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बिरसा ब्रिगेड मिशन के चुनावी मैदान में उतरने से कांग्रेस की राह मुश्किल तो भाजपा ने आदिवासियों को साधने प्रधानमंत्री का लिया सहारा

बिरसा ब्रिगेड मिशन के चुनावी मैदान में उतरने से कांग्रेस की राह मुश्किल तो भाजपा ने आदिवासियों को साधने प्रधानमंत्री का लिया सहारा 

आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बिरसा ब्रिगेड मिशन ने पहली बार चुनावी मैदान में उतारा प्रत्याशी

महाकौशल, निमाड़, मालवा अंचल में बिरसा ब्रिगेड की दस्तक से सबसे ज्यादा कांग्रेस होगी प्रभावित 

2018 के विधानसभा चुनाव में राहूल गांधी और दीपक बाबरिया के निर्णय से कांग्रेस का दिया था साथ 


राजनैतिक विश्लेषण, संपादक विवेक डेहरिया
सिवनी। गोंडवाना समय। 

संवैधानिक जानकारी के साथ देश में आदिवासी समाज से संबंधित बनने वाले प्रत्येक कानूनों की सटीक जानकारी रखने वाले बिरसा ब्रिगेड के संस्थापक व प्रखर वक्ता इंजिनियर सतीश पेंदाम के सामाजिक मिशन ने मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल मचाकर रखा हुआ है।
        


सामाजिक मिशन चलाने वाला बिरसा ब्रिगेड मिशन ने वर्ष 2023 के चुनाव में सामाजिक मिशनरी के कार्यकर्ताओं को राजनैतिक चुनाव मैदान में उतारने के बाद सबसे ज्यादा कांग्रेस को नुकसान होने की संभावना दिखाई दे रही है। कांग्रेस को मध्यप्रदेश में सरकार बनाने से रोकने के साथ साथ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे विधायक के दावेदारों की नाक में दम करके रखा हुआ है।
         बिरसा ब्रिगेड मिशन का कार्य धरातल पर जमीनी स्तर पर बहुत मजबूत है, कागज से लेकर जमीनी जुड़ाव बिरसा ब्रिगेड का महाकौशल, निमाड़ व मालवा क्षेत्र में है। इन क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी से लड़ रहे कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों को सर्वाधिक नुकसान होने की संभावना दिखाई दे रही है।
             बिरसा ब्रिगेड के कार्यकर्ता प्रशिक्षित है जो संविधान से लेकर सामाजिक मिशन में कट्टरता के साथ कार्य करते है। वर्ष 2023 के चुनाव में बिरसा ब्रिगेड मिशन के द्वारा सामाजिक मिशन के समर्थन में प्रत्याशियों को उतारने से कांग्रेस के साथ साथ भाजपा में भी बैचेनी बढ़ी हुई है। राजनैतिक गुणा गणित, आकलन व अनुमान लगाने वालों को भी आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में अब पेचीदा सा लगने लगा है। 

बिरसा ब्रिगेड मिशन से प्रत्येक विधानसभा में 5000 हजार से अधिक परिवार जुड़े है 

ॅहम आपको बता दे कि पहली बार बिरसा ब्रिगेड मिशन के कार्यकर्ता राजनीति के मैदान में वर्ष 2023 के चुनाव में प्रत्याशी के रूप में सामने आये है। जिससे मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य अंचल की उन सीटों में कांग्रेस व भाजपा का गणित बिगड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
                जिन विधानसभा क्षेत्र में बिरसा ब्रिगेड मिशन के कार्यकर्ता चुनावी मैदान में उतर रहे है वहां पर प्रत्येक उम्मीदवार 10 हजार से अधिक वोट लेने की स्थिति में नजर आ रहा है। बताया जाता है कि बिरसा ब्रिगेड मिशन के कार्यकर्ता जिन विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ रहे है वहां पर लगभग 5000 हजार से अधिक परिवार बिरसा ब्रिगेड मिशन के सदस्य के रूप में जुड़े हुये है।
            सबसे अहम बात यह है कि बिरसा ब्रिगेड मिशन को ये परिवार आर्थिक सहयोग भी करते है जिससे बिरसा ब्रिगेड मिशन का कार्य मजबूती के साथ चल रहा है। बिरसा बिग्रेड मिशन के कार्यकर्ता जिन सीटों पर चुनाव लड़ रहे है उनमें सर्वाधिक सीटों में वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस जीती थी और मध्यप्रदेश में सरकार बनाने में कांग्रेस सफल हुई थी। वहीं इस बार वर्ष 2023 के चुनाव में बिरसा ब्रिगेड के चुनाव में उम्मीदवार बनाने से भाजपा मध्यप्रदेश में सत्ता तक फिर पहुंच सकती है। 

