Sunday, October 17, 2021

आदिवासी बैगा समुदाय की गौरवशाली पारंपरिक वैशभूषा को धारण कर ''कोदो-कुटकी तिहार'' में समाजिक कार्यकर्ता वंदना तेकाम आई नजर

आदिवासी बैगा समुदाय की गौरवशाली पारंपरिक वैशभूषा को धारण कर ''कोदो-कुटकी तिहार'' में समाजिक कार्यकर्ता वंदना तेकाम आई नजर 

मंडला जिले में 10 से 17 तक आयोजित कोदो-कुटकी तिहार में दिखा उत्साह 

कोदो-कुटकी उत्पाद, स्थानीय व्यंजन, गोंडी पैंटिंग एवं हर्बल पेय मुख्य आकर्षण


मण्डला। गोंडवाना समय।

10 से 17 अक्टूबर तक मोचा पंचायत भवन परिसर में ''एक जिला एक उत्पाद'' के तहत ''कोदो-कुटकी तिहार'' का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कोदो-कुटकी के उत्पादों के अलावा, स्थानीय व्यंजन, गोंडी पैंटिंग एवं हर्बल पेय मुख्य आकर्षण रहें। वहीं इसके लिये कलेक्टर हर्षिका सिंह ने कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु संबंधित विभागों के अधिकारियों के लिए जिम्मेदारियां भी तय की थी। वहीं कोदो-कुटकी तिहार कार्यक्रम के लिए जिला पंचायत सीईओ सुनील कुमार दुबे को नोडल अधिकारी बनाया गया। प्रशासन की योजनाअनुसार कोदो-कुटकी तिहार सफलतापूर्वक रहा। 

11 स्टॉल, महुये के लड्डू, मंडला थाली, रेशम उत्पाद, गोंडी पैंटिंग मुख्य आकर्षण


कोदो-कुटकी तिहार कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए। जिसमें कृषि विभाग द्वारा एक जिला एक उत्पाद कार्यक्रम के तहत चयनित ''कोदो-कुटकी'' फसल की बोनी से लेकर प्रोसेसिंग, पौष्टिकता तथा अलग-अलग उत्पादों के बारे में विस्तृत जानकारी देने की व्यवस्था की गई। इसी प्रकार आदिवासी जीवन की झलक प्रस्तुत करने वाले गौंडी पेंटिंग भी विशेष आकर्षण रहे। इसके साथ ही मंडला जिले सहित आसपास के जिलों के गोंडी पैंटिंग कलाकार इस कार्यक्रम में शामिल हुये। मंडला की आदिवासी संस्कृति एवं वन आधारित जीवन पद्धति के माध्यम से अनेक हर्बल पेय भी कोदो-कुटकी तिहार में शामिल रहे। एनआरएलएम द्वारा महुये के लड्डू, स्थानीय व्यजंनों पर आधारित मंडला थाली तथा दीदी केफे द्वारा बनाए गए व्यंजन भी शामिल रहे।

कोदो कुटकी तिहार की थीम बैगा एवं आदिवासी संस्कृति पर


10 से 17 अक्टूबर तक आयोजित किए गये ''कोदो-कुटकी तिहार'' कार्यक्रम की बैगा तथा आदिवासी संस्कृति पर आधारित थीम निर्धारित की गई। इस थीम के साथ ही कार्यक्रम स्थल में बैगा, आदिवासी जीवन की झलक प्रस्तुत करने वाली गतिविधियाँ, परिधान, नृत्य, संगीत की व्यवस्था की गई। इस ''कोदो-कुटकी तिहार'' में बैगा नृत्य कलाकारों एवं आदिवासी संगीत का भी प्रदर्शन किया गया। 

मंडला के पर्यटन स्थलों की मिली जानकारी


कोदो-कुटकी तिहार में स्थानीय उत्पादों और कलाओं के प्रदर्शन के साथ ही कान्हा आने वाले पर्यटकों के लिए ''कोदो-कुटकी तिहार'' में एक हेल्पडेस्क बनाई गई जिसके माध्यम से पर्यटकों को मंडला जिले में स्थित अनेक ऐतिहासिक प्राकृतिक धरोहर, जीवाश्म स्थलों, संग्रहालयों की जानकारी भी प्रदान किये जाने से  पर्यटकों को मंडला जिले की विशेषताओं की जानकारी मिली। 

आदिवासी संस्कृति में विश्व में रखती है अपनी विशेष पहचान 


समाजसेवी वंदना तेकाम ने आदिवासी की गौरवशाली संस्कृति, परंपरा को बढ़ावा देने व सरंक्षित करने के लिए आदिवासियो की पंरपरारिक वेशभूषा को धारण कर सेल्फी लिया और यह संदेश देने का प्रयास किया कि आदिवासी संस्कृति पुरातन काल से ही गौरवशाली है अपने आप में विश्व में अलग पहचान व विशेष स्थान रखती है। समाज सेवी वंदना तेकाम द्वारा आदिवासी पारंपरिक वेशभूषा को धारण करने के पीछे महत्वपूर्ण कारण यह था कि कोदों कुटकी तिहार स्थल पर आने वाले पर्यटक के साथ अन्य लोगों को भी आदिवासियो की संस्कृति और उनकी वेषभूषा की विशेषता से अवगत कराना था। आदिवासी बैगा समुदाय के लोग किस प्रकार के वेषभूषा पहनते है, उनकी क्या परंपरा है, इसे संरक्षित करने के लिये संस्कृति का शालिनता के साथ बढ़ाना देने के लिये वंदना तेकाम ने उनकी वेषभूशा को पहनकर पूरे प्रदर्शनी में भी घूमकर प्रदर्शन किया। 

महिलाएं प्रेरित होकर बनेंगी रोजगारवान 


इसके साथ ही उन्होने कोदो कुटकीका भी प्रमोशन करते हुए लोगो से उत्पाद खरीदने की अपील भी की है। इसके अलावा समाजसेवी वंदना तेकाम कोदो कुटकी भी खरीदा। कान्हा में ''कोदो-कुटकी तिहार'' में जनजातीय संस्कृति के साथ ही स्वयं के द्वारा रोजगार कैसे तैयार किया जा सकता है। इस ओर ध्यान आकर्षित करने हेतु समाजसेवी वंदना टेकाम ने भी पहुँच कर चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। 

मुझे दीदी कैफे बहुत अच्छा लगा 

समाजिक कार्यकर्ता वंदना तेकाम ने बताया कि मुझे दीदी कैफे बहुत अच्छा लगा, उसमें जो महिलाएं खुद रेस्टोरेंट चला रही है, उससे काफी लोग प्रभावित होकर काम कर सकते हैं। वहीं अन्य महिलायें भी इससे प्रेरित होकर स्वयं का व्यवसाय कर सकती है। 


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