Monday, February 17, 2020

16 वीं और आजादी के बाद आठवी जनगणना में क्या होगा खास जाने आप

16 वीं और आजादी के बाद आठवी जनगणना में क्या होगा खास जाने आप 

नई दिल्ली। गोंडवाना समय। 
आजादी के बाद आठवीं जनगणना होने जा रही है, पहली बार पेपर सेंसेस से डिजिटल सेंसेस का परिवर्तन होगा जनगणना का कार्य लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करने और उनके घर में उजाला और खुशी देने का आधार है। जनगणना का कार्य राष्ट्रीय यज्ञ है जिसमें निष्ठा के साथ आहुति देनी है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 23 सितंबर 2019 को जनगणना भवन के शिलान्यास समारोह के मौके पर बोलते हुए कहा था कि पूर्व में परंपरागत रूप से जनगणना होती आई है परंतु 1865 से 1872 के दौरान जनगणना का वर्तमान स्वरूप आया। 

पहली बार पेपर सेंसस से डिजिटल सेंसस का परिवर्तन होगा

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बताया था कि कुल सोलहवीं जनगणना तथा आजादी के बाद आठवीं जनगणना होने जा रही है, जिसमें सूचना एकत्र करने के लिये मोबाइल एप का प्रयोग भी किया जायेगा। उनका कहना था कि पहली बार पेपर सेंसस से डिजिटल सेंसस का परिवर्तन होगा। उन्होंने बताया था कि इसके अंदर 16 भाषाओं में जानकारी दी जा सकती है जिसका सत्यापन किया जायेगा।

भारत बहुभाषी देश है तथा देश में 270 बोलियां 

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने जनगणना भवन के शिलान्यास समारोह के मौके पद कहा था कि वर्ष 2011 की जनगणना में पता चला कि भारत बहुभाषी देश है तथा देश में 270 बोलियां हैं। उनका कहना था कि वर्ष 2011 कि जनगणना के आधार पर श्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद 2014 में सोचने की शक्ति में बदलाव हुआ और चुनौतियों को समाप्त करने का विचार शुरू हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने यह भी कहा था कि वर्ष 2011 की जनगणना के आँकड़ों के आधार पर आमजन तक बिजली पहुंचाने से लेकर शौचालय तक 22 विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया गया। उनका कहना था कि उज्जवला योजना में उपयोग हुआ और 8 करोड़ परिवारों को सिलेंडर दिया गया। उनका कहना था कि आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पर 2022 में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जिसके घर में गैस चूल्हा ना होे उनका यह भी कहना था कि 2011 की जनगणना के आधार पर हरियाणा में लिंग अनुपात की दिशा में सुधारात्मक काम किये गये हैं।

भारत में दुनिया के 2.4 भू-भाग में 17.4% आबादी है

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा था कि भारत में दुनिया के 2.4 भू-भाग में 17.4% आबादी है। जिसे देखकर पता चलता है कि हमें कितना परिश्रम करना है। उनका कहना था कि जिस देश के पास जनसंख्या के अनुपात में कुदरती संपदा कम होती है उस देश को ज्यादा मेहनत और प्रयास करने पड़ते हैं। आगे केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने यह भी कहा था कि वर्ष 2011 में पता चला कि हमारा देश सबसे युवा है।

विधानसभा-लोकसभा तथा आरक्षित क्षेत्र होता है तय 

श्री अमित शाह ने कहा कि जनगणना 2021 में मोबाइल एप का प्रयोग कर डिजिटल डाटा एकत्र किया जायेगा और सही तथा विस्तृत डेटा उपलब्ध होने से विश्लेषण कर देश के विकास का खाका तैयार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने ने कहा कि डेटा विश्लेषण के वैज्ञानिक तरीके से विधानसभा तथा लोकसभा के क्षेत्र तथा आरक्षित क्षेत्रों को तय किया जाता है । उन्होंने कहा कि इससे देश के अर्थ तंत्र को मजबूत करने, विकास की नींव डालने तथा लोकतंत्र को मजबूत करने का काम किया जायेगा।

राष्ट्रीय यज्ञ जिसमें निष्ठा के साथ देनी है आहुति 

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने शिलान्यस के दौरान सभी अधिकारियों/कर्मचारियों से गंभीरता और बारीकी से जन भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए जनगणना के कार्य को करने की सलाह दिया था और कहा था कि यह राष्ट्रीय यज्ञ है जिसमें आपको निष्ठा के साथ आहुति देनी है।

पहली बार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) बनाने जा रहे हैं

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा था कि पहली बार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) बनाने जा रहे हैं। जिससे देश की कानून व्यवस्था में सुधार होगा तथा देश के विकास को नई राह मिलेगी। उनका कहना था कि जनगणना का कार्य लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करने और उनके घर में उजाला और खुशी देने का आधार है। उनका यह भी कहना था कि जनगणना, देश से गरीबी भगाने तथा देश को शिक्षित बनाने का आधार है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा था कि जनगणना के बहुआयामी उपयोगों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि डिजिटल जनगणना से डेटा एकत्र किया जा सकेगा जिससे जन्म-मृत्यु पंजीकरण के आधार पर मतदाता सूची अपडेट करनी होगी। 
इस मौके पर गृह सचिव श्री अजय कुमार भल्ला ने भी कहा था कि भारत में महा-रजिस्ट्रार द्वारा मोबाइल एप जारी किया गया है जिससे जनगणना 2011 की समस्त प्रक्रिया जाँचने हेतु विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि जगह की कमी तथा कार्य के दायित्वो के बढ़ने के कारण जनगणना भवन के रूप में एक जगह पर बैठने की व्यवस्था की जा रही है।

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