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जनजातीय हितों पर कोविड-19 के प्रभाव से लड़ने के लिए ट्राइफेड ने राज्यों / केन्द्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखा

जनजातीय हितों पर कोविड-19 के प्रभाव से लड़ने के लिए ट्राइफेड ने राज्यों / केन्द्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखा


नई दिल्ली। गोंडवाना समय।
जनजातीय कार्यों के मंत्रालय के अर्न्तगत ट्राइफेड ने गैर-लकड़ी वन उत्पाद (एनटीएफपी) के व्यापार और जनजातीय हितों पर वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रभाव से लड़ने के लिए राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा सभी राज्य स्तरीय नोडल एजेंसियों को पत्र लिखा है। ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक श्री प्रवीर कृष्णा ने पत्र में उल्लेख किया है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 ने पूरी दुनिया के सामने अभूत-पूर्व कठिनाई उत्पन्न की है। लगभग सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश, व्यापार और उद्योग के सभी क्षेत्र तथा समाज के सभी वर्ग इस महामारी से प्रभावित हैं। जनजाति भी इसके अपवाद नहीं हैं विशेषकर ऐसी स्थिति में जब विभिन्न क्षेत्रों के लिए यह समय एनएफटीपी के लिए सर्वाधिक उपयोगी मौसम माना जाता है।
इसलिए यह आवश्यक है कि सभी को विशेषकर जनजाति – संग्राहको को सुरक्षित रखने के लिए कुछ एहतियाती उपायों के बारे में पहले ही विचार किया जाए। राज्यों को कुछ प्रमुख बिन्दुओं से अवगत कराया गया है।
राज्य विशेष आधारित या एनटीएफपी आधारित कुछ विशिष्ट तथ्य हो सकते हैं जिन्हें राज्य सूची में शामिल करना चाहते हों। ट्राइफेड ने सभी राज्यों तथा राज्य स्तर के सभी नोडल एजेंसियों से अनुरोध किया है कि इन महत्वपूर्ण तथ्यों को जल्द से जल्द जनजाति-संग्राहकों तथा उनके फील्ड-स्तर के अधिकारियों के पास पहुँचाएं।
कोविड-19 महामारी के दौरान एनएटीएफपी के सम्बन्ध में क्या करें और क्या न करें
  • बाजार की शक्तियां जनजाति-संग्राहकों को एनएटीएफपी की विपत्ति बिक्री के लिए बाध्य कर उनका शोषण कर सकती हैं। इसलिए एमएफपी योजना को विशेषकर संवेदनशील क्षेत्रों में अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता है।
  • एनएटीएफपी – संग्राहकों को संग्रह कार्य के दौरान स्वच्छता की सलाह दी जानी चाहिए। संग्रह कार्य के पहले और बाद में उन्हें अपने हाथों की कीटाणुमुक्त करना चाहिए।
  • वन धन विकास केन्द्रों समेत सभी एनएटीएफपी प्राथमिक प्रसंस्करण केन्द्रों के प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर रखे जाने चाहिए। प्रसंस्करण का कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केन्द्र में प्रवेश से पहले और कार्य प्रारंभ करने से पहले अपने हाथों को कीटाणुमुक्त करना चाहिए।
  • प्रसंस्करण का कार्य करने वाले व्यक्तियों को अव्यवस्थित तरीके से नहीं बैठना चाहिए। उन्हें एक-दूसरे से कम से कम 2 मीटर की दूरी बनाए रखनी चाहिए। यदि केन्द्र में जगह की कमी है तो उन्हें अलग-अलग पाली में कार्य करना चाहिए या स्वच्छ वातावरण में अपने घर पर ही कार्य करना चाहिए।
  • यदि कोई व्यक्ति ठंड या खांसी से पीड़ित है तो उसे केन्द्र में आने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और सभी संग्राहकों और प्रसंस्करण कर्मियों को उस व्यक्ति से आवश्यक दूरी बना कर रखनी चाहिए।
  • यदि किसी संग्राहक (या उसके घर का कोई व्यक्ति) में कोविड-19 के मामूली लक्षण भी दिखाई देते हैं तो उनकी स्क्रीनिंग की जानी चाहिए और जरूरी हो तो उन्हें क्वारंटाइन में रखा जाना चाहिए।
  • एनएटीएफपी की पैकिंग स्वच्छ होने के साथ-साथ कटी-फटी नहीं होनी चाहिए ताकि एनएटीएफपी रख रखाव करने वाले व्यक्ति के हाथों के संपर्क में न आएं।
  • जहां तक संभव हो नकद लेनदेन कम से कम किये जाएं और धनराशि को संग्राहकों के बैंक खातों में जमा किया जाना चाहिए।
  • संग्राहकों को सरकारी कैशलेस प्लेटफॉर्म रुपे का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
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