Saturday, February 1, 2020

किसानों के सीने में गोली मारकर उनकी आवाजें दवाई जाएंगी तो स्वराज की कल्पना रह जायेगी अधूरी

किसानों के सीने में गोली मारकर उनकी आवाजें दवाई जाएंगी तो स्वराज की कल्पना रह जायेगी अधूरी  

सिवनी। गोंडवाना समय। 
किसान आंदोलन में शहीद हुये राजेश राय जी के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में 1 फरवरी 2020 दिन शनिवार को दोपहर उपरांत 2:00 बजे अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष भाई डॉक्टर प्रवीण तोगड़िया का आगमन हुआ, उन्होंने सर्वप्रथम डॉ प्रमोद राय के निज निवास में पहुंचकर भोजन ग्रहण किया
तदोपरांत कार्यक्रम स्थल पहुंचकर शहीद राजेश राय को पुष्पांजलि अर्पित की मंच से उपस्थित कृषकों को एवं उपस्थित जनसमुदाय को देश की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर संबोधित किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण की रूपरेखा तय हो चुकी है और शीघ्र ही राम मंदिर निर्माण होगा, हमारी रामराज्य की जो कल्पना है उसके लिए हमें सबको मिलकर आगे आना होगा ताकि देश बचा रहे।

नहीं मिल रहा राष्ट्रीय फसल बीमा योजना का लाभ 

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस देश का किसान बचा रहे स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट सीटू प्लस 50 लागू की जानी चाहिए, किसानों की उपज का उचित मूल्य लागत का डेढ़ गुना उन्हें मिले और लागत कम की जानी चाहिए, राष्ट्रीय फसल बीमा योजना का लाभ कृषकों को नहीं मिल रहा है क्योंकि यह निजी हाथों में दे दी गई संस्था है। गेहूं, धान इत्यादि का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए और लागत मूल्य निर्धारित से डेढ़ गुना होना चाहिए साथ ही कृषको को एकजुटता का परिचय देते हुए जहां कहीं भी किसानों की बात हो वहां पहुंचकर मनोबल बढ़ाना चाहिए। 

फिर दोहराई गई शहीद राजेश राय की प्रतिमा लगाने की मांग

उक्त कार्यक्रम को सर्वप्रथम शहीद राजेश राय शिक्षा प्रसारक एवं सामाजिक संस्था द्वारा संचालित अरुणोदय पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा मनमोहक प्रस्तुति पुलवामा अटैक का नाट्य मंचन किया गया। कार्यक्रम में पंडित दामोदर शुक्ला ने संबोधित किया तदोपरांत बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक स्वराज सिंह बघेल ने संबोधित किया। जबकि कार्यक्रम का संचालन शहीद राजेश राय के अग्रज डॉ प्रमोद राय द्वारा किया गया। जिसमें क्षेत्र की जनता ने उत्साह पूर्वक उक्त कार्यक्रम को सुना और मुक्त कंठ से प्रशंसा की इसके साथ ही क्षेत्रीय जनमानस की भावना के अनुरूप शहीद राजेश राय की मूर्ति बस स्टैंड प्रांगण में लगाई जाने हेतु भी मंच से बातें दोहराई गई एवं मंदसौर में किसान आंदोलन में शहीद हुए कृषको को भी याद किया गया। इसी तरह अगर किसानों के सीने में गोली मारकर उनकी आवाजें दवाई जाएंगी तो जो हमारी स्वराज की कल्पना है वह अधूरी रह जाएगी, उन्होंने अपने उद्बोधन में उद्योग पतियों को दिए जाने वाले बढ़ावा और कृषकों की आत्महत्याओं पर भी चिंता जाहिर किया। 

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