Saturday, December 12, 2020

शैक्षणिक, आर्थिक, सांस्कृतिक सामाजिक गतिविधि में प्रमुख जिम्मेदारी निभायेगा गोंडवाना स्टूडेट यूनियन

 शैक्षणिक, आर्थिक, सांस्कृतिक सामाजिक गतिविधि में प्रमुख जिम्मेदारी निभायेगा गोंडवाना स्टूडेट यूनियन  

छात्र संगठन जीएसयू ग्रामीण इलाकों में संविधान को पहुंचाने को चलायेगा अभियान  

गोंडवाना के ऐतिहासिक स्थल देवगढ़ में गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन छिंदवाड़ा ने मनाया जीएसयू का स्थापना दिवस

वीरनारायण बलिदान दिवस, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस मनाकर हुई नशा मुक्ति अभियान की शुरूआत,


अनिल उईके, जिला संवाददाता
छिंदवाड़ा। गोंडवाना समय। 

गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन का स्थापना दिवस कार्यक्रम 10 दिसंबर 2020 को जीएसयू छिंदवाड़ा का जिला स्तरीय कार्यक्रम गोंडवाना शासनकला के ऐतिहासिक पहचान के रूप में स्थित देवगढ़ में सम्पन्न हुआ। जिसमें छिंदवाड़ा के सभी जीएसयू के ब्लॉकों के पदाधिकारी और सदस्यगण उपस्थित हुए। अपने-अपने ग्राम, ब्लाक से रैली निकालते हुए देवगढ़ किला मोहखेड़ ब्लॉक जिला छिंदवाड़ा में पहुंचकर उत्साहपूर्वक स्थापना दिवस समारोह मनाया।

जीएसयू छिंदवाड़ा ने पूरे भारत में अपनी एक नई पहचान बनाई


जीएसयू स्थापना दिवस पर गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के जिला अध्यक्ष देवरावेन भलावी ने बताया गया कि गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन छिंदवाड़ा में वर्ष 2004 से सक्रिय हैं वहीं वर्ष 2008 में पीजी कॉलेज छिंदवाड़ा में जीएसयू से छात्र संघ चुनाव लड़ कर सरस्वती धुर्वे उपाध्यक्ष बनी थी। इसके साथ ही भीमराव नायक सह सचिव बने और रामा राव, अमर परतेती उपाध्यक्ष बने थे।
        वहीं वर्ष 2011 में इसका बायलॉज तैयार करके पूरे भारत में विस्तार किया गया। विस्तार करने वाले सभी जीएसयू के मुख्य पदाधिकारियों की ने छात्र संगठन को भारत देश के विभिन्न प्रदेशों में पहुंचाने के लिये प्रमुख भूमिका निभाया, उन सभी को जिला अध्यक्ष द्वारा छिंदवाड़ा जीएसयू की ओर से धन्यवाद और सेवा जोहार किया गया। वहीं जीएसयू इंडिया के राष्ट्रीय कार्यकर्ता और प्रदेश कार्यकर्ता को इसके लिये भी धन्यवाद दिया गया जिनकी वजह से जीएसयू छिंदवाड़ा ने पूरे भारत में अपनी एक नई पहचान बनाई। 

