Thursday, July 15, 2021

मण्डला में आदिवासी धर्मशाला की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु हरनाम सिंह तेकाम का है महत्वपूर्ण योगदान

मण्डला में आदिवासी धर्मशाला की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु हरनाम सिंह तेकाम का है महत्वपूर्ण योगदान 

मण्डला जिला मुख्यालय में आदिवासी समाज के कार्यक्रमों में उपयोगी साबित हो रही आदिवासी धर्मशाला 


मण्डला। गोंडवाना समय।

आदिवासी बाहुल्य और आदिवासियों के लोकसभा व समस्त विधानसभा क्षेत्र सहित अन्य जनप्रतिनिधित्व करने के लिये प्रमुख पद के लिये आदिवासी समाज के आरक्षित सीट वाला जिला मण्डला में सर्वाधिक जनसंख्या आदिवासी समाज की ही है। आजादी के बाद से ही आदिवासी समाज को विकास की दिशा में ले जाने के लिये विभिन्न आदिवासी समाज के संगठनों ने अपना दायित्व प्रमुखता के साथ निभाया है।
      


 वहीं यदि हम आदिवासी समाज समिति और अध्यक्ष श्री हरनाम सिंह तेकाम के अध्यक्ष कार्यकाल के दौरान आदिवासी समाज को मिली विशेष उपलब्धी के लिये महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने में समाज सेवा करते हुये समाज का कर्ज करने का इतिहास यदि वर्तमान व आने वाली पीढ़ि को यदि अवगत नहीं कराते है तो इतिहासकारों ने जिस तरह से स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में आदिवासी समाज के सबसे पहले व महत्वपूर्ण योगदान को नकारा है, उसी तरह आदिवासी समाज के लिये समाज सेवा के रूप में अपना समाज व माटी का कर्ज अदा करने वाले समाज के सगाजनों के साथ हो तो हमारा कलमकार बनना बेकार हो सकता है।
        इसलिये आदिवासी समाज के स्वर्णिम इतिहास में प्रत्येक आदिवासी समाज के सगाजनों को नाम, सम्मान व स्थान मिलना चाहिये, जिन्होंने आदिवासी समाज के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका चाहे वह कोई क्षेत्र हो जहां अपना कर्तव्य निभाया है। आईये हम आपको ऐसे ही एक नाम श्री हरनाम सिंह तेकाम व उनके समाजिक दायित्वों में हम आपको वर्तमान व आने वाली पीढ़ि के लिये गोंडवाना समय की कलम के माध्यम से जानकारी हेतु अवगत कराने का प्रयास कर रहे है। 

मण्डला में आदिवासी समाज को भवन की सुविधा दिलाने निभाई सक्रिय भूमिका 

आदिवासी बाहुल्य जिला मण्डला में आदिवासी समाज की मीटिंग व कम संख्या में होने वाले सामुहिक आयोजनों के लिये ठण्ड, गर्मी, बरसात से बचाव हेतु छत के नीचे बैठकर कार्यक्रम करने के लिये भवन की कमी मण्डला मुख्यालय में हमेशा रहती थी। जिसकी कमी को स्वयं आदिवासी समाज समिति के अध्यक्ष श्री हरनाम सिंह तेकाम को भी खलती थी और इसको लेकर वे हमेशा चिंतित रहते थे। यहीं चिंता ने उन्हें मंथन कर आदिवासी समाज के लिये भवन को सुविधा उपलब्ध कराने में प्रयास करने के लिये मजबूर कर दिया था।
        हम आपको बता दे कि आदिवासी समाज को विकास की दिशा में अग्रसर करने के लिये हमेशा चिंतित रहकर सक्रियता से कार्य करने वाले श्री हरनाम सिंह तेकाम ने मण्डला मुख्यालय में आदिवासी समाज के लिये भवन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये आदिवासी समाज समिति के समस्त पदाधिकारियों, सदस्यों, जनप्रतिनिधियों व समस्त आदिवासी समाज के सहयोग से मण्डला मुख्यालय में आदिवासी धर्मशाला निर्माण के लिये सर्वप्रथम जमीन को चिह्नित करते हुये विधिवत उसे पंजीकृत कराते हुये आदिवासी समाज भवन निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ किया। मण्डला मुख्यालय में आदिवासी धर्मशाला का की सुविधा मिलने से चाहे समाज की मीटिंग हो या कार्यक्रम सभी आसानी से संपन्न होते है।

