गोंडवाना समय

Gondwana Samay

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Monday, November 2, 2020

दादा हीरा सिंग मरकाम जी, मोती रावण कंगाली जी ने गोंडवाना आंदोलन के पुनरुत्थान के लिए जीवन समर्पित कर दिया

दादा हीरा सिंग मरकाम जी, मोती रावण कंगाली जी ने गोंडवाना आंदोलन के पुनरुत्थान के लिए जीवन समर्पित कर दिया


सिवनी/समुंद्र राजा दीघोरी। गोंडवाना समय। 

गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन के जननायक कोया पुनेमी गोंडी, धर्म, भाषा संस्कृति के साहित्यकार दादा पेनवासी मोती रावण कंगाली एवं गोंडवाना रत्न दादा हीरा सिंह मरकाम जी की देवांजली कार्यक्रम कर श्रद्धांजलि दी गई। देवांजली कार्यक्रम में क्षेत्रीय स्तर के सगाजन गोंडवाना आंदोलन के कार्यकर्ता, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक गोंडवाना के दोनों पुरोधाओ को देवांजली देकर उनके मिशन के विचार बताए। अतिथि प्रमुखों ने कहा दादाओ के दादा हीरा सिंग मरकाम जी, मोती रावण कंगाली जी ने गोंडवाना आंदोलन के पुनरुत्थान के लिए जीवन समर्पित कर दिया। 

हमारे अगुवाओ ने हमको जगाने में पूरा जीवन दिया


हमने क्या खोया, क्या पाया, आज समाज खुद अपना मूल्यांकन करे। हमारे अगुवाओ ने हमको जगाने में पूरा जीवन दिया। जीने का तरीका बताया और संघर्ष कर बोलने वाला बना दिया उक्त बाते कहते हुये रावेन शाह उईके ने कहा दादा हीरा सिंह मरकाम जी का मुख्य संदेश था कि मानव मानव एक समान, सबको शिक्षा सबको काम यही है, गोंडवाना का पैगाम, इस संदेश को लेकर गोंडवाना आंदोलन को  दादा हीरा सिंह मरकाम जी ने पूरे भारत के जनजातियों तक पहुंचाया, उन्होंने इस आंदोलन से सरकार को भी चेताया और कहा मूलनिवासियों के अधिकारों का हनन रुकना चाहिए। उनके अधिकारों की चिंता सरकार नहीं कर सकती तो हम खुद अपनी सरकार बना लेंगे, इससे सरकार डर गई। 

भारत सरकार ने वनाधिकार अधिनियम लागू किया, पेसा एक्ट में सुधार हुआ


वहीं वर्ष 2006 में दादा मरकाम के दिल्ली आंदोलन से भारत सरकार ने वनाधिकार अधिनियम लागू किया, पेसा एक्ट में सुधार हुआ और इस आंदोलन से जनजातियों के हक में कई और कानूनों में सुधार किया इससे दादा मरकाम ने समाज को एहसास करा दिया और कहा बगैर संघर्ष के हक नहीं मिलता बल्कि छीनना पड़ता है। दादा मरकाम के आंदोलन से आज समाज में राजनीतिक चेतना पैदा की इससे सबसे ज्यादा जनजातियों के लोगों ने भाग लेकर गोंडवाना आंदोलन को मजबूती प्रदान किया। गोंडवाना युवा नेतृत्व रावेन शाह उईके किसान आंदोलन (नहर) के प्रमुख ने आगे कहा दादा मरकाम चाहते थे गरीब, दलित, शोषित, पीड़ित अपनी आवाज खुद बने। इसके लिए उन्होंने बीड़ा उठाया था और जन जागृति अभियान चलाया। आज पूरा देश उनके आंदोलन को जानता है। 

उन्होंने कहा गांव स्मार्ट बनाएंगे देश स्मार्ट बनेगा

आज युवाओं को दादा के संघर्ष से समाज को प्रेरणा लेने की जरूरत है। हम उनके सपने और संघर्ष को पूरा करने का निर्णय ले इससे उनकी आत्मा प्रसन्न होकर गोंडवाना को ताकत देगी, उनके इतिहास योगदान को सभी जानते है, उन्होंने हर मुश्किल परिस्थिति में आंदोलन को झुकने नहीं दिया वो अपनी लाइन सीधे खींचने को कहते थे कि आर्थिक आजादी के लिए समाज को जगह जगह चेताया, आगाह किया और उन्होंने कहा गांव स्मार्ट बनाएंगे देश स्मार्ट बनेगा। इसके लिए उन्होंने अन्न बैंक बनाने पर जोर दिया दादा कहते थे। हीरा सिंह मरकाम एक मुट्ठी चावल से महाकल्यान ऐसा कहकर आर्थिक विकास के लिए प्रेरित किया लेकिन समाज का दुर्भाग्य है कि दादा के वचनों को अनुसरण नहीं किया गया। 

 जिओ और हजारों लाखों लोगों को जीवन दो

दादा मरकाम के लिए जितना कहा जाए कम है, उनका खूबसूरत उदेश्य और स्पष्ट लक्ष्य से अपने विचारों को जगह जगह बोलते थे कि गोंडवाना के लोगो जिओ और हजारों लाखों लोगों को जीवन दो, इससे देश के अनेक समुदाय भी दादा से जीवन में प्रेणना लेने लगे। जिससे दादा का सम्मान केवल गोंड समाज ही नहीं बल्कि सभी समाज जाति धर्म के लोग करते हैं। इसी वजह से दादा मरकाम देश में प्रसिद्धि पाने वाले गोंडवाना जननायक हुये। 

