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आर्थिक अनियमितता को अंजाम देने बनाया पुलिया जहां आगे रास्ता ही नहीं

आर्थिक अनियमितता को अंजाम देने बनाया पुलिया जहां आगे रास्ता ही नहीं

घंसौर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत सल्हेपानी का मामला

दीपक कुड़ोपा संवाददाता 
घंसौर। गोंडवाना समय। 
जनपद पंचायत घंसौर में जड़े जमाकर पंचायतों में ठेकेदारी कर रहे ठेकेदार तकनीकी अमला और पंचायत के सरपंच-सचिव को झांसे में लेकर जमकर भ्रष्टाचार कर खुद का फायदा और सरकार के खजाने को चपत लगा रहे हैं। इसका उदाहरण मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित साल्हेपानी ग्राम पंचायत के यादव मोहला खंदारी में देखा जा सकता है।
ग्राम पंचायत और ठेकेदार ने स्वीकृति से हटकर और घटिया निर्माण कर लगभाग 14 लाख रुपए की राशि निकलने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिया भी ऐसी बनाई जा रही है कि बारिश के दौरान पुलिया बचने की उम्मीद ही नहीं है। सल्हेपानी पंचायत के यादव मोहला से जंगल खंदहरी में लगभग 14 लाख रुपए की लागत की जंगल पहुंच मार्ग के नाम पर पुलिया स्वीकृत की गई है। जिसकी तकनीकी स्वीकृति के अनुसार चार रो की पुलिया बननी थी लेकिन स्थल पर गौर फरमाऐं तो तीन रो की पुलिया ही बनाई गई है। शेष पाइप पुलिया में क्यों नहीं लगाए गए इस पर तकनीकी स्वीकृति देने वाले और सुपरविजन करने वाला अमला गोलमोल जवाब दे रहा है।

खाते से निकाले 1.35 लाख रुपए की राशि

पुलिया का निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं  हुआ है और कत्तल पत्थर और बोल्डर व डस्ट मिलाकर तैयार किया गया कांक्रीट से पुलिया की दीवार खड़ी कर दी गई है। हाथों से ही मटेरियल निकल रहा है जिसका बाद में सीमेंट को घोल पिलाकर थिगड़ा लगाया गया है। पाइप के पास थिगड़ा का नजारा अलग ही दिखाई दे रहा है। पुलिया के ऊपर कांक्रीट का फर्स भी नहीं किया गया है। वही पुलिया लगाकर खाते से 1.3 लाख रुपए निकाल लिए गए हैं। उपयंत्री ने बकायदा मुल्यांकन भी कर दिया है। जबकि ग्रामीण बताते हैं कि अब तक पुलिया निर्माण कार्य के लिए पीएस ट्रेडर्स साहिल जैन जो कि पूर्व में इसी पंचायत में  शौचालय निर्माण घोटाले में घिरते हुये नजर आये थे।  

बेस में भर दिए गए बोल्डर पत्थर

सल्हेपानी से दादरी गांव के पहुंच मार्ग पर लगभग 6 लाख रुपए की लागत से बनाई गई दो रो की सीसी पुलिया में गांव के पंच व ग्रामीणों की मानें तो क्रेशर से निकले हुए पत्थर और बोल्डर भर दिए गए हैं। वहीं डस्ट से दीवार का निर्माण कर दिया गया है।
वहीं पुलिया के ऊपर कांक्रीट भी नहीं किया गया है। पुलिया के घटिया निर्माण कार्य के चलते ग्रामीणों में गुस्सा भी है। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले जब पुलिया के ऊपर जेसीबी से मुरम फैलाई जा रही थी तब गांव के लोगों ने जेसीबी को बाहर निकलवा दिया था। जिसकी पूरी राशि निकाल ली गई है ग्रामीणों की मानें तो पुलिया ऐसी बनाई गई है कि बारिश के दौरान उसका पानी पुलिया से निकासी होने की बजाय खेत में भरा रह सकता है। इसी प्रकार अभी जो वर्तमान में पुलिया निर्माण करवाया जा रहा है जिस पर अनियमितायें की जा रही है वही वर्तमान इंजीनियर एवं एसडीओ आर एस मर्सकोले का साफ कहना है कि अधिकारी और ठेकेदार द्वारा डरा धमकाकर उससे मुल्याकंन कार्य कराया गया है। इंजीनियर भी मान रही हैं कि घटिया काम किया गया है।

आरईएस विभाग के ईई और सीईओ क्यों है चुप

तकनीकी स्वीकृति के विपरीत और घटिया क्वालिटी की पुलिया बनाए जाने के मामले में आरईएस विभाग के ईई और जनपद पंचायत और जिला पंचायत की सीईओ की चुप्पी निश्चित तौर पर कहीं न कहीं आर्थिक अनियमितता और ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा दे रही हैं। इस मामले को लेकर जिला पंचायत सीईओ श्री सुनील दुबे को फोन लगाया गया लेकिन किसी व्यस्तता के चलते उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया। 

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