पूरे भारत में एक समान शिक्षा पाठ्यक्रम लागू हो

जीएसयू छिंदवाड़ा अपना उद्देश्य जिसे वह हासिल करना चाहती है, उसको बताते हुए कहा कि पूरे भारत में एक समान शिक्षा पाठ्यक्रम हो, जिससे शिक्षा की दोहरी नीति चल रही है। जैसे एमपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड, आईसीएसई पैटर्न इस प्रकार की दोहरी नीति से अमीर के बच्चे उच्च स्तर का एजुकेशन हासिल करते हैं और जो बच्चे गांव में रहकर पढ़ते हैं वह निम्न स्तर का एजुकेशन हासिल करने की वजह से आगे चलकर इन मॉडल स्कूलों से कंपटीशन नहीं कर पाते है, क्योंकि इस स्कूलों से जो बच्चे पढ़ कर निकलते हैं वह हायर एजुकेशन क्वालीफाई होते हैं।
        जिनको सभी सुविधाएं मिलने की वजह से वह अपनी पढ़ाई को बहुत बेहतरीन तरीके से करते हैं। अपना उद्देश्य बताते हुए जीएसयू छिंदवाड़ा के जिला अध्यक्ष देवरावेन भलावी ने कहा कि एक अमीर का बच्चा भी अगर एक गरीब के बच्चे के साथ बैठकर अगर पढ़ेगा तो भारत में शिक्षा का स्तर काफी हद तक सुधर सकता है। एक राष्ट्रपति का बच्चा, एक महापौर का बच्चा, कलेक्टर का बच्चा, जिले के कलेक्टर व एसपी का बच्चा अगर सरकारी स्कूल में गरीब बच्चों के साथ बैठकर पढ़ता है तो सरकारी स्कूल में यदि लापरवाही होती है शैक्षणिक कार्य सही तरीके से प्रदान नहीं किया जाता है तो कार्यवाही होने का भय सदैव बना रहेगा। वहीं शैक्षणिक समस्याओं का समाधान भी आसानी से हो जाएगा।

पाठ्यक्रम के विषयों में किया जाये बदलाव 

जीएसयू छिंदवाड़ा के जिला अध्यक्ष देवरावेन भलावी ने अपना उद्देश्य बताते हुए यह बात भी कही की पहली कक्षा से लेकर कक्षा 12 वीं तक बच्चा अंग्रेजी पड़ता है लेकिन इतने साल में भी अंग्रेजी बोलना और ग्रामर बिल्कुल भी नहीं समझ पाता हैख् इसलिए अंग्रेजी जैसे सब्जेक्ट की सही रूपरेखा या ऐसे सब्जेक्ट के लिए जो पाठ्यक्रम है, उसको बदलने की आवश्यकता है, संस्कृत भाषा को भी इतने साल तक पढ़ने के बावजूद भी उसका भविष्य में इस्तेमाल ना होने से स्कूली बच्चों का काफी समय व्यर्थ हो जाता है तो ऐसे सब्जेक्ट जिनका इस्तेमाल आगामी जीवन में नहीं हो पाता है।
        इन सब्जेक्ट को पुस्तक कीपाठ्यक्रम से हटाया जाना चाहिए और साथ ही इनकी जगह पर नए पाठ्यक्रम जोड़े जाएं। ऐसे पाठ्यक्रम जिसमें बच्चों का दिमाग में तर्क-वितर्क करने की शक्ति उत्पन्न हो ऐसे सब्जेक्ट को छोटे स्तर पर प्राथमिक स्कूली पाठ्यक्रम के माध्यम से लागू करें तो बचपन से ही बच्चे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विज्ञान की और उनका झुकाव बढ़ेगा।

शैक्षणिक व ऐतिहासिक जानकारी नि:शुल्क प्रदान कर रहे जीएसयू पदाधिकारी 

जीएसयू छिंदवाड़ा के जिला अध्यक्ष देवरावेन भलावी ने अपना उद्देश्य बताते हुए आगे का उद्देश्य बताते हुए कहा कि पूरा शिक्षण पाठ्यक्रम अंधविश्वास से भरा हुआ एजुकेशन है। ऐसे एजुकेशन को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से निरीक्षण करते हुए उसमें सुधार करने की आवश्यकता है। जिसके लिए हम आंदोलन करेंगे और इन सभी प्रकार के उद्देश्य को पूरा करने के लिए धरना, प्रदर्शन करना पड़े तो वह भी करेंगे। जीएसयू छिंदवाड़ा की पहल की वजह से गांव-गांव में नि:शुल्क कोचिंग दी जा रही है।
        जिससे बच्चे इस लॉकडाउन के समय भी पढ़ाई कर सके और उनका शिक्षण समय जारी रहे, इसके लिए पहल की गई है। इसके साथ ही सभी बच्चों को पुस्तक में जो जानकारी होनी चाहिए थी, ऐसी जानकारी पुस्तक के पाठ्यक्रम में नहीं दी गई है, जैसे कि उनका स्थानीय इतिहास इस संबंध में जानकारी जीएसयू द्वारा निशुल्क कोचिंग के माध्यम से पूरी जानकारी छात्र संगठन के सभी पदाधिकारी अपना कीमती समय निकालकर दे रहे हैं। जीएसयू छिंदवाड़ा एक छात्र संगठन है और यह विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे अन्याय व अत्याचार को सबके सामने लाएंगे जिससे कि इन अत्याचारों का जल्द से जल्द समाधान हो सके। 

