Monday, January 6, 2020

मुख्यमंत्री के साथ मीटिंग में शामिल था आदिवासी किसान के 10 प्रतिशत में जेबर गिरवी रखने वाला सूदखोर

मुख्यमंत्री के साथ मीटिंग में शामिल था आदिवासी किसान के 10 प्रतिशत में जेबर गिरवी रखने वाला सूदखोर

सूदखोर के रजिस्टर में घंसौर पुलिस को मिले लगभग 800 कर्जदारों के नाम

घंसौर पुलिस ने आदिवासी किसान को प्रताड़ित करने वाले सूदखोर को मुचलका पर छोड़ा

हम आपको बता दे सिवनी जिले में अनुसूचित क्षेत्रों सहित सामान्य क्षेत्रों में भी आदिवासियों के जमीन व जेवर गिरवी रखकर हजारों एकड़ जमीन और कई किलो जेबर को रफा दफा कर दिया गया है लेकिन जिनके पास आदिवासियों के जेबर व जमीन अनुसूचित क्षेत्रों में गिरवी रखा हुये थे। ऐसे सेठ साहूकार की रातों की नींद 9 अगस्त 2019 के बाद हराम हो गई थी और वे अपनी तिजोरी को लेकर परेशान थेक्योंकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ का फरमान 9 अगस्त को जैसे ही आया कि अनुसूचित क्षेत्रों में जिन आदिवासियों की जमीन व जेबर को जिस भी सेठ साहूकार ने गिरवी रखा है उसे वापस करना पड़ेगा और नहीं करने वालो को जेल की हवा तक खाना पड़ सकता है और कड़ी कानूनी कार्यवाही होगी । इसके बाद से ही मध्य प्रदेश के 89 आदिवासी विकासखण्डों में तो सेठ साहूकारों की हालत खराब हो थी लेकिन उन्होंने अपनी तिजोरी को बचाने के लिये राजनैतिक आकाओं की तलाश करते हुये मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर अपनी तिजोरी को पुन: भरने को लेकर कामयाब हो गये थे। सेठ-साहूकार अपने अपने राजनैतिक आकाओं के साथ में मुख्यमंत्री कमल नाथ से किसी भी तरह इस नियम को शिथिल करवाने में सफल हो गये थे।

संपादक विवेक डेहरिया
सिवनी। गोंडवाना समय। 
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने जहां एक ओर विश्व आदिवासी दिवस के दिन अनुसूचित क्षेत्रों से आदिवासी समुदाय के लोगों को साहूकारों से लिये कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिये फैसला लिया और उस पर कड़कता से पालन कराने के लिये जिला स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों को कार्यवाही सुनिश्चित करने के साथ साथ अनुसूचित क्षेत्रों में कर्ज देने वाले साहूकारों को जानकारी जुटाने के भी आदेश भी दिये थे। यहां तक उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिनके जेबर व जमीन गिरवी रखे हुये है उन्हें वापस दिलवाया जाये और जो नहीं मानता है उन पर कड़ी कार्यवाही करों चाहे ऐसे लोगों को जेल ही क्यों न भेजना पड़े। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने स्वतंत्रता दिवस का संदेश देते हुये 13 अगस्त 2019 को कलेक्टर व एसपी को देते हुये जनअधिकार की व्डीयो कांफ्रेसिंग में स्पष्ट रूप से निर्देश दिये थे कि अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय परिवारों पर साहूकारी ऋण विमुक्ति अध्यादेश लाया जायेगा।

लखनादौन विधायक की मौजूदगी में ज्वेलर्स व्यापारियों के साथ हुई थी मुख्यमंत्री की मीटिंग

9 अगस्त 2019 को जेबर व जमीन वापस दिलाये जाने की घोषणा के बाद से ही जेबर व जमीन गिरवी रखने वाले सेठ साहूकारों को तिजोरी की चिंता के कारण उनकी नींद हराम हो गई थी लेकिन सेठ साहूकारों ने अपने आप को बचाने के लिये राजनैतिक आकाओं का सहारा लेकर मुख्यमंत्री से मीटिंग का रास्ता निकालने में कामयाब हो गये थे उसी के चलते अनुसूचित क्षेत्र लखनदौन विधानसभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने वाले लखनादौन के विधायक श्री योगेन्द्र सिंह बाबा अपने विधानसभा क्षेत्र के ज्वेलर्स व्यापारियों की समस्याओं का समाधान कराने के लिये मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ से 14 अगस्त के पहले ही मीटिंग कराया था और जेबर गिरवी रखने वालों की समस्याओं का समाधान कराने का निवेदन करते हुये पहल किया था परंतु उस समय मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के साथ हुई मीटिंग की फोटो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद ही लखनादौन विधायक श्री योगेन्द्र सिंह बाबा की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठने लगे थे कि आखिर वे जेवर गिरवरी रखने वालों व्यापारियों के साथ मुख्यमंत्री से मीटिंग कराने के पीछे उनका मकसद क्या था वहीं लखनादौन विधायक की अगुवाई में जो प्रतिनिधिमण्डल मुख्यमंत्री के साथ बैठक में गया था उसमें सूत्रों की माने तो जगजीत सिंह गुजराल, विनोद जैन, देवेन्द्र जैन, संजय सर्राफ, राजेन्द्र कुमार जैन, हीरा चौकसे, संदीप शिवहरे भी शामिल थे। सबसे विशेष और गौर करने वाली यह बात यह है कि मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के साथ हुई बैठक में विधायक श्री योगेन्द्र सिंह बाबा के साथ प्रतिनिधिमण्डल शामिल थे उसमें घंसौर पुलिस ने आदिवासी किसान रामदीन भगदिया की शिकायत पर मामला दर्ज किया है वह जगजीत सिंह गुजराल जिसने 10 प्रतिशत ब्याज पर आदिवासी किसान के जेबर गिरवी रखा था वह जगजीत सिंह गुजराल भी मीटिंग में शामिल थे और गंभीर बात तो यह है कि जगजीत सिंह गुजराल के पास साहूकारी का कोई लाईसेंस ही नहीं है तो फिर वह कैसे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के साथ मीटिंग में शामिल हो गया यह बड़ा गंभीर और चिंतनीय विषय है।

