई जो नंजाराजा बहादुर चोल्ट्री से प्रारंभ होकर केआरसी चौराहा से मैसूर पैलेस पर पहुंची जहां पर 15 राज्यों के हजारों कार्यकतार्ओं की उपस्थिति में कलाजाता (सांस्कृतिक नृत्य दल) का उद्घाटन करते हुए सिटी बस स्टैंड, कारपोरेशन, महाराजा संस्कृत कॉलेज चौराहा, रामास्वामी चौराहा होते हुए महाराजा कॉलेज के सैंटनरी हॉल पहुंचकर सभा के रूप में परिवर्तित हुई। महारैली में सबसे आगे महिलाएं एवं उसके पीछे अपनी पारंपरिक वेशभूषा धारण किए हुए आदिवासी समाज के अनेकों राज्य से आए हुए आदिवासी कार्यकर्ता चल रहे थे तथा नारों की गूंज भी लगती रही।

आदिवासी के अधिकारों पर दिया संदेश 

सभा हाल में पहुंचकर आदिवासी सांस्कृतिक नृत्य के माध्यम से आदिवासी अधिकार दिवस समारोह की शुरूआत हुई । कार्यक्रम की प्रस्तावना मुकेश बिरवा जी, झारखंड के द्वारा रखी गई । तत्पश्चात राज्यों के प्रमुख कार्यकतार्ओं द्वारा सभा को संबोधित किया गया । जिसमें ममता कुजूर (छत्तीसगढ़), भंवरलाल परमार (राजस्थान), डेविड बुरुडी़(आंध्र प्रदेश), विनय कुंवरा (दादर नगर हवेली),वी मुतैया (कर्नाटक), अशोक बागुल (महाराष्ट्र),भूपेंद्र भाई चौधरी राष्ट्रीय अध्यक्ष,आदिवासी एकता परिषद (गुजरात ), अंबिका बहन सावित्री (केरल) आदि के द्वारा सभा संबोधित किया गया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश राज्य से आए हुए पारंपरिक वेशभूषा में कार्यकतार्ओं द्वारा आदिवासी गरबा व नृत्य प्रस्तुत किया गया।

मंत्री ओमकार मरकाम भी हुये शामिल 

दिनांक 13 सितंबर, 2019 के समारोह मुख्य अतिथि माननीय ओमकार सिंह मरकाम जी, केंद्रीय मंत्री ,आदिम जाति कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश शासन,आप फुलमन चौधरी, वाइस प्रेसिडेंट, यूनाइटेड नेशंस परमानेंट फोरम आॅन इंडिजिनियस इश्यूज, न्यूयॉर्क, ए एस रामदास, विधायक, कर्नाटक, अमरसिंह भाई चौधरी, संस्थापक अध्यक्ष, आदिवासी समन्वय मंच, भारत, प्रोफेसर व्हाय एस सिद्धेगौड़ा, वाइस चांसलर, तुमकुर यूनिवर्सिटी, मैसूर, प्रोफेसर मुजफ्फर अस्सादी, स्पेशल आॅफिसर, रायचुर यूनिवर्सिटी, कर्नाटक, श्रीमती पूर्णिमा, ज्वाइंट डायरेक्टर, मिनिस्ट्री आफ फील्ड पब्लीसिटी ,कर्नाटका, एस एस कुमरे (आईएएस),मध्य प्रदेश, अशोक भाई चौधरी, राष्ट्रीय संयोजक आदिवासी समन्वय मंच, भारत, एडवोकेट निकोलस बारला, सहसंयोजक, आदिवासी समन्वय मंच, भारत, रमेश तावड़कर, पूर्व केंद्रीय मंत्री, आदिम जाति कल्याण विभाग, गोवा सरकार, दरबार दादा पाड़वी,सदस्य अध्यक्ष मंडल, आदिवासी एकता परिषद आदि थे।

10 प्रस्ताव किये पारित 

अतिथियों एवं वक्ताओं के द्वारा आदिवासियों के प्राकृतिक एवं संवैधानिक अधिकारों के साथ जी आदिवासियों का इतिहास, संस्कृति, परंपरा तथा संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित आदिवासियों के अधिकारों से संबंधित 46 अनुच्छेदों पर प्रकाश डालते हुए अपनी बात रखी गई। देश के आदिवासियों के गंभीर मुद्दों पर भी चिंतन मंथन किया गया एवं 10 प्रस्ताव भी पारित किए गए। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि सभी कार्यकतार्ओं ने अपनी अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाई। दिनांक 11 व 12 सितंबर, 2019 का खाना कार्यकतार्ओं द्वारा स्वयं बनाया जा कर खिलाया गया।

