Monday, February 1, 2021

बजट प्रथम दृष्टया सामान्य लेकिन स्व-रोजगार, उद्योगों के नए और विषेष अवसर नहीं मिलने से वंचित और कमजोर तबकों में निराशा

बजट प्रथम दृष्टया सामान्य लेकिन स्व-रोजगार, उद्योगों के नए और विषेष अवसर नहीं मिलने से वंचित और कमजोर तबकों में निराशा 

दलित इंडियन चैम्बर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मध्य प्रदेश अध्यक्ष डॉ अनिल सिरवैयां ने दी आम बजट पर प्रतिक्रिया 


भोपाल। गोंडवाना समय।

दलित इंडियन चैम्बर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की), मध्यप्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल सिरवैयां ने आम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि स्टैंड अप इंडिया स्कीम में मार्जिन मनी को घटाकर 25 से 15 प्रितशत किया जाना स्वागत योग्य है। इस स्कीम को कोलेट्रल मुक्त भी किया जाना था। मध्यप्रदेश में इस स्कीम के क्रियान्वयन की स्थिति बेहद खराब है। इस निर्णय के बाद उम्मीद की जा सकती है कि बैंक सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को गंभीरता से लेंगे। इस योजना में प्रावधान है कि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के प्रत्येक बैंक की प्रत्येक शाखा को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक एससी-एसटी वर्ग के आवेदक तथा किसी भी वर्ग की एक महिला आवेदक को लोन देना अनिवार्य है। 

एससी-एसटी उद्यमियों व इकाईयों को न विशेष राहत ना ही नया प्रावधान  

आगे बजट पर प्रतिक्रिया देते हुये दलित इंडियन चैम्बर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की), मध्यप्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल सिरवैयां ने कहा कि बजट में मौजूदा एससी-एसटी उद्यमियों और इकाईयों को कोई विशेष राहत नहीं दी गई, न ही कोई नया प्रावधान किया गया। क्रेडिट लिंक कैपिटल सब्सिडी स्कीम (सीएलसीएसएस) में सर्विस सेक्टर का विस्तार किया जाना जरूरी था। 

एससी-एसटी इकाईयों को लाभ लेने में वर्षों का समय लग जाता है

दलित इंडियन चैम्बर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की), मध्यप्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल सिरवैयां ने आम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि एमएसएमई सेक्टर के लिए बजट बढ़ाकर दोगुना किया जाना उचित है लेकिन इनका लाभ लेने की प्रक्रियाओं को सरल करने पर अब भी ध्यान नहीं दिया गया। उदाहरण के तौर पर राष्ट्रीय लघु उद्योग विकास निगम (एनएसआईसी) की योजनाओं में एमएसएमई और एससी-एसटी इकाईयों को कई तरह की सुविधाएं है लेकिन इनका लाभ लेने में वर्षों का समय लग जाता है। कोविड-19 के संदर्भ में देखें तो यह बजट प्रथमदृष्टया सामान्य कहा जा सकता है, लेकिन स्व-रोजगार और उद्योगों के नए और विषेष अवसर नहीं मिलने से वंचित और कमजोर तबकों में निराशा है। 


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