Sunday, October 11, 2020

मुख्यमंत्री जी, बाल कल्याण है या भ्रष्टाचार की दुकान, बदनामी से बचाओं नहीं तो गड़बड़ी करने वालों को तत्काल हटाओं

मुख्यमंत्री जी, बाल कल्याण है या भ्रष्टाचार की दुकान, बदनामी से बचाओं नहीं तो गड़बड़ी करने वालों को तत्काल हटाओं 

अनाथ, बेसहारा, लावारिश बच्चों को संरक्षण देने के नाम पर बना संस्थान हो रहा बदनाम 

जिला बाल कल्याण समिति सदस्य व अध्यक्ष कर रहे एक दूसरे की शिकायत 

कौन सही, कौन है गलत इस पर सरकार, शासन-प्रशासन जांच कर बचाये बाल कल्याण नाम 


सिवनी। गोंडवाना समय।

बाल कल्याण समिति का नाम और काम अपने आप ही बताता है कि इसका उद्देश्य क्या है लेकिन सिवनी जिले में बाल कल्याण समिति का नाम जिस तरह से अध्यक्ष द्वारा की जा रही सदस्यों की शिकायत व सदस्यों के द्वारा की जा रही अध्यक्ष की शिकायत जांच के लिये उच्च स्तर पर किये जाने के लिये दी जा रही है। इतना ही नहीं बाल कल्याण समिति के नाम पर की जा रही आर्थिक अनियमितताओं, अधिकारों के विपरीत जाकर कार्य किये जाने को लेकर अध्यक्ष व सदस्य जिस तरह से लामबंद होकर एक दूसरे की शिकायत कर रहे है। इसका संदेश जनता व बुद्धिजीवियों के बीच में क्या जा रहा है। वहीं अनाथ, बेसहारा, लावारिश बच्चों को संरक्षण देने के नाम पर जो संस्था सरकार द्वारा बनाई गई उनके नाम की आड़ में सिवनी जिले में जिस तरह से बाल कल्याण समिति की आड़ में की जा रही कार्यप्रणाली को स्वयं ही उजागर कर रहे है उससे सरकार की मंशा पर भी अच्छा संदेश नहीं जा रहा है। अब ऐसे बच्चे जो कि अनाथ, बेसहारा, लावारिश के रूप में अपना कल्याण सोचकर यहां पर आते होंगे वे बच्चे भी यह सोच विचार कर रहे होंगे कि आखिर हमारे नाम अर्थात बाल कल्याण के नाम पर किये जाने वाले कार्यों के पीछे इनकी नियत व नीति क्या है और किस तरह से यह हमारा कल्याण कर रहे है या खुद का कल्याण करने पर तुले हुये है। सरकार, शासन, प्रशासन को बाल कल्याण समिति सिवनी में जिस तरह की कार्यप्रणाली सामने आ रही है, इस मामले में जल्द से जल्द संज्ञान लेकर कार्यवाही करते हुये बाल कल्याण समिति को आम जनता के बीच में बदनाम होने से बचाने के लिये कदम उठाना चाहिये। 


लावारिस अनाथ गुमशुदा परित्यक्त बच्चों का हित छोड़, खुद का हित साधने में लगे 

बाल कल्याण समिति के सदस्य बनकर फर्जीवाड़ा कर आर्थिक लाभ उठाये जाने के मामले में अध्यक्ष आरजू विश्वकर्मा ने गड़बड़ी की जांच व कार्यवाही के लिये पत्र लिखा है। इसके साथ ही उन्होंने उक्त गड़बड़ी को समाचार प्रकाशन के माध्यम से जगजाहिर भी किया है। इसके तहत उन्होंने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम 2016 के तहत गरीब अनाथ बेसहारा बच्चों का सहारा बनने वाली बाल कल्याण समिति के सदस्यों के मानदेय उगाने की समिति बन के रह गई है लावारिस अनाथ गुमशुदा परित्यक्त बच्चों का हित छोड़, खुद का हित साधने में लगे हैं, हेमलता जैन रागिनी तिवारी और राम कुमार चतुवेर्दी ने कुछ दिनों पहले समाचार पत्र पर भ्रामक और झूठी जानकारी से जनता को रूबरू करा कर सहानुभूति लेने का झूठा नाटक खेला था लेकिन वास्तविकता कुछ और है। 

उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर करने नहीं 6 घंटे बैठक के मिलते है 1500

