Sunday, September 20, 2020

सौ ग्राम मुनगा में पांच गिलास दूध के बराबर होता है कैल्शियम

सौ ग्राम मुनगा में पांच गिलास दूध के बराबर होता है कैल्शियम

मुनगा में विटामिन सी, प्रीटीन, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन बी कॉम्पलेक्स

एनिमिया और कुपोषण को दूर करने मेें लाभकारी है मुनगा 


डिंडौरी। गोंडवाना समय। 

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के अंतर्गत संचालित इकाई कृषि विज्ञान केंद्र डिंडोरी एवं महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वाधान में पोषण माह के अंतर्गत सेक्टर नूनखान जिला डिंडोरी के अंतर्गत पोषण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉक्टर शैलेंद्र सिंह गौतम प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में एवं महिला बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती मंजूलता सिंह की मौजूदगी में संपन्न किया गया। 

आयरन व विटामिन सी का सेवन क्यों है आवश्यक ?

कार्यक्रम में श्रीमती रेणु पाठक तकनीकी अधिकारी कृषि विज्ञान केंद्र डिंडोरी के द्वारा पोषण का महत्व के संबंध में 2 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए संतुलित आहार की पूर्ति, बच्चों के खाने में गुणवत्ता एवं स्थानीय खाद्य सामग्री की उपयोगिता के विषय को लेकर बच्चों में आयरन के महत्व को समझाते हुए श्रीमती रेणु पाठक ने बताया कि आयरन को खाने के साथ उसका अवशोषण होना भी जरूरी है, जिसके लिए विटामिन सी का सेवन आवश्यक रूप से करना चाहिए। जो कि हमारे घरों में सरलता से मिल जाता है। 

गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिये है विशेष लाभकारी 


श्रीमती रेणु पाठक ने आगे बताया कि स्थानीय खाद्य सामग्री के अंतर्गत सौ ग्राम मुनगा के पत्ते में पांच गिलास दूध के बराबर कैल्शियम होता है। इसके साथ ही एक नींबू की तुलना में इसमें 5 गुना ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। इसके अतिरिक्त इसमें प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम एवं विटामिन बी कॉम्पलेक्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है इसके सेवन से एनीमिया और कुपोषण दोनों दूर दोनों को दूर किया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए यह विशेष लाभकारी है अर्थात इसकी पत्तियां पोषण व ऊर्जा से भरपूर होती हैं। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं एवं आंखें और मस्तिष्क को पोषण प्रदान करने के अतिरिक्त उचित पाचन को भी बढ़ावा देती हैं, इसके कोई भी दुष्परिणाम नहीं है। 

मुनगा का प्रयोग ऐसे करें 

मुनगा का प्रयोग किस प्रकार किया जाए, इस पर भी श्रीमती रेणु पाठक द्वारा जानकारी दी गई। जिसमें उन्होंने बताया गया कि मुनगा की पत्ती को सब्जी के रूप में, दाल में डालकर, पत्तियों को धोकर सुखाकर पाउडर बनाकर या चूर्ण बनाकर भी प्रयोग में लिया जा सकता है। भोजन के साथ एक-एक चम्मच लेने से स्वास्थ्य में सुधार होता है तथा शरीर भी पोषित होता रहता है। 

डिंडौरी जिले का नक्शा बनाकर बताया पोषक आहार का महत्व 

कार्यक्रम में डिंडोरी जिले का नक्शा भी बनाया गया। जिसमें स्थानीय खाद्य सामग्री के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के अनाज, दाल, फल, साग, सब्जी का प्रयोग किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिले का नक्शा केंद्र बिंदु बना रहा। इन भोज्य पदार्थों में प्रोटीन, विटामिन, काबोर्हाइड्रेट, आयरन तथा अन्य सूक्ष्म एवं स्थूल पोषक तत्वों को ध्यान में रखकर किस प्रकार आंगनवाडी कार्यकतार्ओं स्वयं स्वस्थ रहकर अपने परिवार एवं समाज को स्वस्थ रख सके। स्वयं के शरीर की रक्षा एवं पोषण हेतु नेचुरोपैथी का प्रयोग, जल शुद्धीकरण, व्यक्तिगत स्वच्छता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में श्री श्याम सिगौर सहायक संचालक महिला सशक्तिकरण, श्रीमती नीतू तिलगाम परियोजना अधिकारी एवं कुमारी भूपेश्वरी धुर्वे पर्यवेक्षक तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक श्रीमती गीता सिंह, डॉ सतेंद्र कुमार, श्री डी पी सिंह, श्री अवधेश पटेल, कुमारी श्वेता मेश्राम का कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा। 


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