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Tuesday, December 1, 2020

किसान नेता कृषि कानूनों को रद्द करवाने पर अड़िग, सरकार ने कमेटी बनाने प्रस्ताव दिया

किसान नेता कृषि कानूनों को रद्द करवाने पर अड़िग, सरकार ने कमेटी बनाने प्रस्ताव दिया

बातचीत आगे भी जारी रहेगी, 3 दिसंबर को फिर से किसान प्रतिनिधियों और सरकार के बीच होगी बातचीत 

3 दिसंबर की मीटिंग में कृषि कानूनों के हर मुद्दे पर एक-एक कर के विस्तार से होगी बात होगी

2 दिसंबर को कृषि कानूनों की खामियों की सूची बना के किसान नेता केंद्र सरकार को सौंपेंगे

किसान नेताओं ने मीटिंग के दौरान चाय ब्रेक का बहिष्कार किया

किसान नेताओं ने कहा कि देश के किसानों का केंद्र सरकार पर नहीं है भरोसा 

किसान नेताओं ने आंदोलन में शहीद हुए किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की

किसानों के प्रति पीएम की नीति और नीयत ठीक नहीं है और केंद्र सरकार अपना रही दोहरे मापदंड 


नई दिल्ली। गोंडवाना समय।

दिल्ली कूच आंदोलन के चलते 1 दिसंबर 2020 दिन मंगलवार को केंद्र सरकार के निमंत्रण पर किसान संगठनों के 35 प्रतिनिधियों की मीटिंग विज्ञान भवन में कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल एवं वाणिज्य राज्यमंत्री श्री सोमप्रकाश के साथ हुई। इस दौरान पंजाब के किसान नेता श्री बलबीर सिंह राजोवाल ने कहा कि ये 3 कृषि कानून पूंजीपतियों के इकोनॉमिस्ट ने बनाये हैं।


उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांतिपूर्ण चलाना हमारी जिम्मेदारी है और हम आगे भी चलाएंगे। उन्होंने कहा कि ये कृषि कानून मार्किटिंग सिस्टम को तोड़ने की साजिश हैं। उन्होंने अंत में कहा कि केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को पूंजीपतियों के हाथों में सौंपना चाह रही है और इसके लिए सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है। 

ये 3 कृषि कानून किसानों की मौत के फरमान हैं


मध्यप्रदेश के किसान नेता श्री शिव कुमार कक्काजी ने कहा कि ये 3 कृषि कानून किसानों की मौत के फरमान हैं। उन्होंने कहा कि सभी किसान नेता बहुत समझदार हैं और वो जानते हैं कि इन कानूनों से किसानों को बहुत नुकसान हैं। उन्होंने आगे कि आने वाले समय में यह किसान आंदोलन जनांदोलन बनने जा रहा है और बुआई के सीजन के बाद आंदोलन में धरने स्थल पर किसानों की संख्या कई गुणा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली के कमरों में बैठकर किसानों की नीतियां नहीं बनाई जा सकती। उन्होंने अंत में कहा कि अब की बार मध्यप्रदेश में गेहूं, बाजरा, धान समर्थन मूल्य से बहुत कम पर बिका है और किसानों का शोषण हो रहा है। 

3 कृषि कानून किसानों पर थोपे 

किसान नेता श्री जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने बिना किसी किसान संगठन से बात किये हुए ये 3 कृषि कानून किसानों पर थोपे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर, केरल, राजस्थान, गुजरात, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक के किसानों ने भी धरने स्थल पर आना शुरू कर दिया है और इनकी संख्या आने वाले दिनों में बढ़ती जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की मांग पूरी नहीं करती है तो आने वाले समय में केंद्र सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। 

सरकार असंवेदनशील तरीके से कर रही व्यवहार 

हरियाणा के किसान नेता श्री गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि जब से कृषि कानून आये हैं तब से सरकार दुष्प्रचार कर रही है कि इन कानूनों के बहुत फायदे हैं लेकिन किसान इस बात को अच्छे तरीके से जानते हैं कि ये कानून किसानों के लिए मौत के फरमान हैं। उन्होंने आगे कहा कि किसान 5 महीने से आंदोलित है और इतनी कड़कड़ाती ठंड में आंदोलन कर रहे हैं। किसान नेता श्री जोगिंदर सिंह उग्रहाना ने कहा कि सरकार किसानों के मुद्दे पर संवेदनशील नहीं है उन्होंने कहा कि कड़कड़ाती ठंड में बच्चे और बुजुर्ग किसान सड़कों पर हैं लेकिन सरकार असंवेदनशील तरीके से व्यवहार कर रही है। किसान नेता श्री हनानमौला ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा। 

35 प्रतिनिधियों की मीटिंग में ये रहे मौजूद 

1 दिसंबर 2020 दिन मंगलवार को केंद्र सरकार के निमंत्रण पर किसान संगठनों के 35 प्रतिनिधियों की मीटिंग विज्ञान भवन में कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल एवं वाणिज्य राज्यमंत्री श्री सोमप्रकाश के साथ हुई मीटिंग में किसानों के प्रतिनिधमंडल में श्री जगजीत सिंह दल्लेवाल, श्री शिव कुमार कक्काजी, श्री गुरनाम सिंह चढूनी, श्री बलबीर सिंह राजोवाल, श्री जोगिंदर सिंह उग्रहाना, श्री कुलवंत सिंह संधू, श्री बूटा सिंह, श्री बलदेव सिंह निहालगढ़, श्री निरभाई सिंह, श्री रुलदू सिंह मानसा, श्री मेजर सिंह पुन्नावल, श्री इंदरजीत सिंह, श्री हरजिंदर सिंह टांडा, श्री गुरबख्श सिंह बरनाला, श्री सतनाम सिंह पन्नू, श्री कंवलप्रीत सिंह पन्नू, श्री मंजीत सिंह राय, श्री सुरजीत सिंह फूल, श्री हरमीत सिंह, श्री सतनाम सिंह सहानी, श्री बोध सिंह मानसा, श्री बलविंदर सिंह औलख, श्री सतनाम सिंह बेहरु, श्री बूटा सिंह सादीपुर, श्री बलदेव सिंह सिरसा, श्री जगवीर सिंह टांडा, श्री मुकेश चंद्रा, श्री सुखपाल सिंह डाफर, श्री हरपाल सांगा, श्री बलदेव सिंह मियांपुर, श्री कृपाल सिंह नाथुवाला, श्री परमिंदर सिंह पालमजरा, श्री प्रेम सिंह भंगू, श्री किरणजीत शेखों, श्री हनानमौला मौजूद रहे। 


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