बाल कल्याण समिति को 1 दिन में कम से कम 6 घंटे बैठक करने व प्रकरणों की सुनवाई करने के लिए प्रति बैठक 15 सो रुपए अध्यक्ष एवं सदस्यों को दिया जाता है। अत: एक माह में कम से कम 20 बैठक की जाती है, जिसका भुगतान 30,000 होता है। यहां स्पष्ट है कि बैठक की राशि पंद्रह सौ है ना की उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर करने की, यह बैठक का कम से कम समय 6 घंटे हैं, जो कि न्यायालय समय अर्थात 11:00 से 5:00 है। 

वाहनों पर प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के पद नाम का उपयोग नहीं कर सकते हैं

आयुक्त स्वाति मीणा नायक ने कलेक्टर को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि बाल कल्याण समिति में नियुक्त सदस्य एवं अध्यक्ष स्वयं के परिचय पत्र वाहनों पर प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के पद नाम का उपयोग नहीं कर सकते हैं। इनके द्वारा कम से कम 6 घंटे बैठक की जावेगी, कार्यालय आकर उपस्थिति पंजी में सिर्फ हस्ताक्षर कर आकर चले जाने पर आपत्ति दर्ज की है व  निर्देश जारी किए है कि कोई भी कार्यवाही जो बैठक में हो रही है, उसमें किसी भी सदस्य के अनुपस्थित होने पर कार्यवाही को रोका नहीं जाएगा। यदि कोई भी सदस्य अध्यक्ष इन निदेर्शों की अवहेलना करते हैं तो संबंधित पर कार्यवाही का प्रस्ताव शासन को भेजा जाने हेतु अनुशंषा पत्र भेजने का लेख किया गया है।

बाल कल्याण सदस्य इस तरह उठा रहे लाभ 

अब सिवनी जिले के सदस्यों के बारे में जाने सुश्री हेमलता जैन नोटेरी में पदस्थ हैं, इनके अन्य कार्य जो कि ठीक समिति के बैठक समय 11:00 से 5:00 के बीच चलती है। यह एक ही समय में नोटरी व बाल कल्याण समिति में कैसे उपस्थित होती हैं और एक ही समय दो लाभों की जगह मे हस्ताक्षर कैसे होते हैं यह तो खुद यही बता सकती हैं, अब दूसरे सदस्य की बात करें तो स्वाति जी के निदेर्शों के विपरीत राम कुमार चतुवेर्दी 1 से ज्यादा गाड़ियों के नेम प्लेट में खुद को प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्राप्त बताते हैं और बात यहीं खत्म नहीं होती, जिले के बाल कल्याण समिति को छिंदवाड़ा बाल कल्याण समिति का  अतिरिक्त प्रभार मिलने पर स्वयं अपने परिवार के साथ वाहन में अपने कॉलेज व यूनिवर्सिटी का कार्य कर, अकेले  से नियमविरुद्ध जाकर, डीजल के बिल का भुगतान भी चाहते हैं। 

प्रवेश के आदेश के बिना बालिकाओं को छोड़ने का फर्जी आदेश

गाड़ी खुद की और विल ट्रैवल एजेंसी के और सुनिए समिति को प्रभार सौंपा गया है तब समिति के सर्वोच्च बनकर अकेले निर्णय लेने छिंदवाड़ा पहुंचते हैं जबकि जेजे एक्ट में समिति निर्णय ले सकती है लेकिन अपना एल एल बी, एल एल एम का ज्ञान बता कर बिना बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष और सदस्यों को संज्ञान में लाए शिशु ग्रह छिंदवाड़ा से सांठगांठ कर सिर्फ मौखिक आदेश पर नियम विरुद्ध तरीके से 6 साल से बड़ी बच्चियों को शिशु गृह प्रवेश दिलवाते हैं, सारा निर्णय गुपचुप तरीके से और जब पोल खुलती है तीन माह बाद, तो प्रवेश के आदेश के बिना बालिकाओं को छोड़ने का फर्जी आदेश हेमलता जैन, रामकुमार चतुवेर्दी और रागिनी तिवारी द्वारा जाच के लंबन की स्थिति का जारी कर दिया जाता है। ऐसा कौन सा कानून है जो बिना प्रवेश के आदेश के ही बालिकाओं को मुक्त करने का आदेश दे सकता है।

लाकडाउन में ताला लगा होने के बाद उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर 