देश के सभी आदिवासी समाजिक संगठनों को आना होगा एकता के साथ 

दक्षिण भारत के किसी राज्य के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ होगा जब देश के सभी राज्यों के प्रमुख कार्यकतार्ओं की उपस्थिति में आदिवासियों की इतनी बड़ी रैली व कार्यक्रम का आयोजन किया गया। देश के अलग अलग राज्य से आए हुए सभी कार्यकतार्ओं ने इस बात को स्वीकार किया कि आदिवासियों की समस्याओं के निराकरण हेतु देश के सभी संगठनों के  प्रमुख कार्यकतार्ओं को एक साथ आकर एकता की ताकत दिखाते हुए सामूहिक संघर्ष करना ही एकमात्र विकल्प हो सकता है।
दक्षिण भारतीय राज्य में आदिवासी कार्यकतार्ओं के साथ पहली बार बड़े स्तर पर संवाद स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ। दक्षिण भारत के कार्यकतार्ओं के साथ बहुत ज्यादा संपर्क नहीं होने के बावजूद भी समारोह ऐतिहासिक रूप से सफल रहा । कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी समाज के कार्यकतार्ओं का अहम योगदान रहा। भाषा की समस्या होने के बावजूद भी कार्यक्रम सफल हुआ। दक्षिण भारत के कार्यकतार्ओं द्वारा आदिवासी समन्वय मंच,भारत के साथ मिलकर कार्य करने का आश्वासन दिया गया।

समारोह में बौद्धिक कार्यकतार्ओं की संख्या ज्यादा रही

कार्यक्रम के समापन सत्र के अवसर पर वालंटियर्स, कर्नाटक राज्य के आदिवासी समाज के प्रमुख कार्यकतार्ओं, आदिवासी समन्वय मंच, भारत के प्रमुख कार्यकतार्ओं का आयोजन समिति द्वारा स्थानीय परंपरा के अनुसार स्वागत सम्मान किया जाकर विशिष्ट प्रकार की टोपी, माला, साल व मोमेंटो प्रदान किया गया। एमएसडब्ल्यू सहित कई कालेजों के विद्यार्थियों को कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम योगदान देने हेतु प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए। इस समारोह में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व राजस्थान के कार्यकर्ता ज्यादा संख्या में उपस्थित हुए। इस समारोह में बौद्धिक कार्यकतार्ओं की संख्या ज्यादा रही।

मुख्यमंत्री से मिलने का दिया आश्वासन

कर्नाटक सरकार के मंत्री एवं विधायक द्वारा आदिवासियों के विषयों को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से आदिवासी प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात करने का आश्वासन दिया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधि माननीय फुलमन चौधरी जी कार्यक्रम में पूरे 2 दिवस का समय दिया एवं भारत के आदिवासियों के इशूज को संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाने की बात कही। सभी राज्य के कार्यकर्ता सकारात्मक ऊर्जा और सोच के साथ वापस अपने अपने राज्य में जाकर कार्य करने की बात कही। कार्यक्रम अलग-अलग सत्र में किया गया । जिसमें 12 सितंबर 2019 को शाम को राज्य के प्रमुख कार्यकतार्ओं के साथ में चिंतन बैठक का आयोजन भी किया गया। आभार प्रदर्शन आप अशोक भाई चौधरी, राष्ट्रीय संयोजक, आदिवासी समन्वय मंच, भारत एवं महासचिव आदिवासी एकता परिषद द्वारा किया गया तथा संचालन डॉ शीला खरे, मुकेश बिरवा एवं शांतिकर वसावा जी द्वारा किया गया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु स्थानीय संगठन राज्य मूल आदिवासी वैदिक, कर्नाटक का विशेष योगदान रहा । साथ ही जिन जिन कार्यकतार्ओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रुप से सहयोग प्रदान किया उनका हम तहे दिल से आभार एवं शुक्रिया अदा करते हैं।

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