Friday, February 21, 2020

पदोन्नति में आरक्षण पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के समर्थन व एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन की माँग को लेकर सपाक्स ने सौंपा ज्ञापन

पदोन्नति में आरक्षण पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के समर्थन व एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन की माँग को लेकर सपाक्स ने सौंपा ज्ञापन

समाज को बांटने, तुष्टीकरण की राजनीति, जातिवादी मानसिकता के खिलाफ संगठन डटकर करेगा विरोध 

सिवनी। गोंडवाना समय।
सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स के जिला नोडल अधिकारी प्रद्युम्न चतुवेर्दी एवं एन.एस.बैस ने बताया कि पदोन्नति में आरक्षण पर विगत दिवस माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के समर्थन व एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन की माँग को लेकर पूरे प्रदेश में सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स, सपाक्स समाज, युवा एवं महिला संगठन द्वारा सांसद-विधायक को ज्ञापन दिया जा रहा है तथा कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल को भी ज्ञापन दिया जाएगा। 

सासंद ढाल सिंह बिसेन को सौंपा ज्ञापन 

ज्ञातव्य हो विगत दिवस उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि राज्य सरकारें पदोन्नति में आरक्षण देने के लिये बाध्य नहीं हैं, न्यायालय ने कहा यह मौलिक अधिकार नहीं है कि जिसमें लोग हक से आरक्षण मांगें। इसके साथ ही कहा कि न्यायालय भी राज्य को आदेश नहीं दे सकता कि वह आरक्षण दे। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का पालन कराने हेतु सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था सपाक्स, सपाक्स समाज, युवा एवं महिला संगठन ने जिले के सांसद डॉ ढाल सिंह बिसेन को ज्ञापन सौंपा। 

नौवीं अनुसूची में डालने के लिए बना रहे गलत दवाब 

सपाक्स समाज के जिलाध्यक्ष टी सी मिश्रा ने बताया कि तत्कालीन समय में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सामान्य एवं ओबीसी वर्ग कर्मचारी एसोसिएशन के उत्तराखंड राज्य के मामले में पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जो निर्णय दिया गया है इसके विरोध में एक बार फिर अनुसूचित जाति,जनजाति के वोट बैंक के तुष्टीकरण के लिए समस्त राजनीतिक दल पुन: लामबंद हो गए हैं एवं सरकार पर पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में पुन: संविधान संशोधन कर इसे नौवीं अनुसूची में डालने के लिए गलत दवाब बना रहे हैं। 

सांसद-विधायकों की प्रतिक्रियायें सम्मानजनक व संवैधानिक नहीं

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पदोन्नती मे आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था पर दिए निर्णय के विरोध में विभिन्न राजनीतिक दलों के वर्ग विशेष के सांसदों विधायकों द्वारा जिस तरह की प्रतिक्रियाएं दी गई हैं वह 
कतई सम्मानजनक एवं संवैधानिक नही है। समाज को बांटने, तुष्टीकरण की राजनीति, जातिवादी मानसिकता के खिलाफ सपाक्स समाज, युवा एवं महिला संगठन डटकर विरोध करेगा। सांसद को ज्ञापन सौंपते समय एम.गौतम, विनोद मिश्रा, मनीष मिश्रा, एस.के.सनोडिया, एस. बरमैया, विनोद सोनी, एस.खान, मो.साहिल, टी.आर.पांडे, एम.एल.तिवारी, व्ही.उपाध्याय, अरविंद मिश्रा, डी.के.तिवारी, अजय शर्मा, के.दुबे, 
व्ही.के.जायसवाल, पी.जैन, व्ही. जैन, संजय तिवारी आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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