Tuesday, December 15, 2020

दिल्ली में किसान आंदोलन का समर्थन कर कहा केंद्र सरकार किसान विरोधी काले कानून को तत्काल रद्द करे

दिल्ली में किसान आंदोलन का समर्थन कर कहा केंद्र सरकार किसान विरोधी काले कानून को तत्काल रद्द करे

मण्डला जिले के नारायणगंज में किसानों ने रैली निकाल कर कृषि कानून के विरोध में सौंपा ज्ञापन 


नारायणगंज। गोंडवाना समय।
 

नारायणगंज क्षेत्र के समस्त किसानों द्वारा 14 दिसम्बर 2020 दिन सोमवार को दोपहर 11 बजे से नेशनल हाइवे मैली चौराहा से तहसील कार्यालय नारायणगंज तक भारत सरकार के किसान विनाशक तीन काले कानून रद्द करने और दिल्ली में धरना प्रदर्शन में बैठे किसानों के समर्थन में विशाल रैली निकाली गई जिसमें सैकड़ों की संख्या में किसानों द्वारा तहसील कार्यालय पहुँचकर केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये किसान विरोधी काले कानून को रद्द करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। 

बिना अध्यादेश लाये इस कानून को पारित करने की क्या जरूरत थी


किसानो के तत्वाधान में विशाल किसान रैली का आयोजन 14 दिसंबर 2020 को भारतीय किसान मोर्चा नारायणगंज, मंडला  के द्बारा संपन्न हुआ। किसान विरोधी नीतियों का विरोध किया गया और उद्योगपति को फायदा पहुंचाने वाली सरकार का विरोध करते हुये ज्ञापन सौपने के तुरंत बाद मुल्लू सिंग मरावी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की मंशा अगर किसान प्रेमी है तो बिना सदन की अनुमती और सहमती के, बिना अध्यादेश लाये इस कानून को पारित करने की क्या जरूरत थी ?

किसान का भुट्टा उद्योगपति के हाथो में लग जाये तो स्वीट कॉर्न के नाम पर 80 का बिकता है 


वहीं दुर्गेश सिंगरोरे ने अपने अंतिम उद्बोधन में धन्यवाद सभा पर समस्त युवाओ से आह्वान करते हुए कहा कि हमें सरकार की एमएसपी से उद्योगपति की एमआरपी तक की नीतियों को समझने की जरूरत है। आज अपने समाज को बताने की जरूरत कि किसान की गेहू 19 प्रति किलोग्राम एमएसपी मूल्य में खरीदती है वहीं उद्योगपति उसे अपने बिग बाजार में 45 रूपये प्रतिकिलोग्राम एमआरपी की दर से बेचते हैं।किसान और गरीब होता जा रहा है, आमिर और आमिर हो रहा है। अगर भारत सरकार की नीतियों कपटपूर्ण नहीं है तो सभी फसलों की एमएसपी अभी तक जारी क्यों नहीं हुई है। किसानो की मेहनत की कमाई उसकी उपज का उचित मूल्य दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। आडनी, अंबानी, उद्योगपति लोगों की नहीं है। व्यापार और सरकार की इस नीतियों को समझना है तो आप इस प्रकार समझ सकते हैं कि किसान के 1 भुट्टे की कीमत मंडी मे 3 रुपये होती है व्यापारी और बिचौलियों के बाद 20 रुपये में मार्केट पर बिकता है और किसान का भुट्टा उद्योगपति के हाथो में लग जाये तो स्वीट कॉर्न के नाम पर 80 का बिकता है और यही हाल होगा उसकी उपज का जब खरीदी, बिक्री, एमएसपी से सरकार का नियंत्रण हट जाएगा। 

रैली निकालकर तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन 

किसानों द्वारा किये गये आंदोलन व ज्ञापन कार्यक्रम में मुल्लू सिंग मरावी, गुलाब परते, मनमोहन गोठरियाँ, धन्नी परते, दुर्गेश सिंगरोरे लोधी, दादू लाल कुड़ापे की अगुवाई में भारतीय आम नागरिक देश संघर्ष युवा संगठन सेवा केंद्र नारायणगंज के क्रांतिकारी कार्यकर्ता, काशी वरकड़े, जितेन्द्र कुलस्ते, दुर्गेश उइके, अखिलेश मरावी, सिद्धार्थ तिवारी, ओम प्रकाश उइके, अजीत सिंगरोरे, मानिक मार्को, रतन बेरागी, नीरज कुंजाम, गोरी शंकर, छात्रपाल, वीरेन्द्र मसराम एवं सभी साथियो और समस्त क्षेत्रीय किसान जनता के साथ सहयोग से नेशनल हाईवे मैली चौराहा से भारी संख्या में  रैली रूप में तहसील कार्यालय पहुंचकर किसानों ने किसान विरोधी काले कानून को रद्द करने की मांग को लेकर तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन।



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