Saturday, January 2, 2021

दलित-आदिवासियों के पास बाजार और उद्योग, धंधे नहीं होने से उनकी हालत बहुत दयनीय-रघुवीर अहरवाल

दलित-आदिवासियों के पास बाजार और उद्योग, धंधे नहीं होने से उनकी हालत बहुत दयनीय-रघुवीर अहरवाल 

भीमा कोरेगांव में दलितों ने जो शौर्य दिखाया वह इस वर्ग के लिये ऐतिहासिक और प्रेरणादायक घटना 

बाजार और उद्योग में चाहिये दलित-आदिवासियों को हिस्सेदारी


सिवनी। गोंडवाना समय। 

इस बात से पूरा देश सहमत है कि प्राचीन काल में दलित आदिवासियों के साथ भयानक अत्याचार और शोषण हुये हैं, इस कारण इस वर्ग के पास न के बराबर जमीन, संपत्ति और उद्योग बचे हैं। इस वर्ग को न्याय तब मिलेगा जब इनको शासन-प्रशासन के साथ धन, धरती, बाजार और उद्योग में हिस्सेदारी मिले। बाजार और उद्योग में हिस्सेदारी पाने के लिये दलित आदिवासियों को आंदोलन करना चाहिये।

पलायन उनकी दुर्गति का प्रमाण है


उक्ताशय के विचार साहित्यकार और रविदास समाज संघ जिला सिवनी के अध्यक्ष एवं लखनादौन में आयोजित शौर्य दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रघुवीर अहरवाल द्वारा व्यक्त किये गये हैं। श्री रघुवीर अहरवाल ने आगे बताया कि दलित आदिवासियों के पास बाजार और उद्योग, धंधे नहीं होने से उनकी हालत बहुत दयनीय है। पूरे देश में इस वर्ग के लोग रोजगार के लिये अपने निवास स्थानों से पलायन करते हैं। यह उनकी दुर्गति का प्रमाण है। इतिहास में जो शोषण हुआ है वह इसके लिये जिम्मेदार है। अत: शासन प्रशासन को दलित आदिवासियों के साथ न्याय करना चाहिये। 

दलित, पिछड़ा वर्ग और आदिवासियों की रोजी-रोटी छीन ली गई

कार्यक्रम के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के छात्र एवं शासकीय महाविद्यालय घंसौर के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुरेश कुमार अहरवाल ने बताया कि पूंजीपतियों द्वारा मशीनीकरण करके देश के छोटे-छोटे लघु उद्योगों से अपना जीवन यापन करने वाले दलित, पिछड़ा वर्ग और आदिवासियों की रोजी-रोटी छीन ली गई है। यह संकट राष्ट्रीय स्तर का है जिस पर राष्ट्रीय नेताओं को तत्काल ध्यान देना चाहिये। 

साहित्य व समाज सेवा में 40 साल के संघर्ष पर रघुवीर अहरवाल का हुआ सम्मान 

इस कार्यक्रम में विगत 40 साल के साहित्य और समाजसेवा के लिये मुख्य अतिथि श्री रघुवीर अहरवाल को शाल और श्रीफल से सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के विशेष अतिथि कैलाश महोबिया ने कहा कि भीमा कोरेगांव में दलितों ने जो शौर्य दिखाया वह इस वर्ग के लिये ऐतिहासि और प्रेरणादायक घटना है, हम उन वीरों को नमन करते हैं। कार्यक्रम को सुनील अहरवाल, अशोक बकोड़े, एड. लक्ष्मण सिंह अहरवाल, संविधान विशेषज्ञ श्रीमती लता नंदौरे, चेतराम बकोड़े आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन काशीराम बिहुनिया एवं आभार प्रदर्शन एड. जे.के. नंदौरे द्वारा किया गया। इस अवसर पर संगीत पार्टी द्वारा सामाजिक जागृति का बेहतरीन संदेश भी दिया गया।


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