परीकाष्टा की इंतहा तो तब हो गई जब 21 मार्च से संपूर्ण लॉक डाउन हो गया था तब तीनो कर्मठ कार्यकर्ता हेमलता जैन ,रागिनी  तिवारी और राम कुमार चतुवेर्दी ने कार्यालय  मे ताला लगा होने पर भी उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर दिए, गहन शोध का विषय है कि संपूर्ण भारत जब वंद था तब यह कौन से प्रकरणों की सुनवाई के लिए सूक्ष्म रूप धर समिति कार्यालय में ताला लगे होने पर भी पहुंच गए। अब सरकार पूछती है कि अवधि में आपने क्या कार्य किया है तो जवाब होता है कि हमारे द्वारा तो कोई कार्य किया ही नहीं गया लेकिन आप हमारा पैसा हमें पूरा दीजिए, इनके खिलाफ 420, सरकारी उपस्थिति पंजी, दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ का मामला दर्ज होना चाहिए।

हम काम करे न करे पैसा तो लेंगे

लॉकडाउन अवधि के बाद मई माह मे  50% कर्मचारियों की उपस्थिति के रोस्टर बना कर कार्यालय खोलने के निर्देश जारी हुए, समिति मे भी रोस्टर बना लेकिन उपस्थिति पंजी में रोस्टर के विरपित कार्यालय में नहीं होने पर भी हेमलता जैन, रागिनी तिवारी और रामकुमार चतुवेर्दी के हस्ताक्षर कैसे हो गए। यह सरासर सिर्फ पैसे के लिए फर्जी हस्ताक्षर का मामला है। लॉकडाउन अवधि में किये कार्य का जवाब जब मांगा गया तो सदस्यगण जिले के बड़े राजनेता के रिश्तेदार होने के कारण हम काम करे न करे पैसा तो लेंगे। यह धौस, सदस्य रागिनी तिवारी, हेमलता जैन, रामकुमार चतुवेर्दी द्वारा शाशन को आर्थिक रूप से हानि पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। अनाथ, बेसहारा, लावारिश बच्चों को संरक्षण देने के बजाये, खुद का हित साधा जा रहा हैं। नियम, कानून की धज्जियां वेखोफ उड़ाई जा रही हैं। 


बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कार्यप्राणाली की जाँच की माँग

सिवनी जिले के बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने जिला मजिस्ट्रेट सिवनी को समिति के अध्यक्ष आरजू विश्वकर्मा द्वारा लगातार नियम विरुद्ध की जा रही कार्यप्रणाली की सक्षम अधिकारी से शीघ्र जांच कराने की मांग जिला कलेक्टर इस हेतु समिति के सदस्यगण पुख्ता प्रमाणों के साथ विगत 30 सितंबर 2020 को जिला मजिस्ट्रेट से मिलकर दिया है। इस संबंध में सदस्यगणों ने अध्यक्ष की कार्यप्रणाली को उजागर करने के लिये समाचार पत्रों में जगजाहिर करने के लिये भी दिया है। जिसमें उन्होंने बताया कि सुश्री आरजू विश्वकर्मा पूर्व से ही विवादित रहीं है। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष आरजू विश्वकर्मा द्वारा अक्टूबर2018 में पदभार ग्रहण करते ही अपने पद का दुरुपयोग प्रारंभ कर दिया गया था। अपने पद की धौंस देकर, नगर के प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में अपने पुत्र को बिना फीस के शिक्षा देने के लिए दबाव बनाया गया। अपने मन की ना होने पर इन शिक्षा संस्थाओं को आरजू विश्वकर्मा ने बेवजह नोटिस दिया तथा एक महिला शिक्षिका पर झूठा पुलिस प्रकरण भी दर्ज करवाया गया। अपने इस अनैतिक कार्य में साथ न देने के लिए विभागीय अधिकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकलवा देने की धमकी दी गई। जिनकी जाँच पूर्व जिला कलेक्टर ने स्वयं संज्ञान लेते हुए 30 अक्टूबर 2019 को एक जांच समिति बैठाकर समिति सदस्यों के लिखित बयान दर्ज कराये परंतु उनके स्थानांतरण होने के कारण संबंधित अधिकारियों द्वारा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। वह जांच लंबित है। 

