Tuesday, April 13, 2021

2 करोड़ के 10 अप्रैल को जारी हुये थे आदेश, 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने कर दिये 1 करोड़ रूपये आखिर क्यों ?

2 करोड़ के 10 अप्रैल को जारी हुये थे आदेश, 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने कर दिये 1 करोड़ रूपये आखिर क्यों ?

कोविड-19 की रोकथाम एवं आवश्यक उपकरण क्रय हेतु प्रत्येक जिला कलेक्टर को 2 करोड़ रूपये की दी थी स्वीकृति 


सिवनी/भोपाल। गोंडवाना समय। 

कोरोना की रोकथाम के बजट में 10 अप्रैल को प्रत्येक जिले के लिये जारी हुये 2 करोड़ रूपये को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 13 अप्रैल को जनसंपर्क कार्यालय से जारी समाचार अनुसार 1 करोड़ रूपये कर दिया है।
        


कोरोना की रोकथाम के लिये बजट की स्थिति जिलों में गड़बड़ा रही है वहीं इस परिस्थिति में 2 करोड़ रूपये स्वीकृत किये जाने के बाद मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 1 करोड़ रूपये कम कर दिये जाने पर सवाल खड़े हो रहे है। आखिर ऐसी क्या परिस्थिति हुई कि 10 अप्रैल को राहत आयुक्त मध्य प्रदेश एवं प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन राजस्व विभाग श्री मनीष रस्तोगी द्वारा जारी आदेश के तहत 2 करोड़ स्वीकृति प्रदान को 13 अप्रैल को 1 करोड़ दिया गया है। हालांकि यह फैसला मुख्यमंत्री का है और वे निर्णय लेने का अधिकार भी रखते है। 

2 करोड़ रूपये तक अनाबद्ध राशि व्यय करने की स्वीकृति प्रदान 


हम आपको बता दे कि राहत आयुक्त मध्य प्रदेश एवं प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन राजस्व विभाग श्री मनीष रस्तोगी द्वारा मध्य प्रदेश के समस्त जिला कलेक्टर को 10 अप्रैल 2021 को कोविड-19 की रोकथाम एवं आवश्यक उपकरण क्रया हेतु प्रत्येक जिला कलेक्टर को 2 करोड़ रूपये तक अनाबद्ध राशि व्यय करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। उक्त व्यय मांग संख्या 58, मुख्य शीर्ष 2245, अंतर्गत योजना शीर्ष 5504 से विकलनीय होगा। यह स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2021-22 में किये गये कार्याें हेतु मान्य होगी यह उल्लेख करते हुये आदेश जारी किया था। 

महामारी की रोकथाम हेतु उचित कार्यवाही किया जाना आवश्यक है

जारी आदेश के तहत यह उल्लेख किया गया था कि कोविड-19 हेतु पुनर्वास शिविरों (भोजन एवं कपड़े सहित) की व्यवस्था एवं मेडिकल शिविरों के संचालन, संचालित शिविरों का पर्यवेक्षण/संचालन, आवश्यक कार्यों में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा हेतु क्रय किये जाने वाली सामग्री, साफ-सफाई पर व्यय आदि के लिये राशि व्यय करने की अनुमति प्रदान की गई है। वर्तमान में कोविड-19 संक्रमण की तीव्रता को देखते हुये मैदानी स्तर पर महामारी की रोकथाम हेतु उचित कार्यवाही किया जाना आवश्यक है। 

उपयोगिता प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें

वहीं उक्त राशि के व्यय के संबंध में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक अंर्तविभागीय समिति का गठन किया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है। कोविड-19 की रोकथाम हेतु किये गये व्यय का परीक्षण, पर्यवेक्षण एवं स्वीकृति सक्षम होगी। व्यय की गई राशि की मदवार व्यय विवरण निर्धारित प्रारूप में संधारित किये जाने का निर्देश दिये गये है। मूल अभिलेख जिला/तहसील स्तर पर सुरक्षित रखा जाये, राशि के व्यय उपरांत निर्धारित प्रारूप में उपयोगिता प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से राहत आयुक्त कार्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। 

कोरोना महामारी की रोकथाम के लिये मुख्यमंत्री राहत कोष से जिलों को 52 करोड़ रुपये जारी

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिये प्रत्येक जिले को एक करोड़ रुपये की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से जारी की है। प्रदेश के 52 जिलों के लिये जारी की गई 52 करोड़ रुपये की राशि कोविड-19 के लिये आवश्यक उपकरणों के क्रय, पुनर्वास शिविरों में भोजन एवं कपड़े की व्यवस्था, मेडिकल शिविरों के संचालन, शिविरों का पर्यवेक्षण-संचालन, आवश्यक कार्यों में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा के लिये क्रय की जाने वाली सामग्री और साफ-सफाई आदि पर व्यय की जा सकेगी।

कलेक्टर की अध्यक्षता में एक अंतर्विभागीय समिति का गठन किया जायेगा

प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री श्री मनीष रस्तोगी ने उक्त आशय का आदेश जारी कर प्रदेश के सभी 52 जिलों को राशि जारी कर दी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से उपलब्ध करवाई गई राशि के व्यय के संबंध में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक अंतर्विभागीय समिति का गठन किया जायेगा। यह समिति कोविड-19 की रोकथाम के लिये किये गये व्यय का परीक्षण, पर्यवेक्षण एवं स्वीकृति के लिये सक्षम होगी।
        श्री रस्तोगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी की रोकथाम से संबंधित व्यय आपातकालीन व्यय की श्रेणी का है। अत: इसमें निविदा प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक नहीं है। मुख्यमंत्री राहत कोष की राशि के व्यय संबंधी मूल अभिलेख जिला स्तर पर सुरक्षित रखे जाने और राशि व्यय उपरांत निर्धारित प्रारूप में उपयोगिता प्रमाण-पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध करवाने के निर्देश जिला कलेक्टर्स को दिये गये हैं।


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