Monday, February 17, 2020

कमलनाथ कह रहे बेटियों की सुरक्षा के लिए गंभीरता बरते,अफसर,कर्मचारी नहीं निभा रहे जिम्मेदारी

कमलनाथ कह रहे बेटियों की सुरक्षा के लिए गंभीरता बरते, अफसर,कर्मचारी नहीं निभा रहे जिम्मेदारी

बटामा स्कूल में बेटी से छेड़खानी ने खोल दी जिम्मेदारी की पोल

सिवनी। गोंडवाना समय। 
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके कई मंत्री बेटी बचाओं और बेटी पढ़ाओं के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भाषण देते हुए नहीं चूक रहे हैं। पुलिस विभाग तक के बड़े से लेकर छोटे अधिकारी-कर्मचारियों तक को बार-बार निर्देश दिए जा रहे हैं कि बेटियों की सुरक्षा एवं उनके मामले को लेकर संवेदनशीलता बरती जाए लेकिन सिवनी जिले में मुख्यमंत्री कमलनाथ के यह अफसर अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभा रहे हैं।
          बेटियों के अपराधों में भी पुलिस अधिकारी-कर्मचारी गंभीरता रखने की बजाय उसमें भी अपने ईमान को दौलत की चमक के साथ बेच दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों के आव्हान पर शिक्षक मेरी शाला मेरी जिम्मेदारी के तहत स्कूलों को चमन और स्मार्ट बनाने में बकायदा टीवी व अन्य उपहार देकर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वहीं बेटियों की सुरक्षा को लेकर शिक्षक कितने गंभीर है इसका उदाहरण बटामा स्कूल में साफतौर पर सामने आ गया है।
           जहां शिक्षक 14 फरवरी को मेरी शाला मेरी जिम्मेदारी के तहत टीवी का उपहार देकर जिम्मेदारी निभाते रहे और उससे एक दिन पहले बटामा स्कूल की बेटी के साथ छेड़खानी की घटना के बाद स्कूल के प्रधान पाठक,शिक्षक सहित बीआरसी तक ने कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई। हालांकि कुरई बीआरसी चित्तौड़ सिंह कुशराम का कहना है कि शिक्षक सलीम के खिलाफ शिकायत आई है और उनकी सहायक आयुक्त एसएस मरकाम से बात हुई है। जल्द ही कार्रवाई होगी।
          वहीं 13 फरवरी की घटना को लेकर अपना बचाव करते हुए बीआरसी कुशराम यह कहते हुए नजर आए कि उन्हें जानकारी नहीं थी। गोंडवाना समय में खबर प्रकाशित होने के बाद मामला उजागर होने से बीआरसी चित्तौड़ सिंह कुशराम कह रहे हैं कि शिकायत आ गई है और जल्द ही कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री, गृहमंत्री कह रहे है गंभीरता बरते, पुलिस करवा रही समझौता-

प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ,पुलिस विभाग के गृहमंत्री आईजी,डीआईजी,एसपी सहित पुलिस अधिकारियों की आए दिन बैठक लेकर और वीडियो कान्फ्रेसिंग के दौरान साफतौर पर निर्देश दिए जा रहे हैं कि महिलाओं और बेटियों से संबंधित अपराधों को लेकर संवेदनशीलता बरती जाए। कितना भी बड़ा और ओहेदार आरोपी हो उसके  िखलाफ कार्रवाई कर सलाखों के पीछे भेजा जाए लेकिन सिवनी जिले की पुलिस मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए काम कर रही है। इसका उदाहरण बटामा स्कूल में बीते दिनों साफतौर पर सामने आया है। छात्रा से छेड़खानी के मामले में ग्रामीणों द्वारा सूचना देने के बाद मौके पर पहुंचकर पुलिस ने छेड़खानी करने वाले शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय संवेदनशील मामले में समझौता करवा दिया। सूत्र बताते हैं कि समझौते में लेनदेन भी किया गया है। हालांकि इस कृत्य को पुलिस से लेकर शिक्षा विभाग के दलालनुमा अधिकारी-कर्मचारियों ने छुपाने का भी प्रयास किया लेकिन मीडिया को भनक लग गई और खबर का प्रकाशन किया इसके बावजूद पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया है इससे साफ जाहिर हो रहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के ये अफसर बेटियों को लेकर कितनी गंभीरता और संवेदनशीलता बरत रहे हैं।

बेटी की छवि से ज्यादा स्कूल की छवि को तवज्जो-

मेरी शाला मेरी जिम्मेदारी के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं लेकिन बेटियों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी नजर नहीं आ रही है। इसका उदाहरण बटामा स्कूल के प्रधान पाठक और शिक्षकों ने कर दिया है। छात्रा के साथ छेड़खानी की घटना घटित होने के बाद नैतिकता का परिचय देते हुए निर्भिकता के साथ प्रधान पाठक और अन्य शिक्षक को छेड़खानी करने वाले शिक्षक सलीम के खिलाफ एफआईआर करवानी चाहिए थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और स्कूल की छवि को तव्ज्जो देकर समझौता करवा दिया। ऐसे में प्रधान पाठक की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा सकती है। लोगों का मानना है कि जितना दोषी छेड़खानी करने वाला शिक्षक है उतने ही दोषी संवेदनशील अपराध को छुपाकर रखने वाले शिक्षक भी दोषी हैं। अब देखना यह है कि ट्रायवल विभाग के एसएस मरकाम इन अधिकारियों के खिलाफ भी कोई ठोस कदम उठाते है या नहीं यह तो आने वाला समय बताएगा।

समाजिक संगठनों की भी असंवेदनशीलता उजागर-

सिवनी जिले में बेटियों की सुरक्षा को लेकर कई समाजिक संगठन कार्यक्रम में बड़े-बड़े भाषण देते नजर आते हैं लेकिन बटामा में बेटी के साथ हुई छेड़खानी को लेकर समाजिक संगठनों की भी असंवेदनशीलता उजागर हो गई है। खासकर महिला संगठन भी इस मामले को लेकर सामने नहीं आए हैं।

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