Saturday, June 6, 2020

देशभर में किसान शहीद दिवस पर शहीद किसानों को दी श्रद्धांजलि

देशभर में किसान शहीद दिवस पर शहीद किसानों को दी श्रद्धांजलि,
हजारों युवाओं व किसानों ने किया उपवास 

यदि एमएसपी खत्म करने की कोशिश की गई तो सरकार गंभीर परिणाम भुगतने के लिए रहे तैयार 

किसानों के विषय में कोई भी कानून बनाने से पहले केंद्र सरकार को किसानों से करना चाहिये चर्चा 

भोपाल/सिवनी। गोंडवाना समय।  
अभिमन्यु कोहाड़, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं कोआॅर्डिनेटर, राष्ट्रीय किसान महासंघ ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि प्रसिद्ध समाजसेवी एवं गांधीवादी नेता श्री अन्ना हजारे ने भी किसानों को श्रद्धांजलि दी एवं किसानों को स्वमीनाथन आयोग के सी 2+50% फॉमूर्ले के अनुसार एमएसपी देने की मांग केंद्र सरकार से की। टेलीकांफ्रेंसिंग के जरिये राष्ट्रीय किसान महासंघ के वरिष्ठ नेताओं की जल्द मीटिंग होगी जिसमें केंद्र सरकार के किसान-विरोधी अध्यादेशों के खिलाफ देशव्यापी किसान आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।

प्रधानमंत्री के नाम भेजा गया ज्ञापन 

6 जून 2020 को राष्ट्रीय किसान महासंघ ने किसान शहीद दिवस पर शहीद किसानों को श्रद्धांजलि दी। शहीद किसानों की स्मृति में हजारों किसानों एवं नौजवानों ने 1 दिन का उपवास भी किया। कोरोना वायरस के कारण रेड जोन में सभी किसानों ने अपने घरों में ही उपवास किया व ग्रीन जोन में किसानों ने सोशल डिस्टेनसिंग का ध्यान रखते हुए गाँवों में सामूहिक उपवास किया।
राष्ट्रीय किसान महासंघ द्वारा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भी भेजा गया। राष्ट्रीय किसान महासंघ के कार्यकतार्ओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों को जागरूक भी किया।

अन्ना हजारे ने इससे किसानों की स्थिति में सुधार संभव नहीं 

प्रसिद्ध समाजसेवी श्री अन्ना हजारे ने भी किसान शहीद दिवस पर उपवास किया और किसानों व मजदूरों के नाम जारी वीडियो संदेश में कहा कि केंद्र सरकार किसानों को उनकी फसलों का स्वामीनाथन आयोग के सी 2+50% फॉमूर्ले के अनुसार एमएसपी नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों को लागत के ऊपर 50% जोड़कर एमएसपी नहीं दिया जाएगा तब तक किसानों की स्थिति में सुधार संभव नहीं है। 

लागत के सरकारी आंकड़ों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी

मध्य प्रदेश से किसान नेता शिव कुमार कक्का जी ने सन्देश जारी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार कोरोना वायरस के कारण लागू किये गए लॉकडाउन का फायदा उठाकर किसान-विरोधी अध्यादेश पारित कर रही है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने सी 2+50% के फामूर्ले के अनुसार किसानों को एमएसपी नहीं दिया है और निकट भविष्य में राष्ट्रीय किसान महासंघ विभिन्न राज्यों से आंकड़े इकठ्ठा कर सी 2 लागत के असली आंकड़ों को कृषि मंत्रालय के साथ साझा करेगा। इसके साथ ही सी 2 लागत के सरकारी आंकड़ों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अध्यादेश के जरिये कानून बनाना अलोकतांत्रिक है और किसानों के विषय में कोई भी कानून बनाने से पहले केंद्र सरकार को किसानों से चर्चा करनी चाहिए।  

एमएसपी को खत्म करने की तरफ कदम बढ़ा रही है सरकार 

पंजाब से किसान नेता श्री जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार, डब्लयूटीओ व अन्य वैश्विक संस्थानों के दबाव में एपीएमसी एक्ट में बदलाव कर के किसानों को मिलने वाले एमएसपी को खत्म करने की तरफ कदम बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की फसलों की एमएसपी पर खरीद की अपनी 
जवाबदेही से बचना चाहती है। उन्होंने कहा आवश्यक वस्तु कानून में संशोधन से सिर्फ बड़े पूंजीपतियों को फायदा होगा। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एमएसपी खत्म करने की कोशिश की गई तो सरकार गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। 

किसानों को सस्ती दरों पर मिलने वाली बिजली बंद करना चाहती है

कर्नाटक से श्री के. शांताकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार विद्युत अधिनियम 2020 के जरिये किसानों को सस्ती दरों पर मिलने वाली बिजली बंद करना चाहती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार किसानों को विद्युत अधिनियम 2020 से बाहर रखे अन्यथा केंद्र सरकार को किसानों के देशव्यापी आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वन नेशन, वन बाजार से व्यापारियों को फायदा होगा और किसानों का शोषण बढ़ेगा। 

गन्ना मिलों पर किसानों के हजारों करोड़ बकाया 

उत्तरप्रदेश से श्री हरपाल चौधरी ने कहा कि गन्ना किसानों के हजारों करोड़ों रुपये गन्ना मिलों पर बकाया हैं लेकिन केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई कदम नहीं उठा रही। उन्होंने कहा कि गन्ना मिलों द्वारा गाँवों में लगे हुए तौल-कांटें उखाड़े जा रहे हैं जिस से किसानों को अनेक तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय किसान महासंघ के वरिष्ठ नेताओं की टेलीकांफ्रेंसिंग के जरिये एक मीटिंग जल्द ही आयोजित की जाएगी और केंद्र सरकार के किसान-विरोधी अध्यादेशों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। 

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