आधारहीन नियम विरुद्ध 11 सूत्रीय झूठी शिकायतें दर्ज कराई गई

छिन्दवाड़ा  जिला के बाल कल्याण समिति का कार्यप्रभार सिवनी को राज्य शासन द्वारा मिला है। वहाँ भी सुश्री आरजू विश्वकर्मा ने अधिकारिता से हटकर कार्य करना चाहा जिसमें 4 बैठकों में छिन्दवाड़ा कलेक्टर द्वारा अध्यक्ष सुश्री आरजू विश्वकर्मा को 4 नोटिस मिल चुके हैं। सुश्री आरजू विश्वकर्मा ने छिंदवाड़ा हेतु अलग अध्यक्ष बनाकर उपसमिति बना दिया, जो एक्ट का उलंघन है। इसके अतिरिक्त अधिकारिता से हटकर अनावश्यक पत्र जारी करना नोटिस देना ही इनका अधिकाँश कार्य रहा है। बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने जब अध्यक्ष की पदभ्रष्ट कार्य प्रणाली का विरोध किया, तो बदले की भावना से अध्यक्ष आरजू विश्वकर्मा द्वारा सभी समिति सदस्यों के विरुद्ध आधारहीन नियम विरुद्ध 11 सूत्रीय झूठी शिकायतें दर्ज कराई गई। जिस पर सदस्यों ने प्रमाणों के साथ उचित जवाब प्रस्तुत किया था। जिससे खीजकर  अध्यक्ष ने समिति सदस्यों के मानदेय निर्धारण के अपने अधिकार का दुरुपयोग करते हुए सदस्यों की मानदेय राशि में भारी कटौती करवाया। 

एक सदस्य का पूरा मानदेय बनाकर अन्य सदस्यों का मानदेय तक काट डाला

वर्तमान में शासन के निदेर्शानुसार कोविड 19 के अँतर्गत घर में रहकर ही आॅनलाईन करने एवं विकलांग को आॅनलाईन ही कार्य करने बाहर से कार्य की अपेक्षा घर से ही कार्य करने के निर्देश दिये गये है।  इस हेतु  मोबाईल में एक अधिकारी की समिति के एक सदस्य की बात हुई जिसमें उन्होंने उन्हें आने से साफ मना किया है। जिसकी काल डिटेल निकाली जा सकती है। इन सबका ध्यान न रखते हुए अध्यक्ष  ने अपना एवं एक सदस्य का पूरा मानदेय बनाकर अन्य सदस्यों का मानदेय तक काट डाला। अध्यक्ष के इस अनैतिक काम में किसी अधिकारी का संरक्षण उन्हें मिला है। 

छिंदवाड़ा कलेक्टर द्वारा अध्यक्ष को भेजा गया है कारण बताओ नोटिस 

सदस्यों के मानदेय निर्धारण का आधार, कार्यालय की उपस्थिति पंजी के बजाय कार्यवाही रजिस्टर को बनाया गया और यह कार्यवाही रजिस्टर अध्यक्ष अपने कब्जे में रखती हैं। प्रकरणों में किस सदस्य के हस्ताक्षर लेना है और किसके नहीं यह अध्यक्ष आरजू विश्वकर्मा की मर्जी पर निर्भर होता है। समिति सदस्यों को विभागीय दस्तावेज को दिखाने कार्यालय के कर्मचारियों से अध्यक्ष द्वारा मना कर दिया गया है। सदस्यों द्वारा जानकारी मांगने पर कहा जाता है कि कंप्यूटर खराब है। सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लगाओ तब बताया जावेगा। अपनी मनमर्जी के कार्य को चलते पुन:विगत दिवस 22 सितंबर 2020 छिंदवाड़ा कलेक्टर द्वारा अध्यक्ष आरजू  विश्वकर्मा को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। पूर्व में सिवनी में किसी स्कूल शिक्षिका पर झूठे आरोप का प्रकरण, शिक्षा विभाग को अधिकारिता से हटकर पत्र जारी कर चुकी है। वर्तमान में अध्यक्ष पुलिस विभाग, थाने एवं अनावश्यक नोटिस देती आ रही हैं जो उनकी अधिकारिता  क्षेत्र से हटकर कार्य किया जा रहा है। अन्य क्षेत्रों में न्यायालय की गोपनीयता भंग किया है।

किसका संरक्षण है कौन अधिकारी उन्हें साथ दे रहे है

इन सब गतिविधियों में सुश्री आरजू विश्वकर्मा को किसका संरक्षण है कौन अधिकारी उन्हें साथ दे रहे है संशय होता है। अध्यक्ष आरजू विश्वकर्मा की पदभ्रष्ट कार्यप्रणाली का अनैतिक संरक्षण की न्यायिक जांच हेतु समिति के सदस्यों ने लिखित प्रमाण प्रस्तुत कर शीघ्र जांच करवाने  जिला कलेक्टर सिवनी से मांग किया है। समिति के सदस्यों को माननीय जिला मजिस्ट्रेट महोदय ने आश्वासन दिया है और शीघ्र ही जांच करने कहा। माननीय जिला मजिस्ट्रेट ने कोविड में सतर्क रहने एवं कार्यकाल तक बच्चों के हित में कार्य करते रहने कहा है।

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