जिले के दूरस्थ अंचल से आने वाले सगाजनों के लिये आदिवासी धर्मशाला है उपयोगी 

मण्डला में जिले के दूरस्थ अंचल से आदिवासी समाज के सगाजनों के लिये रूकने ठहरने के लिये आदिवासी धर्मशाला का नाम देकर मण्डला जिले के दूर-दूर से आने वाले सगाजनों के लिये भवन की सुविधा उपलब्ध करवाने में आदिवासी समाज समिति के अध्यक्ष श्री हरनाम सिंह तेकाम ने प्रयास प्रारंभ किया और वह सफल भी रहा।
            अब मण्डला मुख्यालय में बाहर से आने वाले अपने शासकीय व अन्य कार्यों आदिवासी समाज के सगाजनों के लिये यह सुविधा मण्डला मुख्यालय में मौजूद है, हां लेकिन इसे अभी और सर्वसुविधायुक्त विस्तार देने की आवयकता है जो कि आदिवासी समाज के जनप्रतिनिधियों, आदिवासी समाज के समस्त संगठनों व अच्छे मुकाम पर पहुंचे सगाजनों को साथ देकर सामने आने की आवश्यकता है ताकि आदिवासी धर्मशाला में सभी सुविधायें मुहैय्या हो सकें। 

8 जुलाई 2007 को हुआ था आदिवासी सामाजिक संगठन की कार्यकारिणी का गठन 

आदिवासी सामाजिक संगठन तहसील नैनपुर जिला मण्डला का पहला कार्यकारिणी का गठन दिनांक 8 जुलाई 2007 को हुआ था। जिसमें संरक्षक श्री देव सिंह सैयाम विधायक, अध्यक्ष श्री हरनाम सिंह तेकाम नैनपुर, उपाध्यक्ष श्री सुंदरलाल धुर्वे मोहगांव, महिला उपाध्यक्ष श्रीमती आशा देवी उईके जामगांव, श्रीमती मानवती मरावी, खोहरी, सचिव श्री जी एस मरकाम नैनपुर, सहसचिव श्री अश्विनी कुमार उईके जामगांव, श्री प्रीतम कड़ापे डिठौरी, कोषाध्यक्ष श्री सी एल मरकान नैनपुर, सदस्य श्री राजेश उईके नैनपुर, श्री अशोक सैयाम झूलपुर, श्री कार्तिक कुमार मरावी बीजाटोला, श्री जगत सिंह आर्मों पालासुंदर (डुंगरिया) श्री शिवचरण उईके पाठासिहोरा, श्रीमती लीलावती मरावी चिचौली, श्रीमती फूलवती वाडिवा नैनपुर, श्री नारायण उईके आमाटोला (केरेगांव), श्री सुरेश उइके माखा, श्री खैर सिंह उईके चीचगांव समाज के सगाजनों को सामाजिक विकास की दिशा में कार्य करने के लिये पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई थी। 

15 जुलाई 2010 को हुआ था आदिवासी समाज समिति का पंजीयन 

हम आपको बता दे कि मण्डला की धरती में आदिवासी समाज के लिये सामुहिक रूप से महत्वपूर्ण बैठक व सामुहिक रूप से कार्यक्रम करने के लिये भवन निर्माण में आदिवासी समाज के सहयोग से मुख्य भूमिका निभाने वाले श्री हरनाम सिंह तेकाम 8 जुलाई 2007 को अध्यक्ष बने थे वहीं विधिवत आदिवासी सामाजिक समिति के नाम से पंजीयन 15 जनवरी 2010 को हुआ था। श्री हरनाम सिंह तेकाम 8 जुलाई 2007 को आदिवासी समाजिक समिति का अध्यक्ष बनने के बाद से ही निरंतर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों व सदस्यगणों के साथ मिलकर आदिवासी समाज के सहयोग से आदिवासी समाज को प्रगति की दिशा में ले जाने के लिये निरंतर समाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहकर समाज सेवा के रूप में अपना दायित्व निभाते आ रहे है। 