निडरता और शौर्य के कारण उनके नाम के आगे वीर लगाया गया 


वीरनारायण बलिदान दिवस पर गोंडवाना स्टूडेँट यूनियन छिंदवाड़ा जिला कार्यकारिणी द्वारा अमर शहीद वीर नारायण जी का बलिदान दिवस मनाते हुए 2 मिनट का मौन रखा गया। उसके पश्चात अमर शहीद वीर नारायण जी की जीवन के क्रांतिकारी योगदान व घटनाक्रम जिन से सभी छात्रों को सीख मिल सके, उन तमाम घटनाक्रमों को देव रावण भलावी जिला अध्यक्ष के माध्यम से बताया गया कि वीर नारायण के नाम में जो वीर लगा हुआ है वह एक घटना के कारण लगा है, जब उनके राज्य क्षेत्र में एक शेर घुस आया था।
         जिसने कई लोगों को जख्मी कर दिया था और कई लोगों की जान चली गई थी, उस शेर को खत्म करने के लिए वीर नारायण अकेले जंगल चले गए और काफी मशक्कत कर उन्होंने अकेले ही उस शेर को परास्त कर दिया। जिससे उनके राज्य क्षेत्र के सभी लोग उनके इस निडरता और शौर्य को देखकर उनके नाम के सामने वीर लगाया जिससे उनका नाम वीरनारायण पड़ा। 

गोदाम को खोलकर सभी लोगों की भूख मिटाई थी

अमर शहीद वीर नारायण जी का जन्म 1995 में हुआ था उनके पिता रामसाय एक विद्रोही थे, जिन्होंने अपने राज्य क्षेत्र की जनता के लिए कई प्रकार के आंदोलन अंग्रेजो के खिलाफ 1857 के पहले कई बार संघर्ष किया उन्हीं से प्रभावित वीर नारायण ने भी एक समय पहले जब उनके क्षेत्र में अकाल पड़ा हुआ था, तब उन्होंने अपने राज्य क्षेत्र की जनता की भूख मिटाने के लिए साहूकार से काफी विनती की कि वह अपना अनाज का गोदाम खोलें लेकिन साहूकार ने काला बजारी करके उस अनाथ का गोदाम को उनको देने से मना कर दिया तो उस समय वीर नारायण ने अपनी जान की फिक्र ना करते हुए उस गोदाम को खोलकर सभी लोगों की भूख मिटाई थी।
         यह घटना अंग्रेजों तक उस साहूकार ने पहुंचाया, जिससे उनको गिरफ्तार कर लिया वहीं गिरफ्तारी के समय जो उनके साथ जो कैदी थे, उन्होंने वीरनारायण की वीरता के कई किस्से सुने थे तो उन्होंने वीरनारायण को वहां से फरार करवाने में काफी मदद की और जबरन फरार हुए तो उन्होंने देखा कि अंग्रेजों ने उनके राज्य क्षेत्र में कई टैक्स लगाए हुए थे। 