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बनाकर राजनीतिक चेतना दिया

गोंडवाना राजनीतिक शक्ति के संस्थापक है दादा मरकाम ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बनाकर राजनीतिक चेतना दिया। इससे कांग्रेस भाजपा में खलबली मची और लोग कांग्रेस भाजपा को छोड़कर स्वतंत्र आवाज बनाने के लिए दादा का दामन थाम लिए, धीरे धीरे गोंडवाना कि राजनीतिक चेतना समाज में फेल गई। वहीं इससे दादा मरकाम को लोग राजगुरु भी मानते हैं लेकिन दादा को सिपाहीयो ने धोखा दिया। जिस वजह से राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने में असफल रहे परन्तु बड़ी राजनीतिक ताकत बनाकर दादा समाज के लिए छोड़ गए हैं। अब कार्यकर्ताओ ओर पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है कि सरकार बनाकर दादा के सपने को साकार करे। 

कोयान दा विजन की प्रेरणा मोती रावण कंगाली जी से मिली


रावेन शाह उईके ने आगे कहा कोयान दा विजन की प्रेरणा मोती रावण कंगाली जी से मिली उनके समाज के योगदान से प्रेरित होकर स्थापित किया संस्था को दादा कंगाली जी की पुण्यतिथि के अवसर पर समाज ने इस दिवस को गोंडी भाषा दिवस के रूप में मनाया। इस दौरान समुंद्र राजा दीघोरी समिति के सभी सदस्यों के साथ रावेन शाह ने बताया कोया पुनेम की मूल विचारधारा और समाज को साहित्य सौंपकर दादा कंगाली हमारे लिए ज्ञान का भंडार छोड़ गए हैं। उनकी साहित्यिक विरासत से हमारी पहचान कायम हो रही है। इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए हम सभी संकल्पित होकर आगे आंदोलन को ले जाएं। इस तरह पुण्यतिथि मनाकर दोनों पुरोधाओं को श्रद्धांजलि देकर देव स्वरूप बनाया। 

 गोंडवाना के विचारों का पेड़ समाज को सौंपा

इस मौके पर हासपेन दादा सुन्हेर सिंह तारम साहब गोंडवाना दर्शन के संपादक एवं गोंडवाना रत्न जिन्होंने गोंडवाना के विचारों का पेड़ समाज को सौंपा। जिससे आज गोंडवाना विचारधारा का पेड़ फल फूल रहा है। हम उनके योगदान को कम ही जानते है लेकिन उन्होंने जो गोंडवाना आंदोलन को सींचा वह सभी जान रहे हैं। इसके साथ ही  पूर्व विधायक गोंडवाना गौरव मनमोहन शाह बट्टी जिनके आग से भारत में गोंडवाना राज्य की लड़ाई को सहयोग मिला, उनका सपना केवल खुद के लिए नहीं बल्कि पूरे समुदाय की खुशहाली और गोंडवाना राज्य हो अपना के साथ ही चलती रही। आज उनके जाने से हौसले और गर्माहट में सिथिलता आई है परन्तु उनकी ललकार, उनका जोश आज भी शत्रु के कान खड़े कर देता है। यह सभी जानते है आइए हम सभी इनके आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए जुड़े और सपने साकार करने की बात कहते हुए निरंतर जारी रखने की शपथ लेकर रावेन शाह ने सभी को दिलाई। 

रैली निकाल कर दिया संदेश 


इस कार्यक्रम में विशेष रूप से शोभा राम भलावी पूर्व वित्त निगम अध्यक्ष मध्यप्रदेश शासन, जोहरी का प्रदेश सचिव जीजीपी, सदम सिंग बरकड़े समिति अध्यक्ष, शिवदयाल उईके मंच संचालक, लाल चंद धुर्वे जनपद सदस्य, प्रभुदयाल कुमरे उपसरपंच, मेहतर उईके, जग्गू कमरे भूमका, चेतन कुमरे अमरवाड़ा, अनुरुद्ध धुर्वे, मनीष काकोड़ीया, कंजिलाल इंनवाती, मेतन टेकाम, कलीराम गज्जम, बाराती इनवाती, संतोष भलावी, अली कुमरे, जीएसयू संगठन, समुंद्र राजा समिति, कोयांन द विजन आदि सभी ने रैली निकालकर सभा के माध्यम से कार्यक्रम संपन्न किया। 

सिवनी व छिंदवाड़ा जिले से पहुंचे सगाजन 

इन गांवो में सामूहिक रूप से कार्यक्रम हुए समुंद्रराजा, खैरमटकोल, बकोड़ा सिवनी, तुलफ, खिरनारा, देवतामऊ, डल्लीटोला, बीजादेवरी, कोंडरा, छिंदवाड़ा, अमरवाड़ा, छिंदवाड़ा, छपारा, बरसला, सागर , मारकावाडा, महुलपानी, जामनझिला, बेरडाना , बखरी, रामगढ़, केवलारी, जमुनिया, आउरिय बंजर, दरबई आदि गांव उपस्थित हुए। 

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