आदिवासी धर्मशाला के लिये प.ह.न. 18 महाराजपुर मण्डला में विधिवत पंजीकृत की गई थी जमीन

आदिवासी बाहुल्य जिला मण्डला की सरजमी पर जहां एक ओर आदिवासी समाज को सामुहिक रूप से मीटिंग व कार्यक्रम आदि करने के लिये अपने समाज का अपना भवन की कमी हमेशा महसूस होती थी। भवन की कमी को दूर करने में आदिवासी समाज समिति के अध्यक्ष श्री हरनाम सिंह तेकाम ने समिति के पदाधिकारियों व सदस्यगणों, आदिवासी समाज के सहयोग व जनप्रतिनिधियों की मदद से विशेष भूमिका निभाते हुये आदिवासी धर्मशाला बनवाने के लिये सर्वप्रथम भवन के लिये आदिवासी सामाजिक समिति अध्यक्ष श्री हरनाम सिंह पिता श्री मेहताब सिंह तेकाम की अध्यक्षता के कार्यकाल में मण्डला में आदिवासी धर्मशाला के लिये प.ह.न. 18 महाराजपुर जिला मण्डला में जमीन विधिवत पंजीकृत की गई थी। 

सागर जिले से सिवनी जिले में आकर समाप्त शैक्षणिक प्रगति का सफर 


हम आपको बता दे कि श्री हरनाम सिंह तेकाम जी जिनका जन्म 4 मई 1945 को मां श्रीमती मानो बाई तेकाम जी एवं पिता श्री मेहताब तेकाम जी के यहां पैतृक ग्राम बरबसपुर-बम्हनी बंजर में हुआ था है। उन्होंने अपनी औपचारिक एवं उच्च शिक्षा प्राप्त कर वर्ष 1968 से एक शिक्षक के रूप में शिक्षा जगत में स्कूल के बच्चों का भविष्य निर्माण करने के लिये सेवा कर्तव्य के रूप में प्रवेश किया था। सागर (दमोह) जिले से शैक्षणिक संस्थान में शिक्षा का प्रकाश फैलाकर आगे बढ़ने का सफर उनकी पहली पोस्टिंग सागर (दमोह) जिले से प्रारंभ हुई थी। वहीं 15 अगस्त 2002 को शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय मोहबर्रा में पदभार ग्रहण करने के बाद अंतिम सफर सिवनी जिले के मोहबर्रा 31 मई 2007 को समाप्त हुआ। 

39 वर्षोंं तक राष्ट्रनिर्माता के रूप में शिक्षादीप प्रज्जवलित कर जिम्मेदारी के साथ निभाये कर्तव्य 


हम आपको बता दे कि श्री एच एस तेकाम जी की पदस्थापना से क्षेत्रवासियों एवं विद्यार्थियों के लिये एक सुखद अनुभूति थी। शिक्षक, पालक एवं शिक्षार्थियों के लिये उनकी पदस्थापना शुभ कल्याणकारी परिलक्षित हुई। इस दौरान शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय मोहबर्रा वर्ष 2003 से वर्तमान तक संस्था का परिक्षाफल शैक्षणिक क्षेत्र में गुणात्मक वृद्धि की ओर बढ़ता रहा।
      

