Tuesday, February 25, 2020

पांचवी अनुसूची के माध्यम से राज्यपाल को दिये गये महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार-सुश्री अनुसुईया उईके

पांचवी अनुसूची के माध्यम से राज्यपाल को दिये गये महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार-सुश्री अनुसुईया उईके 

अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के संरक्षण और अधिकार विषय पर कार्यक्रम किया गया आयोजित 

आदिवासी औद्योगिक संवर्धन एवं संचालन सम्मेलन में हुई शामिल राज्यपाल

आदिवासी समाज खुद बना रहे कंपनी और दूसरों को दे रहे रोजगार 

रायपुर। गोंडवाना समय।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मेक इन इंडिया की अवधारणा को साकार करने की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल है। आजादी के 70 सालों के बाद हमारे आदिवासी बंधुओं की यह सोच जो सामने आई है, वह वाकई सराहनीय है। आदिवासी समाज के द्वारा खुद की कंपनी बनाई जा रही है और दूसरों को रोजगार भी दिये जाने की पहल की जा रही है। इसके लिए मैं ट्राईबल कोल फील्ड प्राइवेट लिमिटेड, मुरमू पावर जनरेशन प्राइवेट लिमिटेड और अन्य सहयोगियों को शुभकामनाएं देती हूं। यह बात राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कही। राज्यपाल ने व्ही.आई.पी. रोड, राजीव गांधी मार्ग स्थित एक निजी होटल में आयोजित आदिवासी औद्योगिक संवर्धन एवं संचालन सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुये उक्त बाते कही।

पांचवी अनुसूची और पेसा कानून की जानकारी दें और समाज को जागरूक करें

राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में राज्यपाल को पांचवी अनुसूची के माध्यम से महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार दिए गए हैं। जब मैं पिछले दिनों राष्ट्रपति भवन में राज्यपालों के सम्मेलन में शामिल हुई तो आदिवासियों के अधिकारों से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा करने के लिए एक उप समूह बनाया गया था, जिसमें इस विषय पर वृहत चर्चा हुई, तब यह बातें सामने आए कि अभी भी कुछ राज्यों में परामर्शदात्री समिति का गठन तो हुआ है परन्तु इनकी बैठकें नियमित नहीं हो पा रही है। यह बैठकें नियमित होनी चाहिए। पेसा कानून बनाए गए हैं परन्तु उनके नियमों को बनाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह आप सबकी जिम्मेदारी है कि अपने-अपने राज्यों में पांचवी अनुसूची और पेसा कानून की जानकारी दें और समाज को जागरूक करें।

आदिवासी परम्परागत शिल्प बनाने में है माहिर 

राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके ने सुझाव देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्र में जो भी परियोजना या उद्योग धंधे स्थापित हों, वहां विस्थापन आवश्यक हो तो उसके बदले उन्हें मुआवजा-जमीन तथा रोजगार भी अनिवार्य रूप से दी जाए। वहां के स्थानीय युवाओं को तकनीकी रूप से प्रशिक्षण दिया जाए। उनके कौशल विकास के लिए ऐसी विशिष्ट योजनाएं बनाई जाए, जो उनकी परम्पराओं, व्यवहार, उनके सदियों के कौशल ज्ञान को ध्यान पर आधारित हो। आदिवासी परम्परागत शिल्प बनाने में माहिर हैं और हमें उन्हें इस क्षेत्र में कुशल बनाए जाने की आवश्यकता है। इनके लिए समुचित बाजार भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके। यह कार्यक्रम अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के संरक्षण और अधिकार विषय पर आयोजित किया गया। इस अवसर पर ट्राईबल कोल फील्ड प्राइवेट लिमिटेड के पहले दो शेयर होल्डर को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में ट्राईबल कोल फील्ड प्राईवेट लिमिटेड के चेयरमेन सह प्रबंध निदेशक ने कार्यक्रम की अवधारणा, कोयले की वैकल्पिक उपयोग और पांचवी अनुसूची के प्रावधानों की जानकारी दी। इस कार्यक्रम में नेपाल के पूर्व सांसद श्री शिवनारायण उरांव और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ उपस्थित थे।

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