अपने राज्य के लिए अपने समाज के लिए उन्होंने अपने आप को तोप के सामने उड़वा दिया

सोनाखान से पूरा आमदनी अंग्रेज लूट रहे थे तो उन्होंने अंग्रेज के खिलाफ काफी विद्रोह किया। पूरी अंग्रेजी सरकार को वीरनारायण ने अपने 500 सैनिकों के माध्यम से हिला कर रख दिया था, जब कई बार विद्रोह होने पर अंग्रेजों ने वीर नारायण को गिरफ्तार किया और उनके ऊपर राजद्रोह का मुकदमा चला कर, उनको कई बार माफी मांगने के लिए कहा और उनकी गुलामी स्वीकार करने के लिए कहा लेकिन वीर नारायण ने उनकी गुलामी स्वीकार ना करते हुए अपने आत्मसम्मान को बनाए रखा।
            अंग्रेजों ने उन्हें रायपुर के सामने बांध कर उड़ा दिया यह बताते हुए अध्यक्ष ने कहा कि वीर नारायण ने कभी अंग्रेजों के सामने घुटना नहीं देखा अपने राज्य के लिए अपने समाज के लिए उन्होंने अपने आप को तोप के सामने उड़वा दिया लेकिन कभी अपनी परिस्थितियों से समझौता नहीं किया। हमें उनसे यह सीख मिलती है कि हमें अन्याय और अत्याचार के खिलाफ डटकर मुकाबला करना चाहिए।
         हमें अपने दुश्मन के सामने घुटने नहीं देखना चाहिए यह बताते हुए वीरनारायण के जयकारा लगाया और उनकी क्रांतिकारी सभी घटनाओं को विस्तार से बताया। भारत सरकार ने 130 साल बाद 1887 में उनको कुछ सम्मान दिया, जिसमें पहला 1987 में सात पैसे का स्टांप टिकट जिसमें तोप से बंधा हुआ चित्र उनके सम्मान पूर्वक जारी किया गया वहीं दूसरा 2008 में उनके सम्मान पूर्वक उनके नाम पर एक स्टेडियम बनाया। इसका नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम शहीद वीर नारायण सिंह रखा गया, जो भारत का सबसे बड़ा स्टेडियम में सेकंड नंबर पर आता है।

आदिवासियों के वीरतापूर्ण इतिहास को दबाया गया, उसे जीएसयू लायेगा सामने 

यह बताते हुए देवरावन ने कहा कि आदिवासियों के वीरता पूर्ण इतिहास को दबाया गया है और ऐसे इतिहास को पढ़ाया जाता है जिससे लोग गुलाम बन सके। आदिवासियों के कई बड़े-बड़े योद्धा हुए हैं, जिन्होंने अंग्रेजों को टक्कर दिया है। अपने देश के लिए अपने समाज के लिए अपने प्राणों की आहूती दी है लेकिन ऐसे लोगों को पढ़ाया जाता है जिन्होंने छोटे छोटे कदम उठाया उनका नाम क्रांतिकारियों के लिस्ट में उनका इतिहास 8 कक्षा के बच्चे पढ़ते हैं लेकिन मूल निवासियों का इतिहास को छुपाया जा रहा है।
            अगर उस इतिहास को बताया जाए तो बच्चे उनसे कई बड़ी-बड़ी सीख ले सकते हैं और साथ ही अपने पूर्वजों का समस्त संघर्षों अन्याय के खिलाफ जो न्याय के लिए संघर्ष किया था। उनके सबके सामने अगर लाया जाए तो वह अपने बुजुर्गों से सीखकर कभी दूसरे के सामने घुटने नहीं देखेंगे और अपने पुरखों पर गर्व करेंगे लेकिन छुपाया गया है।
        उस छुपा हुआ इतिहास को जीएसयू छिंदवाड़ा निकालने के लिए कहा कि छिंदवाड़ा जिले में जितने भी क्रांतिकारियों का इतिहास छुपाया गया है उनको हम निकालेंगे और प्रशासन के सामने रखेंगे ताकि जल्द से जल्द उन समस्त क्रांतिकारियों की वीरता पूर्ण कहानी को सबके सामने लाया जा सके और यह कहते हुए कहा कि पूरे भारत में जहां जहां छात्र संगठन है। वह इस प्रकार के इतिहास व को खोज कर निकाला और सबके सामने लाए अगर यह मुहिम सफल हुई तो इस गोंडवाना के जितने भी मूल निवासी क्रांतिकारी योद्धा है उनका इतिहास सबके सामने आएगा। 

मानव अधिकार आयोग इसको देखने के बावजूद इस को नजरअंदाज कर रहा है


अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाते हुए जीएसयू जिला अध्यक्ष देव रावेन भलावी ने कहा कि यूएनओ ने 1948 को अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस मनाया जाए यह तय किया 10 दिसंबर 1950 को जनरल असेंबली में प्रस्ताव पारित हुआ उसके पश्चात भारत सरकार ने 1993 में मानव अधिकार आयोग का गठन किया लेकिन बहुत दुख की बात है कि मानव अधिकार आयोग का जो काम है वह बहुत शर्मनाक है।
        मानव अधिकार आयोग का काम है मानव अधिकार का हनन शिकायत मिलने पर जांच करके सरकार को सिफारिश भेज सकता है लेकिन आज जीवन जीने की जो आजादी आर्टिकल 21 भारतीय संविधान में दी हुई है, लगातार उसका हनन हो रहा है। धर्म, जाति, लिंग, भेद वर्तमान सरकार के द्वारा पैदा किया जा रहा है। मानव अधिकार आयोग इसको देखने के बावजूद इस को नजरअंदाज कर रहा है। 

