Sunday, October 20, 2019

पुलिस विभाग को वचन पत्र के आखिरी पन्ने में मिला था स्थान, इन्हें कब पूरा करेगी सरकार

पुलिस विभाग को वचन पत्र के आखिरी पन्ने में मिला था स्थान, इन्हें कब पूरा करेगी सरकार

म. प्र. में पुलिस विभाग में तैनात कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं का समाधान को लेकर पहल करने की पहल कब की जायेगी क्योंकि कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में पुलिस विभाग को वचन पत्र में सबसे आखिरी के पन्ने में स्थान दिया था, इसलिये संभवतय: उनको पूरा करने में कांग्रेस सरकार आखिर मेें ही पुलिस विभाग को याद करेगी।

सिवनी। गोंडवाना समय। 
अपनी व अपने परिवार से पहले आम जनता की सुरक्षा को लेकर हर समय तैयार रहकर तैनात पुलिस को आखिरकार हमारे देश व प्रदेश की सरकार क्या-क्या सुविधायें देती है। उन पर चिंतन-मनन करना अत्यंत आवश्यक है। जनता की सुरक्षा को लेकर मुस्तैद रहने वाली पुलिस को सरकार, परिवारिक जिम्मेदारी के तहत बच्चों को शैक्षणिक उत्थान व अन्य आवश्यकताओं के साथ साथ पुलिस विभाग में तैनात कर्मचारियों को मिलने वाला वेतन, नौकरी में सहायक विभागीय रूप में आवश्यक सुविधायें संसाधन-सामग्री व अन्य जरूरत, क्योंकि कम पुलिस बल की संख्या और बढ़ती हुई जनंसख्या व विस्तृत बढ़ते हुये क्षेत्र, तकनीकि व आधुनिक युग में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिये मिलने वाले संसाधन या उसके लिये दी जाने वाली धनराशि क्या पर्याप्त है? यहां तक हम आपको बता दे कि वर्दी के लिये दी जाने वाली राशि से तो महंगाई के युग में सिलाई करने वाले टेलर साहब ही ले लेते है रही बात यदि जूतों को लेकर तो संभवतय: प्लास्टिक के जूते भी उस कीमत पर अब मिलना मुश्किल है वहीं तेज गति से फर्राटेदार वाहनों अपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वालों को पकड़ने के लिये अभी साईकिल के हिसाब से भत्ता दिया जा रहा है, मकान भत्ता किराया की स्थिति भी लगभग यही है जितना किराया भत्ता के नाम पर राशि प्रदान की जा रही है लगभग पुलिस विभाग से वरिष्ठ अधिकारियों का 800 रूपये तक ही सीमित है तो अब आप स्वयं हिसाब लगा सकते है कि छोटे रैंक के कर्मचारियों को कितना किराया भत्ता सरकार देती होगी, ऐसे अनेक चिंतनीय विषय है पुलिस विभाग को लेकर जिस पर सरकार को स्वमेव संज्ञान लेना चाहिये वहीं जनता को भी अपनी सुरक्षा को लेकर सेवा देने वाले पुलिस की समस्याओं पर आवाज उठाना चाहिये।

अवकाश के बिना कैसे निभा सकते है पारिवारिक जिम्मेदारी

हम यदि पुलिस विभाग में सेवा देने वाले पुलिस कर्मचारी की बात करें तो उन्हें अवकाश भी बहुत ही आवश्यक व जरूरी होने पर मिलता है वहीं लॉइन आॅडर की स्थिति हो तो वह भी कैंसिल कर दिया जाता है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने पुलिस अवकाश के घोषणा किया और उसे पूरा करने का निर्देश भी दिया परंतु यही उसकी हकीकत पुलिस विभाग के कर्मचारी से अच्छा कोई नहीं जानता कि उन्हें अवकाश की सुविधा मिल रही है या नहीं ? जहां मजदूरों को भी एक दिन का अवकाश दिये जाने का नियम है वहीं राष्ट्रीय पर्व में भी उनके नियम बनाया गया है लेकिन पुलिस को अवकाश कब मिलता है । ऐसे में वह अपने पारिवारिक जिम्मेदारी व जवाबदारी को कैसे निभा सकता है। 

