गोंडवाना समय

Gondwana Samay

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Friday, January 29, 2021

कोयतुर समुदाय की वास्तविकता के साथ-साथ रोचकता का भी निभाव भलीभांति चिंतन हैं ''कोया मंतेर''

कोयतुर समुदाय की वास्तविकता  के साथ-साथ रोचकता का भी निभाव भलीभांति चिंतन हैं ''कोया मंतेर''


कमलेश गोंड
राष्ट्रीय संवाददाता
मध्य प्रदेश। गोंडवाना समय। 

कोयतुर भारत की संकल्पना के प्रवर्त्तक और प्रचारक तिरुमाल डॉक्टर सूरज धुर्वे '' सूर्या बाली '' हमेशा से हमारे मार्गदर्शक रहे हैं और हमें प्रोत्साहन देकर निरंतर अच्छा लिखने और अधिक अच्छा लिखने की प्रेरणा देते रहे हैं। कोया मंतर की लेखन श्रेखला 30 जनवरी 2020 से प्रतिदिन संचालन होकर आज 30 जनवरी 2021 को एक वर्ष का जो सफर सम्पूर्ण होने जा रही हैं, इस खास मोके पर मेरे ओर मेरे परिवार की और से बारम्बार बधाई शुभकामनायें।

गोंडी धर्म 'कोया पुनेम' की महत्वता का चिंतन दिया हैं एवं समाज को नयी दिशा प्रदान की                


कोयापुनेमी विचारक एवं चिंतक, गीतकार, गजलकार,अंतर्राष्ट्रीय पुरूस्कारों से सम्मानित, एम्स भोपाल मे सेवारत, आदरणीय तिरूमाल डॉ सूर्या बाली ''सूरज धुर्वे'' जी (एडिशनल प्रोफेसर, एम्स भोपाल म. प्र.) के द्वारा संकलन कोया मंतरो में वैविध्य देखने को मिलता है और कोयतुर समुदाय की साहित्यिकता के साथ-साथ रोचकता का भी निभाव भलीभांति चिंतन हैं।

जब गोंडवाना आंदोलन के क्रांतिकारी युवा प्रकृती के न्याय और नियमो से अनभिज्ञ होकर सिर्फ अन्धकार की ओर ही बढ़ रहे थे तो ऐसे कठिन समय मे डॉक्टर सूरज धुर्वे, कोयतुर युवाओं को पुनेम की ज्योती जलाकर गोंडी धर्म 'कोया पुनेम' की महत्वता का चिंतन दिया हैं एवं समाज को नयी दिशा प्रदान की हैं। 

भाषा की साहित्यिकता और तर्कसम्मत इनकी प्रतिक्रिया की विशेषताएं हैं


डॉ सूर्या बाली ''सूरज धुर्वे'' ने प्रतिदिन फेसबुक के माध्यम से लगातार साल के 365 दिन प्रकृति सम्मत कोया मंतर के श्रंखला में गोंडवाना की धर्म, भाषा, संस्कृति, साहित्य, परम्पराऐ, रीतिरिवाज ओर सामाजिक व्यवस्थाओ एवं पराविज्ञान का दर्शन नायाब प्रतिक्रिया में आत्मविश्वास, मेहनत और लगन के साथ प्रयास जारी रखा और आज के युग में जब हमारी युवापीढ़ी अधिकांश निराशावादी सोच में जी रहे हैं, ऐसे में आपका लेख और चिंतन हम युवाओं के लिये सकारामक सोच स्थापित किया है। आपका लेखक के रूप में स्थापित होने की कहानी एवं प्रकृति का चिंतन कर कोयतुर समुदाय के लिये जो प्रतिक्रिया लिखते हैं, वह एकदम सटीक और नायाब होती है। भाषा की साहित्यिकता और तर्कसम्मत इनकी प्रतिक्रिया की विशेषताएं हैं। विभिन्न विचारों और मनोदशाओं का साहित्यिक कृतियों का एक विशाल चयन है जो गोंडवाना आंदोलन के क्रांतिकारी युवा बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 

अपना पूरा जीवन शोध हेतु समर्पित है

अपने कामों-सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक शोध  के साथ, आप आज के युवाओं को शिक्षित करते हैं, प्रकृति से जोड़कर  कोयापुनेम की नैतिकता और वास्तविकता  के विषयों को उठाते हैं। एक चिंतन के रूप में, प्रकृति परंपराओं के आधार पर कोया पुनेम की वास्तविकता के दर्शन के लिये अपना पूरा जीवन शोध हेतु समर्पित हैं। आप अपने और अपनी आत्मा का हिस्सा, संचित ज्ञान, जीवन और पेशेवर अनुभव को अपने समाज के लिये समर्पित कर दिए है।

कोया मंतेर की रचनाओं से समाज को सही दिशा मिल रही है


हमेशा मेरा मार्गदर्शन करने और अपने उदाहरण के माध्यम से मुझे जीवन पथ के सही दिशा के पथ प्रदर्शक कोयापुनेमी विचारक एवं चिंतक, ''आदरणीय ति डॉ सूर्या बाली ''सूरज धुर्वे'' जी की कोया मंतेर की रचनाओं से समाज को सही दिशा मिल रही है। कोया मंतेर की यह श्रंखला सकारात्मक जीवन जीने का संदेश देती हैं, कोयापुनेम की वास्तविकता को समेटे कोया मंतर का यह 365 दिनों का सफर एवं  श्रंखलाओ का संकलन आज सम्पूर्ण होता हैं। आशा है कि ये चिंतनकारी मंतेर कोयतुर समुदाय के जीवन पर अधिक विस्तार होगा  एवं आज के युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा दायक है।

बिना रुके बिना थके साल के प्रत्येक दिन कोया पुनेम का संक्षिप्त परिचय पहुंचाया

गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन इंडिया परिवार की ओर से आदरणीय तिरुमाल डॉ सूरज धुर्वे जी को बहुत-बहुत बधाई  शुभकामनाएं जिन्होंने बिना रुके बिना थके साल के प्रत्येक दिन कोया पुनेम का संक्षिप्त परिचय हम तक पहुंचाने में अथक प्रयास किये एवं  विकट परिस्थितियों में भी हम सब युवा पीढ़ी के लिए उन्होंने अपनी कोया मन्तेर की श्रंखला को हमेशा जारी रखा और निरंतर कोया मन्तेर  फेसबुक के माध्यम से अपलोड करते गए। वहीं 30 जनवरी 2021 को आज 365 कोया मन्तेर की संख्या पूर्ण हो चुकी है, कोया मन्तेर के माध्यम से आज की युवा पीढ़ी को गोंडवाना की ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक तथ्यों को जानने समझने में सहायता मिलेगी। 

आप हमेशा हम सब युवा पीढ़ी को मार्गदर्शन  देते रहें


वहीं रायताड़  वैशाली धुर्वे प्रदेश अध्यक्ष जीएसयू सांस्कृतिक प्रकोष्ठ म. प्र., ग्राम कुड़वा पोस्ट गोरेघाट तहसील तिरोड़ी जिला बालाघाट मध्यप्रदेश कहती है कि आदरणीय डॉ सूरज धुर्वे सर जी हम  युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत एवं मार्गदर्शक हैं, आप हमेशा हम सब युवा पीढ़ी को मार्गदर्शन  देते रहें। 



कमलेश गोंड
राष्ट्रीय संवाददाता
मध्य प्रदेश। गोंडवाना समय।

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