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सरकार कम्पनियों के साथ मिलकर आदिवासी समाज को रुपए से चाहती है खरीदना

सरकार कम्पनियों के साथ मिलकर आदिवासी समाज को रुपए से चाहती है खरीदना 

हम समाज के साथ मिलकर अंतिम दम तक इस परियोजना के खिलाफ रखेंगे जारी संघर्ष 

चुटका पर कम्पनी खुली बहस आयोजित करे, बारिश में भी सैकङो लोग हुये शामिल 

मंडला। गोंडवाना समय।
चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति, राजा दलपत शाह अभयारण्य विरोधी मोर्चा एवं बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आदिवासी अधिकार हुंकार सम्मेलन में वर्षा के बाद भी उत्साह कम नहीं हुआ। कार्यक्रम की भूमिका को रखते हुए चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादु लाल कुङापे ने कहा कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है की लोगों ने मुआवजा ले लिया है। जबकि वास्तविकता यह है कि चुटका, कुंडा, टाटीघाट एवं मानेगांव के लोगों ने अपने ग्राम सभा में इस परियोजना का विरोध किया और भू अधिग्रहण की धारा (4),(9) की नोटिस का लिखित में आपत्ति किया था। सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए जबलपुर कमिश्नर ने अवार्ड पारित कर खाते में वैगेर सहमति के मुआवजा डलवा दिया। सरकार कम्पनियों के साथ मिलकर आदिवासी समाज को रुपए से खरीदना चाहती है। हम समाज के साथ मिलकर अंतिम दम तक इस परियोजना के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।

तो चुटका परियोजना की प्रासंगिकता क्या है ?

उर्जा एवं जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ तथा संयुक्त राष्ट्र संघ में टेक्नालॉजी एंड मैकेनिज्म बोर्ड के सदस्य सौम्यादत्ता ने कहा कि वर्तमान में  देश एवं विदेश के उर्जा उत्पादन का परिदृश्य बदल गया है। जिसे हमारे नीति निर्धारको को समझने की जरूरत है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार भारत के पास 3 लाख 65 हजार मेगावाट की स्थािपत क्षमता है, जबकि इस वर्ष जून माह में उच्चतम मांग 1 लाख 85 हजार मेगावाट ही था। वहीं 90 हजार मेगावाट क्षमता की विद्युत परियोजना निमार्णाधीन है। वर्तमान केन्द्र सरकार ने 2022 तक 1 लाख 75 हजार मेगावाट अक्षय ऊर्जा निर्माण का लक्ष्य रखा है तो चुटका परियोजना की प्रासंगिकता क्या है? सौर ऊर्जा की कीमत 3 रुपये यूनिट से भी कम आ रही है जबकि परमाणु ऊर्जा 7 रुपए यूनिट आएगी। इस महंगी बिजली को कौन खरीदेगा ? एनपीसीआईएल को चुटका परियोजना को लेकर जनता के बीच खुली बहस आयोजित करना चाहिए।

सरकार आदिवासी समाज की जल, जंगल एवं जमीन कम्पनियों को रख रही गिरवी

भारत जन आंदोलन के विजय भाई ने आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ आदिवासी समाज को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि अगर आज कदम नहीं उठाया तो कल सभी संसाधन खत्म हो जाएंगे । मध्यप्रदेश किसान महासभा के बादल सरोज ने कहा कि उद्योगपतियों को निवेश बदले सरकार आदिवासी समाज की जल, जंगल एवं जमीन कम्पनियों को गिरवी रख रही है जो जनता के साथ धोखा है। निवास नगर परिषद के अध्यक्ष चेन सिंह बरकङÞे ने कहा कि जिस विकास परियोजना को लेकर समाज की सहमति नहीं है, उसे बनने नहीं देना चाहिए । मैं इसको लेकर निवास विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से चर्चा करूंगा।

चुटका एवं राजा दलपत शाह अभयारण्य को तत्काल रद्द करें सरकार 

नारायणगंज जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र बरकङे ने युवाओं को आह्वान करते हुए कहा कि समाज के साथ होने वाले शोषण के खिलाफ आपको आगे आना होगा अन्यथा हम कम्पनियों के बंधुआ मजदूर बनके रह जाएंगे । चुटका एवं राजा दलपत शाह अभयारण्य को तत्काल सरकार रद्द करे । उपस्थित लोगों से 3 नवम्बर को मंडला में होने वाली आदिवासी अधिकार हुंकार रैली में हजारों की संख्या में शामिल होने हेतु अपील किया। इस सभा को जिला पंचायत सदस्य प्यारी बाई गोठरिया, पुर्व जिला पंचायत सदस्य गुलाब सिंह परस्ते, जिन्दगी बचाओ आंदोलन इंदौर की समारूख धारा, महिला अधिकार मंच की भारती शुक्ला, जन संघर्ष मोर्चा के विवेक पवार, भू अधिकार के अनिल कर्णे, बरगी मछुआरा संघ के मुन्ना बर्मन, राजा दलपत शाह अभयारण्य विरोधी मोर्चा के राजेन्द्र पुटटा, किसान सभा के राम नारायण कुङरिया, मीरा बाई मरावी, सोना बाई, नवरत्न दुबे, नोने लाल कुङापे, अमर सिंह आदि ने भी संबोधित किया । कार्यक्रम का संचालन बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने किया ।

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