गृह मंत्री स्मृति दिवस पर वचनों को याद कर पूरा कराने में निभाये भूमिका   

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के पहले कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में सबसे आखिरी के पेज क्रमांक 108 से लेकर 112  तक में 49.1 बिंदु क्रमांक से 50.2 तक पुलिस विभाग के संबंध में अनेकों वचन देकर वायदा किया था। कांग्रेस की सरकार और मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ भी बन गये लेकिन वचन पत्र में जो बाते उल्लेखित की
गई थी उनको लेकर कांग्रेस ने जिस तरह पुलिस विभाग को लेकर सबसे आखिरी पन्नों में वचन पत्र में स्थान दिया था उससे यही लगता है कि सबसे आखिरी में ही पुलिस विभाग से किये गये वचनों को पूरा किया जायेगा। हालांकि पुलिस विभाग को अवकाश दिये जाने की घोषणा को पूरा करने के आदेश दिये गये है परंतु इसका पालन संभवतय: नहीं हो रहा है। कांग्रेस द्वारा सरकार बनने के पहले वचन पत्र मेें की गई घोषणाओं पर अमल करने के लिये मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ को संज्ञान लेना चाहिये वहीं गृह मंत्री श्री बाला बच्चन को भी पुलिस स्मृति दिवस पर पुलिस विभाग के लिये किये गये कांग्रेस पार्टी के द्वारा उल्लेखित किये गये वचनों को याद करते हुये उन्हें पूरा कर अमल में लाना चाहिये।

