Tuesday, March 9, 2021

6 सालों में ही खंडहर में तब्दील हुआ रेंज आॅफिस खोल रहा वन अफसरों की पोल

6 सालों में ही खंडहर में तब्दील हुआ रेंज आॅफिस खोल रहा वन अफसरों की पोल 

आखिर 2 सालों से क्यों नहीं खुला रेंज आॅफिस का ताला ?




अजय नागेश्वर संवाददाता
उगली। गोंडवाना समय।

वन विभाग के अधिकारियों की विभागीय बैठकों में अपनी ही पीठ थपथपाने की पोल धरातल में खुलती हुई नजर आ रही है।


जनपद पंचायत केवलारी की उप तहसील उगली क्षेत्र में वन विभाग के कार्यालय के निर्माण में शासन के द्वारा दी गई लाखों रूपये की राशि से बने भवन विभागीय लापरवाही कहें या संबंधित जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते बर्बादी की कहानी स्वयं बया कर रहा है।


उगली  के ग्राम बीजाटोला में लगभग 6 साल पहले रेंजर साहब के रहने के लिए दो मंजिला भवन का निर्माण किया गया था। जो जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण खंडहर में तब्दील हो गया है। वही बीजाटोला के ग्रामीणों ने बताया कि  िपछले 2 सालों से रेंजर आॅफिस का ताला नहीं खुला है। आखिर क्यों वन विभाग के अधिकारी इसे खंडहर में तब्दील करना चाह रहे हैं इस बात को क्षेत्रिय ग्रामीणजनों को समझ नहीं आ रहा है। 

वन विभाग के अधिकारियों के पास ताला खरीदने के पैसे नहीं है?


उगली  के ग्राम बीजाटोला में लगभग 6 साल पहले रेंजर साहब के रहने के लिए दो मंजिला भवन की बदहाल व्यवस्था को देखते हुए ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिम्मेदारों की अनदेखी ने तो सरकारी क्वार्टर रेंज आॅफिस को खंडहर में तब्दील कर ही दिया है लेकिन विडंबना की बात ये है कि वन विभाग के पास ताला खरीदने के पैसे नहीं है। हमारे संवाददाता को ग्रामीणों ने वन विभाग की लापरवाही व भवन के खण्डर होने की सूचना दिया तो भवन जो कि बिना ताले के खुले दरवाजे से अंदर जाकर वहां की हालत को देखकर अपने कैमरे में कैद किया। भवन के अंदर जायजा लिया तो देखा कि टॉयलेट में भी मधुमक्खियों ने छत्ता बना लिया है और उसमें भी ताला नहीं है। ऊपर 2 कमरे हैं जिनकी खिड़कियां खुली है एवं दरवाजे में वहां पर भी ताला नहीं है, बिजली फिटिंग उखड़ी हुई है। 

वन विभाग के अफसर वातानुकूलित कक्षों में बैठकर देते है निर्देश 


उगली  के ग्राम बीजाटोला में लगभग 6 साल पहले रेंजर साहब के रहने के लिए डबल मंजिल भवन की हालत खण्डहर में तब्दील हो गई है। कुल मिलाकर वन विभाग के अफसर जो कि वातानुकूलित कक्षों में बैठकर मीटिंगों में दिशा निर्देश देते है वन क्षेत्रों का रूख नहीं करते है उनकी लापरवाही से क्षेत्रिय वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी भी शासकीय राशि से बने भवन का रखरखाव न करते हुये बर्बाद करने में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे है। 

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