Tuesday, February 11, 2020

कमल नाथ सरकार आदिवासियों के बजट का नहीं खर्च कर पाई 13 हजार करोड़

कमल नाथ सरकार आदिवासियों के बजट का नहीं खर्च कर पाई 13 हजार करोड़ 

आदिवासियों के विकास को लेकर अधिकारियों की गैरजिम्मेदारी उजागर, 

लगभग डेढ़ माह में खर्च करने होंगे 13 हजार करोड़ 

2019-20 में 33 466 करोड़ में से 20 हजार करोड़ ही खर्च कर पाये

इंदौर। गोंडवाना समय।
केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2019-2020 के बजट में मध्य प्रदेश के आदिवासियों के लिए ट्राइबल सब प्लान(टीएसपी) के तहत आवंटित 33 हजार 466 करोड़ में से शेष बचे 13,000 हजार करोड़ को आदिवासी समुदाय के विकास एवं संरक्षण में वित्त वर्ष 2020-21 से पूर्व खर्च आदिवासियों के कल्याण उत्थान व विकास को लेकर प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष, आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास) मध्यप्रदेश ने जानकारी मिलने के बाद महामहिम राज्यपाल मध्य प्रदेश और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के नाम पत्र लिखकर मांग करते हुये बताया कि आदिवासियों के विकास, सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए भारतीय संविधान में अनुच्छेद 275(1) के तहत बजट में विशेष प्रावधान किया गया है, जिसके लिए ट्राइबल सब प्लान(टीएसपी) के तहत उक्त बजट में केंन्द्र और राज्य सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2019-2020 में 33 हजार 466 करोड़ रूपए आवंटित किए गए थे। 

शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, सिंचाई आदि कार्यों में पिछड़ा आदिवासी समुदाय 

श्री डी.एस. चौहान प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष, आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास) मध्यप्रदेश ने जानकारी मिलने के बाद पत्र लिखकर मांग करते हुये बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों की आदिवासियों के प्रति निराशाजनक एवं गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण उक्त राशि में से 20,000 हजार करोड़ ही खर्च हो सके है। जबकि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषाहार, सड़क, बिजली समेत अनेक मूलभूत सुविधाओं का अत्यधिक अभाव है।
आदिवासी क्षेत्रों में नवीन चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित नहीं होने के कारण कुपोषण के मामले में मध्यप्रदेश राज्य पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। आदिवासी क्षेत्रों में पोलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के अभाव के कारण उन्हें तकनीकि शिक्षा हेतु दूरस्थ जिलों/संभागों में अध्ययन के लिए मजबूरी में प्रस्थान करना पड़ता है। छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ-साथ विगत 15 वर्षो से नवीन छात्रावास भवन निर्मित नहीं होने से आदिवासी छात्र-छात्राऐं अनेक मूलभूत सुविधाओं के अभाव में शिक्षा से वंचित हो रहे है। आदिवासी क्षेत्रों में कृषि महाविद्यालय स्थापित नहीं होने तथा सिंचाई के साथ-साथ विद्युत आपूर्ति एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण आदिवासी क्षेत्र कृषि कार्यो में भी पिछड़ता जा रहा है।

विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से रहेंगे उत्तरदायी 

श्री डी.एस. चौहान  प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष, आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास) मध्यप्रदेश ने आगे मांग करते हुये उल्लेख किया है कि वर्तमान में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आदिवासियों की समस्याआें को नजरअंदाज किया जा रहा है एवं इस प्रकार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण उक्त बजट के 13,000 हजार करोड़ रूपए अभी तक खर्च नहीं हो सके हैं। वित्त वर्ष 2019-2020 समाप्त होने में मात्र 50 दिन शेष हैं। यह राशि खर्च नहीं होने की स्थिति में लैप्स हो सकती है, जिसके कारण आदिवासी क्षेत्रों का विकास अवरूद्ध हो जाएगा और इसके लिए विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी रहेगें।

आदिवासियों के विकास में इन कार्यों में खर्च किया जाये राशि 

श्री डी.एस. चौहान प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष, आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास) मध्यप्रदेश ने आगे मांग करते हुये उल्लेख किया है कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास में बाधक एवं लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई किए जाने तथा ट्राइबल सब प्लान(टीएसपी) की शेष राशि 13,000 हजार करोड़ को वित्त वर्ष 2020-2021 से पूर्व जल्द से जल्द प्रदेश में आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए संभाग स्तर पर 5000-5000 सीटर, जिला स्तर पर 1000-1000 सीटर, तहसील स्तर पर 500-500 सीटर नवीन छात्रावास भवन निर्माण की स्वीकृति, आदिवासी क्षेत्रों में नवीन चिकित्सा महाविद्यालय, कृषि महाविद्यालय, पोलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालय स्थापित करने एवं आदिवासी क्षेत्रों में व्याप्त गंभीर समस्याओं के मद्देनजर विभिन्न योजनाओं के तहत खर्च किए जाने हेतु आदेश जारी करने किये जाने की त्वरित निर्णय लेने को कहा है । 

आदिवासियों के विकास में राशि खर्च करने इन्हें भी भेजा है पत्र 

प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष, आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास) मध्यप्रदेश ने जानकारी मिलने के बाद पत्र लिखकर आदिवासियों के विकास में शेष राशि को खर्च करने के लिये राष्ट्रीय अ.ज.जा. आयोग, भारत सरकार, नई दिल्ली, श्री ओमकार मरकाम, मंत्री-आदिम जाति कल्याण विभाग, म.प्र. शासन, भोपाल, श्री एस. आर. मोहंती, मुख्य सचिव, म.प्र. शासन, भोपाल, प्रमुख सचिव, आदिम जाति कल्याण विभाग, म.प्र. शासन, भोपाल, म.प्र. के आदिवासी समाज के समस्त विधायकों से मांग किया है।

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