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Sunday, February 7, 2021

अवैध उत्खनन रोकने के लिये शिक्षकों की ड्यूटी लगाने पर आक्रोश व्याप्त

अवैध उत्खनन रोकने के लिये शिक्षकों की ड्यूटी लगाने पर आक्रोश व्याप्त  


सिवनी। गोंडवाना समय। 

प्राय देखा जा रहा है कि हर विभाग में शिक्षकों की ही ड्यूटी लगाई जा रही है, शिक्षक उसके लिए प्रशिक्षित हो चाहे ना हो परंतु उनकी ड्यूटी आवश्यक लगाई जाती है। प्रांतीय शिक्षक संघ एवं मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संगठन के जिलाध्यक्ष श्रवण कुमार डहरवाल द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि शिक्षकों को शिक्षकीय कार्य करने दिया जाए। अनावश्यक रूप से हर कार्य में लगाने से शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में संज्ञान में आया है कि अवैध रूप से उत्खनन के लिए मोहगांव सड़क में बनाए गए नाका में 4 शिक्षकों को लगाया गया है। 

शिक्षकों को इस कार्य से अतिशीघ्र मुक्त किया जाए

शिक्षकों की यह ड्यूटी भी पारियों में लगाई गई है, भारी ठंड में शिक्षकों के लिए किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं की गई है और ना ही टेंट लगाया गया है, ना पीने के पानी की व्यवस्था है, ना अलाव जलाया गया है, ना ही किसी प्रकार की कोई सुविधा दी गई है। केवल आदेश जारी कर इनको तैनात कर दिया गया है। जिसके कारण भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
            शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में प्रितभा पर्व भी चल रहा है, जिसके कारण हमें स्कूल के भी कार्य करने पड़ रहा हैं, मोहल्ला क्लास भी लगाना पड़ रहा है, बाद में शिक्षा की गुणवत्ता में किसी प्रकार की व्यवधान होने पर संपूर्ण जवाबदारी पूर्ण रूप से शिक्षकों की होती है एवं बाद में उनकी परीक्षा भी ली जाती है, फेल होने पर उनकी सेवाएं समाप्त भी की जाती है। इसलिये उच्च अधिकारियों से मांग की गई है कि वे शिक्षकों को केवल शिक्षकीय कार्य ही करने दिया जाए, अन्य कार्य के लिए अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए और शिक्षकों को इस कार्य से अतिशीघ्र मुक्त किया जाए। 

डयूटी लगाने के बाद कोरोना यौद्धा नहीं माना 

पूर्व में कोविड-19 में भी समस्त शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई परंतु उन्हें कोरोना यौद्धा नहीं माना गया, ना ही मृत्यु होने पर उन्हें किसी प्रकार की कोई राशि दी गई और ना ही उनके परिवार के कोई सुविधा भी दी गई। संघ के समस्त पदाधिकारियों द्वारा भी इस प्रकार ड्यूटी लगाई जाने पर आक्रोश व्यक्त किया गया है। संघ के अनिल राजपूत, बेनी पटले, संतोष बिसेन, दौलतराम वर्मा, देवी प्रसाद विश्वकर्मा, मनीष तिवारी, मनीरामवैश्, गोविंद उज्के, आनंद जयसवाल, विजय बिसेन, रवींद्र ठाकरे, अविनाश तिवारी, प्रेम गगन सनोरिया, इंद्र कुमार सनोडिया, संजय करवेति, अखिलेश सेन, तान सिंह पटेल, मुकेश ठाकुर, राजकुमार बघेल, वर्षा जोहरी, श्रीमती भारती पटवा, अदिति जरगर, नंदेश्वरी धुर्वे, प्रीतीश बक्शी, गायत्री तिवारी, गजानन तुमराम आदि पदाधिकारियों द्वारा अति शीघ्र शिक्षकों को उत्खनन जांच चौकी पर लगाने वाले आदेश से अलग करने की मांग की गई है। 

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