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Monday, January 4, 2021

पर्वतारोही भावना डेहरिया का गिनीज बुक में नाम दर्ज

पर्वतारोही भावना डेहरिया का गिनीज बुक में नाम दर्ज

साथ ही दुनिया के चार महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर फतह हासिल की है। वे चार बार भारत का झंडा ऊंचे शिखरों पर फहरा चुकी हैं। होली और दीवाली वे दुनिया की ऊंची चोटियों पर मना चुकी हैं। साल 2019 में अफ्रीका महाद्वीप के माउंट किलिमंजारो पर दीवाली के मौके पर उन्होंने तिरंगा लहराया था। वहीं साल 2020 की होली उन्होंने आॅस्ट्रेलिया महाद्वीप के सबसे ऊंचे शिखर माउंट कोजिअस्को पर फतह हासिल करके मनाई थी। अब भावना ने गिनीज बुक में नाम दर्ज करवा कर नई उपलब्धि हासिल की है।


छिंदवाड़ा/सिवनी। गोंडवाना समय। 

जनजाति बाहुल्य प्रदेश की जनजाति बाहुल्य जिला छिंदवाड़ा जिले के ऐतिहासिक प्राकृतिक स्थल क्षेत्र तामिया की पर्वतारोही भावना डेहरिया का नाम गिनीज बुक वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया हैं।


भारतीय पर्वत श्रृंखला हिमालय पर्वत को विश्व भर में प्रमोट करने की वजह से उन्होनें ये उपलब्धि अपने नाम की हैं। वहीं 27 साल की भावना डेहरिया ने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे गांव का नाम देश और दुनिया में रौशन किया हैं। 

माउंट एवरेस्ट फतेह करने वाली मध्य प्रदेश की महिलाओं में से एक 


हम आपको बता दें कि भावना डेहरिया 22 मई 2019 को माउंट एवरेस्ट के शिखर पर फतेह हासिल करने वाली प्रदेश की प्रथम महिलाओ में से एक है। इसके साथ ही वे दुनिया के चार महाद्वीप के सबसे ऊंचे शिखर पर भारत का तिरंगा फहराकर देश का नाम पहले भी रोशन कर चुकी हैं।

भावना डेहरिया ने वर्ष 2019 में दीपावली के दिन अफ्रीका महाद्वीप का माउंट किलिमंजारो और होली के दिन आॅस्ट्रेलिया महाद्वीप का माउंट कोजिअस्को के सबसे ऊंचे शिखर पर फतह हासिल कर भारत का परचम दुनिया भर में लहराया था।

तभी ठान लिया था कि वो बड़े होकर एक पर्वतारोही बनेंगी


भावना का जन्म एक अनुसूचित जाति वर्ग के परिवार में हुआ है। जहां वो 4 बहनें और 1 भाई हैं वहीं उनके पिता जी शिक्षक हैं लेकिन उनका कहना हैं कि उन्होनें अपने घर में कभी बेटा-बेटी में भेदभाव महसूस नहीं किया। वो आज जो भी हैं अपने मां-पिताजी की वजह से ही हैं। भावना ने सांतवी कक्षा में एवरेस्ट को लेकर एक बुक पढ़ी और तभी ठान लिया था कि वो बड़े होकर एक पर्वतारोही बनेंगी। भावना ने 31 दिसंबर 2019 को साउथ अमेरिका के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट अकोंकागुआ पर भी भी क्लाइंब किया था लेकिन प्रशांत महासागर से आने वाले समुद्री तूफान के कारण शिखर से 500 मीटर दूरी से उन्हें और उनकी पूरी टीम को वापस आना पड़ा। जिसको लेकर भावना का कहना है की वह जल्द ही दोबारा इस चोटी को फतेह करेंगी।

भावना का सपना दुनिया के सात सबसे ऊंचे शिखरों पर तिरंगा लहराना है


कोयम्बटूर के ट्रांसेंड एडवेंचर्स और स्नो लेपर्ड एडवेंचर्स की ओर से 15 अगस्त 2020 को एक आॅनलाइन इवेंट हुआ था। जिसमें दुनिया के हजारों पर्वतारोहियों ने आनलाइन भाग लिया था। मध्यप्रदेश की भावना समेत दुनिया के 995 कैडीडेट्स को यह सम्मान मिला है। इस प्रतियोगिता में एक घंटे में हिमालय पर्वत की किसी कैटेगरी पर की हुई अपनी क्लाइंब की तस्वीरों को माउंटेन्स आॅफ इंडिया के फेसबुक पेज पर शेयर करना था। इस प्रतियोगिता में दुनिया के हजारों पर्वतारोहियों ने भाग लिया था। भावना ने इस आॅनलाइन इवेंट में एक घंटे में हिमालय पर्वत श्रेणी पर अपनी क्लाइंब की तस्वीरें माउंटेंस आॅफ इंडिया के फेसबुक पेज पर शेयर की थी। एवरेस्ट की चोटी समेत विश्व की चार सबसे ऊंची चोटियों पर फतह हासिल करने वाली भावना का सपना दुनिया के सात सबसे ऊंचे शिखरों पर तिरंगा लहराना है।


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