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शराब सुरक्षित, अनाज असुरक्षित क्यों ?

शराब सुरक्षित, अनाज असुरक्षित क्यों ?

शराब के लिये गोदाम, अनाज के लिये खरीदी केंद्रों में कोई व्यवस्था नहीं

सिवनी। गोंडवाना समय। 
कृषि प्रधान देश में जहां शराब को सुरक्षित रखने के लिये गोदाम की व्यवस्था हो और किसान की मेहनत से उत्पादित अनाज बरसात के पानी में भींगता हो, ऐसी व्यवस्थाओं के लिये आप किसे सरकार, शासन-प्रशासन या खरीदी केंद्र प्रभारियों को जिम्मेदार ठहरायेंगे।
       
ऐसा यदि एक बार, दो बार, तीन बार, चार बार, पांच बार हो तो मान भी सकते है लेकिन बार-बार यदि ऐसी ही स्थिति निर्मित होती रहे फिर भी कोई सुधार न कर पाये। सबसे विशेष बात यह है कि सत्ता चलाने वालों में अधिकांश उन्नन किसानों की श्रेणी में आते है
वहीं किसानों के संबंध में योजनाओं को क्रियान्वयन करने वाले भी उच्च शिक्षित अफसर है। इसके बाद भी किसान का अनाज को सुरक्षित नहीं पा रहे है आखिर क्या कारण है। हम आपको बता दे कि मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेंहू की खरीदी प्रारंभ है लेकिन खरीदी केंद्रों पर अनाज की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं है।

बादलपार सोसायटी में तेज बारिश से भींगा गेंहू

बेमौसम हो रही बरसात के कारण किसान का गेंहू खरीदी केंद्रों में ही भींग रहा है। इससे साफ यह कहा जा सकता है कि सरकार गेंहू उपार्जन खरीदीं केंद्र के व्यवस्थाओ में असफल होती दिखाई दे रही है। बीते दिनों कान्हीवाड़ा क्षेत्र की अनेक खरीदी केंद्रों में भी बेमौसम हुई बरसात से गेंहू भींग कर गीला हो गया वहीं कुरई ब्लॉक के बादलपार सोसायटी खरीदी केंद्र में भी तेज बारिश के चलते बहुत अधिक मात्रा में गेहूं भींग गया है। 

खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाओं की खुली पोल 

बुधवार के दिन तेज बारिश होने से बारिश जिन क्षेत्रों में हुई वहां के गेहूं उपार्जन खरीदी केंद्र के व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। बादलपार सोसायटी केंद्र में पानी तेज गिरने से पूरा अनाज भींग गया है। किसानों का लगभग 2000 विक्टल गेंहू सोसायटी में खुले आसमान के नीचे रखा हुआ था तो कि पूरी तरह से भींग गया है। 

गीला गेंहू को बेचने के लिये किसान चिंतित

वही दूसरी और खरीदी प्रबंधकों पर कार्यवाही किये जाने को लेकर वे अपनी मांग पर अड़े हुये है और हड़ताल पर चले गये थे। जिसके कारण खरीदी केंद्रों में गेंहू की खरीदी बुधवार को नहीं हो पाई। बुधवार को ही तेज बारिश होने के कारण किसानों का गेंहू खरीदी केंद्रों पर भींग गया है, अब इसका नुकसान तो किसानों को ही झेलना पड़ सकता है।
      बादरपार सोसाइटी के सेल्समेन द्वारा भी बादलपार खरीदी केंद्र में किसानों का मुंह देखकर खरीदी की जा रही है। अब किसानों के साथ बड़ी समस्या यह है कि सरकार उनके पानी में भींगकर गीला हुये गेंहू को खरीदेगी या नहीं इसको लेकर भी किसान चिंतित हो गये है। 

खरीदी केंद्रों पर ही क्यों नहीं बनाते गोदाम

यदि सरकार चाहे तो खरीदी केंद्रों पर ही क्षेत्रिय किसानों का आकलन कर औसतन उत्पादन के आधार पर गोदाम का निर्माण करवाये तो खरीदी केंद्रों से अनाज को परिवहन करने के होने वाला अपव्यय भी बच सकता है और परिवहन ठेकेदारों के द्वारा किये जाने वाले गोलमाल का खेल भी रूक सकता है। इसके साथ ही किसानों की मेहतन से ऊगाये जाने वाला अनाज भी सुरक्षित रह सकता है। 

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