सूदखोर के रजिस्टर में 557 वे नंबर पर है आदिवासी किसान का नाम  

घंसौर पुलिस ने बताया कि जगजीत सिंह गुजराल को सोमवार को गिरफतार कर मुचलके पर छोड़ दिया गया क्योंकि जमानती धारायें थी। वहीं घंसौर पुलिस ने यह भी बताया कि जगजीत सिंह गुजराल के पास साहूकारी लाईसेंस भी नहीं था वह बिना लाईसेंस के ही कर्ज देकर ब्याज का व्यापार कर रहा था। इसके पास कर्जदारों को कर्ज दिये जाने के लिये हिसाब का रजिस्टर जप्त किया गया है जिसमें लगभग 800 से अधिक कर्जदारों के नाम है और शिकायतकर्ता पीड़ित आदिवासी किसान रामदीन भगदिया का नाम 557 वें नंबर पर है। अब सवाल यह उठता है कि सूदखोर जगजीत सिंह गुजराल बिना साहूकारी लाईसेंस के ही ब्याज का धंधा व्यापार कैसे कर रहा था और सूदखोर जगजीत सिंह गुजराल के चंगूल में अनुसूचित क्षेत्र घंसौर के लगभग 800 से अधिक कर्जदार में फंसे हुये है। घंसौर पुलिस ने बताया कि जगजीत सिंह गुजराल के भाई के पास साहूकारी लाईसेंस है लेकिन वह भी दो वर्ष पहले ही रद्द हो चुका है। यह गंभीर और चिंतनीय विषय है कि अनुसूचित क्षेत्र में कैसे बिना साहूकारी लाईसेंस के इतना बड़ा कारोबार बेखौफ होकर चलाया जा रहा है यह प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवालियां निशान लगा रहा है वहीं क्षेत्र के विधायक के श्री योगेन्द्र सिंह बाबा को बिना लाईसेंस धारी सूदखोद जो कि आदिवासी किसान के जेबर 10 प्रतिशत ब्याज पर रखकर उन्हें प्रताड़ित करता था उसको मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराने में शामिल क्यों कराया गया। 

दो वर्षों से है लाईसेंस पर है प्रतिबंध फिर भी धड़ल्ले से चला रहा सूदखोरी का व्यापार

जानकारों की माने तो अनुसूचित क्षेत्र घंसौर में बीते दो वर्ष से ही साहूकारी का लाईसेंस पर प्रतिबंध लगा हुआ है उसके बाद भी सूदखोरी का कारोबार खुलेआम धड़ल्ले से चल रहा है। बताया जाता है कि अधिकांश सूदखोर राजनैतिक दलों के नेताओं और क्षेत्रिय जनप्रतिनिधियों के साथ गहरे संबंध बनाये हुये है। वहीं कुछ सूदखोर तो राजनैतिक दलों के संगठनों में पदाधिकारी बनकर संरक्षण प्राप्त करते हुये अपना सदूखोरी का धंधा बेखौफ होकर चला रहे है। सब कुछ जानते हुये भी सूदखोरों पर कार्यवाही नहीं हो पाना भी अनेकों सवालों को जन्म दे रहे है जिनके जवाब भी लोगों के पास है। 