वेतन व अन्य सुविधाओं को लेकर वचन पत्र में ये किया था शामिल

हम आपको बता दे कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के पहले कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में सबसे आखिरी के पेज क्रमांक 108 से लेकर 112 तक में 49.1 बिंदु क्रमांक से 50.2 तक पुलिस विभाग के संबंध में अनेकों वचन देकर वायदा किया था। यहां पर हम आपको पुलिस विभाग के लिये वेतन व अन्य सुविधाओं को ही शामिल कर पाठकों व सरकार के संज्ञान में ला रहे है जिसमेें बिंदु क्रमांक 49.23 में पुलिस विभाग में पदोन्नति एवं क्रमोन्नति के सभी लंबित प्रकरण 6 माह के भीतर निराकृत करेंगे। पुलिसकर्मियों की पदोन्नति हेतु विभागीय परीक्षा का नियमित आयोजन कराएंगे एवं पुलिस कर्मियों के लिए ट्रान्सफर बोर्ड का गठन करेंगे।
वहीं बिंदु क्रमांक 49.24 निरंतर उत्कृष्ट सेवा एवं राष्ट्रपति पदक प्राप्त पुलिसकर्मियों-उपनिरीक्षकों की पदोन्नति में सेवा अवधि क्षेत्र में छूट देंगे। इसी तरह बिंदु क्रमांक 49.25 आरक्षकों के वेतनमान में ग्रेड पे 1900 है जिसे 2100 करेंगे। वहीं बिंदु क्रमांक 49.26 पुलिसकर्मियों को शासकीय कार्य पर जाने पर रेल्वे वारंट से तत्काल आरक्षण की सुविधा हेतु केन्द्र सरकार को अनुशंसा करेंगे। इसी तरह बिंदु क्रमांक 49.27 प्रत्येक जिले में एसएएफ के कर्मियों के लिए पक्की बैरकों की सुविधा जिसमें पंखे, कूलर, आर.ओ. वाटर कूलर तथा दो पहिया एवं चार पहिया वाहन उपलब्ध करायेंगे। आगे बिंदु क्रमांक 49.28 एसएएफ के आरक्षक से प्रधान आरक्षक तक जिनकी सेवा 5 वर्ष की हो गई है, उनको जिला पुलिस में 25 प्रतिशत पद तक संविलियन किया जायेगा।
इसी तरह बिंदु क्रमांक 49.29 में विशेष शाखा संवर्ग के लिपिकीय स्टाफ को 20 प्रतिशत एवं कार्यकारी [फील्ड इकाई] कर्मचारी-अधिकारी को 30 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता दिया जायेगा। यही नियम अन्य इकाईयों से विशेष शाखा में पदस्थ कर्मचारी-अधिकारियों पर लागू होगा। आगे वचन पत्र के बिंदु क्रमांक 49.30 केन्द्रीय
बल के समान अन्य सुविधायें देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे। इसी तरह बिंदु क्रमांक 49.31 विशेष शाखा के जोखिम भरा कार्य करते हुये आरक्षक से निरीक्षक तक को 20 से 40 प्रतिशत तक विशेष भत्ता देंगे तथा जिला पुलिस बल के साथ ही इस शाखा के उपनिरीक्षकों एवं आरक्षकों को प्रशिक्षण देंगे।
वहीं वचन पत्र के बिंदु क्रमांक 49.32 प्रदेश में सशस्त्र सुरक्षा बलों के परिवार में महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित करेंगे। इसी तरह बिंदु क्रमांक 49.33 पुलिस लाईन में आंगनवाड़ी एवं शिशु गृह खोलेंगे। आगे वचन पत्र के बिंदु क्रमांक 49.34 प्रदेश में कानून व्यवस्था को बनाये रखते समय आपदा के समय एवं
अपराधियों को पकड़ते समय यदि किसी पुलिस कर्मी की मृत्यु होती है तो उसे प्रादेशिक स्तर का शहीद का दर्जा देते हुये उसके परिवार के किसी एक सदस्य को योग्यता के अनुरूप नौकरी देंगे तथा उसके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा का भार सरकार उठायेगी। इसी तरह बिंदु क्रमांक 49.35 फील्ड में पदस्थ पुलिस कर्मियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नये आवासों निर्माण करेंगे, इसके लिए पृथक से विशेष बजट देंगे।
आगे कांग्रेस ने अपने वचन पत्र के बिंदु क्रमांक 49.36 में मृत पुलिस कर्मियों के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति पुलिस विभाग में न मिलने पर अन्य विभागों में अनुकम्पा नियुक्ति देने पर विचार करेंगे। आगे बिंदु क्रमांक 49.37 में आपराधिक श्रेणी के लोगों को समग्र एवं आधार से जोड़ा जायेगा तथा आदतन अपराधी और
असामाजिक तत्वों को शासन की योजनाओं से वंचित किया रखा जायेगा। इसी तरह बिंदु क्रमांक 49.38 में ऐसे क्षेत्र जहां आपदा संभावित है, उन क्षेत्रों में स्थानीय नागरिकों के साथ नागरिक सुरक्षा दल गठित किये जायेंगे। पर्यटन के ऐसे क्षेत्र जहां पर आये दिन दुर्घटनायें होती हैं, वहां पर भी नागरिक सुरक्षा दल को आपदा एवं बचाव
से संबंधित प्रशिक्षण देते हुये बचाव किट एवं मानदेय उपलब्ध करायेंगे।
इसके साथ ही बिंदु क्रमांक 49.39 में केन्द्रीय सशस्त्र बल एवं आर्मी के सेवानिवृत्त सैनिकों एवं अधिकारियों की सेवायें आपदा प्रबंधन, यातायात प्रबंधन तथा आंतरिक सुरक्षा ली जायेंगी तथा उनको मानदेय दिया जायेगा। इस तरह अन्य वचन कांग्रेस ने सरकार बनने के पहले वचन पत्र में शामिल किया था इनमें से अपने वचनों को कांग्रेस ने कितना पूरा किया है यह सरकार के लिये याद करने का दिन भी है।

क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस

हम आपको बता दे कि पुलिस स्मृति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। पुलिस स्मरण दिवस के महत्व के बारे में सीआरपीएफ की बहादुरी का एक प्रमाण है गौरतलब है कि 21 अक्टूबर 1959 में लद्दाख में तीसरी बटालियन की एक कम्पनी को भारत-तिब्बत सीमा की सुरक्षा के लिए लद्दाख में हाट-स्प्रिंग में तैनात किया गया था। कम्पनी को टुकड़ियों में बांटकर चौकसी करने को कहा गया। जब बल के 21 जवानों का गश्ती दल हाट-स्प्रिंग में गश्त कर रहा था। तभी चीनी फौज के एक बहुत बड़े दस्ते ने इस गश्ती टुकड़ी पर घात लगाकर आक्रमण कर दिया। तब बल के मात्र 21 जवानों ने चीनी आक्रमणकारियों का डटकर मुकाबला किया। मातृभूमि की रक्षा के लिए लड़ते हुए 10 शूरवीर जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। हमारे बल के लिए व हम सबके लिए यह गौरव की बात है कि केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के इन बहादुर जवानों के बलिदान को देश के सभी केन्द्रीय पुलिस संगठनों व सभी राज्यों की सिविल पुलिस द्वारा पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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