जीएसयू जिला अध्यक्ष देव रावेन भलावी ने कहा ने आगे कहा कि आज आदिवासियों को मिलने वाला जो पांचवी और छठी अनुसूची का जो विशेष अधिकार है। आजादी के इतने दशक बीतने के बावजूद भी उसे लागू नहीं किया गया । सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर किया गया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पांचवी अनुसूची लागू क्यों नहीं किया इसको लेकर भी जवाब नहीं दे पाया।
        मानवाधिकार का हनन लगातार हो रहा है आदिवासियों को नक्सली बताकर मार दिया जा रहा है जबकि आदिवासी अपने जल, जंगल, जमीन के लिए लगातार संघर्ष करते हैं। इस देश में धर्म के नाम पर हिंदू मुस्लिम दंगा लगातार हो रहे हैं लेकिन मानव अधिकार आयोग अपने दोनों कान नाक आंख बंद करके बैठा है ना उसको कोई दिखाई दे रहा है नहीं कुछ सुनाई दे रहा है। 

अब हमें ज्ञापन ईमेल व आॅनलाइन के माध्यम से पहुंचाना है

यूनाइटेड नेशन आॅगेर्नाइजेशन के द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर इन सारी बातों को विस्तार से देव रावेन भलावी ने बताया और कहा कि हम जो ज्ञापन आंदोलन करते हैं, उन ज्ञापन को उच्च स्तर के अधिकारी तक पहुंचने ही नहीं दिया जाता है, उसे कचरे के डब्बे में फेंक दिया जाता है। इसलिए अब हमें ज्ञापन ईमेल के माध्यम से आॅनलाइन के माध्यम से अधिकारियों तक पहुंचाना है।
         विभाग की ईमेल आईडी में अगर हम अपने ज्ञापन को पहुंचाते हैं तो वहां तक पहुंचेगा जिस विभाग में हम ज्ञापन दे रहे हैं। उस विभाग की वेबसाइट में जाकर हमें आॅनलाइन ज्ञापन या शिकायत दर्ज करनी होगी तब जाकर हमारी बात ऊपर तक पहुंचेगी, यह बताते हुए कहा कि मानव अधिकार आयोग को अब हमें हमारे हक अधिकार हनन करने पर सीधा पत्र भेजना है। अगर इस से भी बात नहीं बनती तो हम यूनाइटेड नेशन आॅगेर्नाइजेशन के मुख्यालय तक अपनी बात को पहुंचाएंगे। 

तो अन्याय-अत्याचार करने वालों को कभी सजा नहीं मिल पाएगी 

यह बहुत दुख की बात है कि भारत सरकार ने यूनाइटेड नेशन में जनप्रतिनिधियों को पहुंचाया है वह बिल्कुल इन सभी मुद्दों को वहां पर नहीं रखते है। इसलिए कई प्रकार के नए कानून बनाने की भी देवरावन ने बात कही, प्रत्येक व्यक्ति के पास अपना स्वतंत्र जीवन जीने का जन्म सिद्ध अधिकार है। प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष अदालत से निष्पक्ष सुनवाई उचित समय के भीतर सुनवाई जनसुनवाई और वकील की सेवा लेने का अधिकार है, यह कहते हुए पांचवी और छठी अनुसूची को गांव-गांव में प्रशिक्षण के माध्यम से समझाने की बात कही कि आगामी समय में छात्र संगठन जीएसयू ग्रामीण इलाकों में संविधान को पहुंचाएंगे और उनको शिविर के माध्यम से कैडर्स के माध्यम से समझाने का काम करेंगे।
            जब तक लोग अपने हक अधिकार को नहीं जानेंगे तब तक वह अपने साथ हो रहे अन्याय और अत्याचार को नहीं समझ पाएंगे। यह कहते हुए कहा कि अपने क्षेत्र में जहां पर भी संविधान का उल्लंघन होता है हक अधिकार का उल्लंघन होता है, उनके खिलाफ आंदोलन धरना प्रदर्शन करने के लिए कहा। आप अगर हम अपने ऊपर हो रहे अन्याय और अत्याचार को सहन करते रहेंगे तो जो दोषी है उसको कभी सजा नहीं मिल पाएगी और वह लगातार साधारण व्यक्ति को परेशान करता रहेगा। यह कहते हुए कहा कि अपने पुरखों ने कभी अपने ऊपर अन्याय और अत्याचार नहीं सहा तो हम क्यों इनको सहें।