40 में से 32 सीटों पर बिरसा ब्रिगेड कांग्रेस का बिगाड़ सकती है गणित 

बिरसा ब्रिगेड मिशन के तहत मध्यप्रदेश में लगभग 40 सीटों में सामाजिक कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में चुनाव उतारा है जिसमें 32 सीटों पर बिरसा ब्रिगेड मजबूती के साथ चुनावी में मैदान में नजर आ रही है। प्रमुख सीटों में पेटलावद, थांदला, अलीराजपुर, जोबट, सरदारपुर, रतलाम, बरघाट, बैहर, भैसदेंही, नेपानगर, महेश्वर, लखनादौन, सौंसर, टिमरनी, सिवनी, पाढुर्णा, मऊ, अमरवाड़ा, हरदा, मंधाता, जुन्नारदेव, खंडवा, भिकनगांव, बिछिया, मानपुर, मंडला, निवास, डिंडौरी, धरमपुरी, झाबुआ, भगवानपुरा, शामिल है। 

राहूल गांधी, दीपक बाबरिया की रणनीति को कमल नाथ, दिग्विजय सिंह ने नकारा 


बिरसा ब्रिगेड के द्वारा वर्ष 2018 के चुनाव में अपनी शर्ताें के आधार पर आदिवासी समाज के हितों व जनता के हित में फैसला लेते हुये कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहूल गांधी के साथ चर्चा करने के बाद राहूल गांधी के निर्णय के आधार पर कांग्रेस का साथ दिया था।
        

वर्ष 2018 के चुनाव में मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल की प्रमुख सीटों पर बिरसा ब्रिगेड के संस्थापक इंजिनियर सतीश पेंदाम ने कांग्रेस के मध्यप्रदेश के प्रभारी दीपक बाबरिया के साथ मंच साझा करते हुये कांग्रेस के पक्ष में प्रचार-प्रसार किया था।
        

सिवनी जिले की बरघाट, लखनादौन कांग्रेस जीती थी और सिवनी में कांग्रेस प्रत्याशी को वोट की बढ़त मिली थी। इसी तरह से मध्यप्रदेश की अन्य सीटों में भी कांग्रेस को बढ़त मिली थी व विधायक भी जीतकर आये थे। वहीं वर्ष 2023 के हो रहे चुनाव में बिरसा ब्रिगेड ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व यानि कमल नाथ व दिग्विजय सिंह की कार्यप्रणाली से नाराज होकर सिवनी जिले सहित अन्य लगभग 40 सीटों पर बिरसा ब्रिगेड मिशन के कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में उतार दिया है।
                

इससे कांग्रेस को सर्वाधिक नुकसान होने की संभावना दिखाई दे रही है। वर्ष 2018 के चुनाव में राहूल गांधी और दीपक बाबरिया द्वारा अपनाई गई रणनीति को मध्यप्रदेश में कमल नाथ और दिग्विजय सिंह ने नकार दिया है जिसके कारण कहीं न कहीं नाराजगी चलते बिरसा ब्रिगेड ने सामाजिक मिशन के तहत चुनाव मैदान अपने समर्थित उम्मीदवार को उतार दिया है। 

आदिवासी जिलों के केंद्र बिंदु में सिवनी में प्रधानमंत्री मोदी की सभा को मजाक में ले रही कांग्रेस 


आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की विधानसभा सीटों कें केंद्र बिंदु सिवनी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी सभा होना आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की सीटों में व्यापक प्रभाव छोड़ सकती है। सिवनी में बिरसा ब्रिगेड का केंद्रीय कार्यालय है यहां से बिरसा ब्रिगेड मिशन की कार्यप्रणाली संचालित होती है।
        वर्ष 2023 के चुनाव में बिरसा ब्रिगेड का कांग्रेस से नाराज होने के विषय को भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में गंभीरता से लिया है। सिवनी मुख्यालय जो कि मण्डला, बालाघाट, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर की आदिवासी बाहुल्य सीटों का केंद्र बिंदु है यहां पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा होने से भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है और कांग्रेस को बहुत महंगा भी पड़ सकता है लेकिन इसके बाद भी मध्यप्रदेश के कांग्रेस के क्षत्रप नेता कमल नाथ दिग्विजय सिंह कोई तोड़ निकालने का प्रयास करते हुये नजर नहीं आ रहे है।
            वहीं कांग्रेस के स्थानीय नेता प्रधानमंत्री की सभा को मजाक में लेते हुये नजर आ रहे है। कांग्रेस वास्तव में सत्ता में वापसी चाहती है तो आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों वाली विधानसभा सीटों में समय रहते चुनावी रणनीति में बदलाव करते हुये चुनाव फाईट करें। वैसे भी कांग्रेस द्वारा टिकिट वितरण में कराये गये सर्वे पर सवाल खड़े हो रहे है कांगे्रस ने जातिगत, सामाजिक संख्या को नकारते हुये अधिकांश विधानसभा क्षेत्र में टिकिट घोषित कर दिया है। 

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