आदिवासी परिवारों से जबर्दस्ती कर्ज वसूली पर रखें निगरानी-

राज्य सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी परिवारों को गैर लाइसेंसी साहूकारों के कर्ज से मुक्ति देने के लिये अध्यादेश लायेगी। इस संबंध में 13 अगस्त 2019 को मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने जनाधिकार कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अध्यादेश के मुख्य प्रावधानों की जानकारी कलेक्टरों को देते हुये कहा था कि अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय परिवारों पर साहूकारी ऋण विमुक्ति अध्यादेश लाया जायेगा। वहीं यह भी कहा था कि इसके अनुसार 15 अगस्त 2019 तक जनजातीय बंधुओं पर साहूकारों के जितने कर्ज हैं सबसे उन्हें मुक्ति मिल जाएगी। उनकी गिरवी रखी सम्पत्ति भी उन्हें वापस मिल जाएगी। ऐसे परिवारों पर जो बकाया कर्ज है उसकी जबरन वसूली करने पर सजा और जुमार्ना होगा। तीन साल की सजा होगी और एक लाख रुपए तक का जुमार्ना देना पड़ेगा। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिये गये थे कि वे अपने जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों में ऐसे जनजातीय परिवारों और साहूकारों पर नजर रखें। कोई भी साहूकार जबर्दस्ती कर्ज वसूली न कर पाये। ऐसे गैर लाइसेंसी साहूकारों की जानकारी भी मंगाई जा रही है यह भी कहा था। 

अध्यादेश राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिये भेजा जा रहा 

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने 13 अगस्त 2019 को ही वीडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से कलेक्टर एस पी को यह भी बताया था कि मध्यप्रदेश अनुसूचित क्षेत्रों में साहूकारी विनियम 1972 में संशोधन का अध्यादेश भी राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिये भेजा जा रहा है। अनुसूचित क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने का अभियान चलाया जायेगा। जन-धन खातों में ओवरड्राफ्ट की सुविधा का लाभ उठाने के लिये प्रेरित किया जायेगा। इसके बारे में पूरी जानकारी दी जायेगी। आदिवासी परिवारों को रुपे कार्ड जारी किये जायेंगे। यदि पहले से उनके पास हैं और क्रियाशील नहीं हैं तो उन्हें क्रियाशील बनाया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने 9 अगस्त को कहा था आदिवासियों द्वारा साहूकारों से लिए सभी कर्ज माफ होंगे- 

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने 9 अगस्त 2019 को छिंदवाड़ा में अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री ओमकार मरकाम व हजारों की संख्या में मौजूद आदिवासी समुदाय की मौजूदगी में यह कहा था कि मध्य प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों द्वारा साहूकारों से लिए गए सभी कर्ज माफ होंगे। इससे प्रदेश के डेढ़ करोड़ आदिवासी साहूकारों के कर्ज से मुक्त होंगे। सरकार ने इसके लिए सभी औपचारिक व्यवस्थाएँ कर ली हैं। सभी 89 अनुसूचित क्षेत्रों में यह कर्ज 15 अगस्त तक माफ होना शुरू हो जाएंगे। श्री कमल नाथ ने वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाये जाने की भी जानकारी दी। उन्होंने 9 अगस्त 2019 को ही यह कहा था कि आदिवासी वर्ग की मांग पर अनुसूचित जनजाति विभाग का नाम बदलकर आदिवासी विकास विभाग किया जायेगा।

विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासियों को यह दिया था तोहफा  

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने 9 अगस्त 2019 को छिंदवाड़ा में अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों द्वारा साहूकारों से लिए गए सभी कर्ज माफ होंगे, 15 अगस्त 2019 को साहूकारों से लिए गए सभी कर्ज पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे, जेवर, जमीन यदि गिरवी रखी है, तो वापिस की जाएगी, भविष्य में कोई साहूकार अनुसूचित क्षेत्र में साहूकारी का धंधा करना चाहता है तो लायसेंस और नियमों का पालन करेंगे, बगैर लायसेंस के साहूकारी का धंधा या नियमों का उल्लंघन किया तो ऐसा कर्ज नहीं चुकाया जाएगा, आदिवासियों को डेबिट कार्ड दिए जाएंगे, जरूरत पड़ने पर ए.टी.एम. से निकाल सकेंगे 10 हजार रूपए, हर हाट बाजार में खोले जायेंगे ए.टी.एम, खारिज वनाधिकार पत्रों का फिर से परीक्षण होगा और वनाधिकार पत्र जारी होंगे, 'मुख्यमंत्री मदद योजना' में आदिवासी परिवार में जन्म होने पर आधा क्विंटल और मृत्यु होने पर 1 क्विंटल खाद्यान्न मिलेगा। भोजन बनाने के लिए बड़े बर्तन भी उपलब्ध होंगे, सभी वन ग्राम राजस्व ग्राम बनेंगे, 40 नये एकलव्य विद्यालय खुलेंगे, 40 हाईस्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन होगा, आदिवासी क्षेत्रों में 7 नये खेल परिसर बनेंगे, आदिवासी क्षेत्रों के विद्यालयों में पढ़ाने वाले 53 हजार अध्यापकों को शासकीय शिक्षक के समान सुविधाएँ मिलेंगी, अनुसूचित जनजाति विकास विभाग का नाम अब आदिवासी विकास विभाग होगा।











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