 
वहीं वर्ष 2004 में हायर सेकेंण्डरी परीक्षा में संस्था की छात्रा कु. प्रेमलता कटरे द्वारा जिले की प्राविण्य सूची में स्थान प्राप्त करना एवं वर्ष 2006 हाई स्कूल के उत्कृष्ट परीक्षफल के कारण आयुक्त लोक शिक्षण म.प्र. द्वारा सम्मानित किया जाना श्री एच एस टेकाम जी की शैक्षणिक दिशा में एकाग्रता व संघर्ष का प्रमाण था।
        इतना ही नहीं श्री एच एस तेकाम जी के कार्यकाल में संस्था में अध्ययनरत कक्षा 12 के छात्रों को कान्हा किसली, पचमढ़ी, अमरकंटक जैसे ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों का भ्रमण कराया जाकर इतिहास से परिचित कराया गया। शैक्षणिक संस्थानों में श्री एस एस तेकाम ने शिक्षा के प्रकाश फैलाते हुये लगभग 39 वर्षो तक शिक्षादीप प्रज्जवलित कर 62 बसंत पूर्ण करते हुये वे 31 मई 2007 दिन गुरूवार को शासकीय कर्तव्य से सेवानिवृत्त हुये। 

शैक्षणिक विकास में निर्धन बच्चों को आगे बढ़ाने करते रहे है हमेशा सहयोग 

हम आपको बता दे कि शैक्षणिक दिशा में 39 वर्षों तक अपना सफर तय करने वाले श्री हरनाम सिंह तेकाम ने अपने सेवाकाल के दौरान शैक्षणिक संस्थानों में होनहार बच्चों सहित ऐसे बच्चें जिनकी आर्थिक स्िथति सुदृढ़ नहीं थी उन्हें शैक्षणिक दिशा में शिक्षा प्राप्त करने के लिये साधन संसाधन उपलब्ध कराने में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाकर उनकी आर्थिक स्थिति को शैक्षणिक प्रगति में आड़े नहीं आने देने का सदैव प्रयास करते रहे है। इसके लिये उन्होंने मददगार बनकर नहीं वरन समाज व माटी कर्ज चुकाने के लिये कर्जदार बनकर भूमिका निभाया है। श्री हरनाम सिंह तेकाम द्वारा दी गई शिक्षा, मार्गदर्शन व सहयोग से आज अधिकांश निर्धन बच्चे अच्छे मुकाम पर पहुंचकर अपना कर्तव्य निभा रहे है।

अजाक्स के सचिव के रूप में भी निभाई जिम्मेदारी


हम आपको बता दे कि श्री हरनाम सिंह तेकाम वर्ष 1993 के पहले अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ के तहत सचिव के पद पर रहकर संगठन की जिम्मेदारी भी निभाया है।

अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी के हक अधिकारों को लेकर आवाज उठाने के लिये होने वाले कार्यक्रमों में भी हमेशा सक्रिय रहे है। नैनपुर सहित मण्डला जिले में होने कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति के कार्यक्रमों को सफल बनाने में अपना योगदान उन्होंने दिया। 

मैंने तो सिर्फ माध्यम हूं, समस्त आदिवासी समाज के सहयोग से बना आदिवासी धर्मशाला   


उक्त संबंध में अपनी बात रखते हुये श्री हरनाम सिंह तेकाम ने जानकारी देते हुये बताया कि आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिला मुख्यालय में आदिवासी समाज के लिये महत्वपूर्ण मीटिंग व छोटे कार्यक्रमों के आयोजन हेतु आदिवासी समाज के लिये भवन की आवश्यकता और सुविधा को पूरी कराने में मैं तो सिर्फ आदिवासी समाज समिति का अध्यक्ष के रूप में एक माध्यम भर ही हूं।
        वहीं मण्डला जिला मुख्यालय में आदिवासी धर्मशाला के लिये जमीन से लेकर भवन निर्माण में आदिवासी समाज समिति के समस्त पदाधिकारियों, सदस्यों, जनप्रतिनिधियों एवं समस्त आदिवासी समाज के सगाजनों का उल्लेखनीय योगदान है। श्री हरनाम सिंह तेकाम ने आगे बताया कि मैंने तो सिर्फ समाज व माटी का कर्ज अदा करने में अपनी भूमिका निभाया हूं जो मेरा कर्तव्य है। उन्होंने सामाजिक दिशा में सभी आदिवासी समाज के संगठनों, समाज के जनप्रतिनिधियों व विशेषकर युवाओं का समाज को विकास की दिशा में पद प्रतिष्ठा को त्यागकर अग्रसर करने के लिये एकता के साथ में कार्य करने की आवश्यकता है। 


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