बिहार की तरह मध्य प्रदेश में लागू होगी शराबबंदी 

नशा मुक्ति अभियान को लेकर यह कहा गया नशा मुक्ति अभियान के माध्यम से पूरे छिंदवाड़ा जिले में लाखों विद्यार्थियों को नशा मुक्ति अभियान से जुड़कर विभिन्न प्रकार के नशे जिनसे वह ग्रसित है, उन से मुक्त करने की बात कही। छिंदवाड़ा जिले में देखा गया है कि बहुत कम उम्र के बच्चे पढ़ने-लिखने वाले पाउच, गुटखा और धूम्रपान जैसे शौक नए जमाने, नया ट्रेंड और कई प्रकार के फिल्मी दृश्य को देखकर देशी-विदेशी शराब तक का इस्तेमाल करने लगे हैं।
            ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे बच्चे कई प्रकार के नशा करते हुए दिखते हैं जबकि बच्चे ही कल का भविष्य है तो इनका भविष्य संवारने के लिए नशा मुक्त होना बहुत जरूरी बताया। इस अभियान की शुरूआत करते हुए हजारों युवाओं ने नशा मुक्त होने के लिए अपने इष्ट देवता और भारतीय संविधान की शपथ ली और कहा कि नशा नाश की जड़ है, अगर एक व्यक्ति नशा करता है तो उसके माता-पिता पत्नी और बच्चे से लेकर पूरा समाज से उनका मान सम्मान खत्म होता है।
            अपने आत्मसम्मान को अपने परिवार और समाज के सम्मान को बचाए रखने के लिए नशा मुक्त होने की बात कही, सभी प्रकार के नशा के बारे में विस्तार से बताते हुए नशा छोड़ने के फायदे गिनाए और कहा कि इस मुहिम से जुड़ कर हम पूरे मध्यप्रदेश में इस नशा मुक्ति अभियान को पहुंचाएंगे और मध्य प्रदेश में भी नशा मुक्ति को लेकर एक कानून बनाए जाने की मांग करेंगे, जिससे कि सभी प्रकार की दारू भट्टी आज इनको सरकार लाइसेंस देती है जिनसे बलात्कार, चोरी और दंगे जैसे अपराध लगातार हो रहे हैं।
        इसकी जिम्मेदार भी सरकार की है जो आगे देख कर शराब भट्टी करवाती है और उसी को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन को परेशान करने का काम करती है। बिहार की तरह भी मध्यप्रदेश में शराबबंदी को लेकर कानून बनाने के लिए आंदोलन की बात कही ।
        वहीं महाराष्ट्र की तरह अंधविश्वास के खिलाफ मध्यप्रदेश में भी कानून बने, इसके लिए उन्होंने विभिन्न प्रकार के कानूनी बिल बनाकर विधायक के माध्यम से विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचाने की बात कही और ऐसे कानून अगर बनते हैं तो मध्यप्रदेश भी भारत में सबसे अच्छा प्रदेश का दर्जा प्राप्त कर सकता है।
         यह कहते हुए सभी विद्यार्थियों ने शपथ ग्रहण किया कि हम नशा नहीं करेंगे और छिंदवाड़ा जिले के 1995 से ज्यादा गांवों में जाकर नए नए युवाओं को और जो नशा छोड़ना चाहते हैं ऐसे लोगों से मिलकर इस अभियान का प्रचार प्रसार करते हुए नशा मुक्ति अभियान सफल बनाने की बात कही।


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