Wednesday, February 9, 2022

पी एम पोषण फंड के 600 करोड़ कहां हो गये खर्च, घोटाले के लगे मध्यप्रदेश सरकार पर आरोप

पी एम पोषण फंड के 600 करोड़ कहां हो गये खर्च, घोटाले के लगे मध्यप्रदेश सरकार पर आरोप 

प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह सांझा चूल्हा रसोईया महासंघ की अध्यक्ष ने शिवराज सरकार पर लगाई आरोप 

शिवप्रसाद गोल्हानी, विशेष संवाददता
लखनादौन। गोंडवाना समय।

पीएम पोषण फंड मध्यप्रदेश में आया 600 करोड़ खर्च कहां हुआ इसका अता पता नहीं है। कोविड-19 कोरोना जैसी महामारी का प्रकोप जैसे भारत बर्ष में प्रवेश किया सारा जनमानस तहस नहस हो गया।


सभी राज्यों की भांति मध्यप्रदेश में भी स्कूल, कालेज बंद हो गये तब केन्द्र सरकार ने राज्यों के (मध्यान्ह भोजन सांझा चूल्हा) हेतु छात्रों को सूखा राशन वितरण एवं (किराना सामग्री) के लिए सीधे उनके खातों में राशि भेजने की कार्य योजना तैयार की थी। 

ऐसा लगता है कि (वह मूंग) इतिहास के पन्नों में दफ्न हो गई है

जिसके तहत वर्ष 2021 में केंद्र सरकार के द्वारा मध्यप्रदेश शासन को 600/- करोड़ की राशि आबंटित की जिस राशि से शिवराज सरकार ने किसानों से (मूंग) खरीदी कुछ दिनों बाद समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई कि खरीदी गई (मूंग) कक्षा पहली से कक्षा आठवीं तक पढ़ने वाले छात्रों को (कच्चा राशन योजना के तहत (मूंग) वितरित की जाएगी, जिससे छात्रों को पोषण तत्व मिलते रहें किन्तु सालों बीत गये न छात्रों को मूंग मिली न ही समाचार पत्रों में दोबारा प्रकाशित हुआ। ऐसा लगता है कि (वह मूंग) इतिहास के पन्नों में दफ्न हो गई है। 

वर्तमान बाजार सामग्री मूल्य की तुलना में 25% राशि का भुगतान हुआ

ऐसा ही धोखा मध्यप्रदेश के करीब 96,000 हजार मध्यान्ह संचालित महिला स्व सहायता समूहों के साथ छलावा किया गया, जब दो बर्ष के बाद कक्षा पहली से आठवीं तक के स्कूल खोले गए एवं केन्द्र सरकार की (पीएम पोषण) एमडीएम योजना के तहत 26 नवम्बर 2021 से (रेडी टू ईट) पका भोजन खिलाया जाने लगा, छात्रों की उपस्थिति भी 100 %के लगभग होने लगी, समूहों के द्वारा किराना सामग्री ईंधन दुकानदारों से कर्ज में लेकर संचालन कार्य ‌किया गया, लगभग एक माह बाद जब संचालक समूहों के एजेंसियों के खातों में राशि डाली गई, उस राशि का मूल्यांकन करने पर ज्ञात हुआ कि वर्तमान बाजार सामग्री मूल्य की तुलना में 25% राशि का भुगतान हुआ है। 

क्या यही महिला सशक्तिकरण की परिभाषा है 

जबकि शासन द्वारा कोरोना गाइड लाइन के तहत 50% छात्र उपस्थित के आधार पर भुगतान व्यय भुगतान राशि की घोषणा की गई थी। समूह की महिलाओं को कर्ज के बोझ तले दबा दिया गया, क्या यही महिला सशक्तिकरण की परिभाषा है। इतनी कम राशि में पोषण आहार योजना कैसे फलीभूत होगी, ऐसे झूठे आश्वासन एवं वादों का प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह सांझा चूल्हा रसोईया महासंघ अध्यक्ष श्रीमती सरिता ओमप्रकाश बघेल प्रदेश कार्यकारिणी भोपाल एवं समस्त जिला इकाइयां घोर निंदा कर विरोध करतीं हैं। यदि शासन द्वारा सुधार नहीं किया जाता तो आगामी समय में  सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में धरना प्रदर्शन के साथ जन आंदोलन किया जाएगा जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी। 

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