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आदिवासी भाई-बहन चंचलेश कुमरे व संध्या कुमरे एमपीपीएससी 2019 की परीक्षा में सफल हुये

आदिवासी भाई-बहन चंचलेश कुमरे व संध्या कुमरे एमपीपीएससी 2019 की परीक्षा में सफल हुये

संध्या कुमरे वाणिज्य कर निरीक्षक और चंचलेश कुमरे फाइनेंस डिपार्टमेंट असिस्टेंट डायरेक्टर बने


परासिया/छिंदवाड़ा। गोंडवाना समय। 
गोंडवाना आंदोलन में लम्बे समय से जुड़े ग्राम-इटावा (उमरेट) तह. परासिया जिला छिंदवाड़ा म.प्र. निवासी पिता तिरु. मेहताब सिंह कुमरे (सेवानिवृत शिक्षक) एवं चंद्रमोहन शाह कुमरे के छोटे भाई-बहन संध्या कुमरे एवं चंचलेश कुमरे जिन्होंने एमपीपीएससी-2019 की परीक्षा में सफल होकर पूरे परिवार एवं समाज को गौरवान्वित किया है।
                

आदिवासी समाज के दो भाई-बहन में संध्या कुमरे वाणिज्य कर निरीक्षक और छोटे भाई चंचलेश कुमरे फाइनेंस डिपार्टमेंट असिस्टेंट डायरेक्टर बने है। पीएससी की परीक्षा में सफलता मिलने पर उन्हें शुभकामनाएं बधाई दी गई है।
                गोंडवाना आंदोलन से जुड़े परिवार से यदि आप सफल होते हैं तो पूरा समाज आप पर गर्व करता है और हमें पूर्ण विश्वास है आप दोनों भाई-बहन नौकरी में रहते हुये समाज, प्रदेश व देश के सर्वांगीण विकास के लिए कर्तव्य निभाते हुये विशेषकर आदिवासी समाज को जागरूक करेंगे।

समाज की वेदनाओं से रूबरू होकर सिविल सेवा में जाने का लिया संकल्प 


चंचलेश कुमरे पिता तिरू. श्री मेहताब सिंह कुमरे का चयन सहायक संचालक (वित्त विभाग) एमपीपीएससी 2019 में हुआ है। जो कि मूलत: निवासी-तह-उमरेठ, तहसील परासिया जिला-छिन्दवाड़ा के है। वहीं उनकी स्कूली शिक्षा शास.उत्कृष्ट विद्यालय छिन्दवाड़ा में हुई है उन्होंने ग्रेजुएशन-बी-ए. से करने के पश्चात सिविल सेवा की तैयारी करने का संकल्प लेकर प्रयास प्रारंभ किया।
        चंचलेश कुमरे ने बताया कि वह वर्ष 2013-2014 में जीएसयू के शुरूआती दिनों में गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोंलन के सहभागी बनने के साथ साथ आदिवासी समाज की वेदनाओं से रूबरू हुये और पहली बार मन में सिविल सेवा में जाने का विचार आया। 

कॉल सेंटर में प्राईवेट जॉब के साथ ग्रेजुएशन भी किया 

चंचलेश कुमरे ने बताया कि चुंकि 2013-2014 में इंजीनियरिंग के साथ-साथ सामाजिक आंदांलन में अति सक्रियता की वजह से पढ़ाई से विमुख हो चुका था, जिस वजह से इंजीनियरिंग के प्रारंभिक 4 सेमेस्टर में 17 विषयों में फेल हुआ एवं मुझे इंजीनियरिंग छोड़ना पड़ा लेकिन समाज सेवा के जज्बे ने पुन: प्रेरित किया एवं एक कॉल सेंटर में प्राईवेट जॉब के साथ ग्रेजुएशन भी किया । तत्पश्चात सिविल सेवा की तैयारी 2017 से शुरू किया। 

तीसरे प्रयास में सहायक संचालक (वित्त विभाग) के पद पर चयन हुआ 

तैयारी के क्रम में वर्ष 2017 में पीएससी परीक्षा में असफल रहा लेकिन 2018 में ही पटवारी में चयन के साथ फिर से प्रेरणा मिली। वहीं पीएससी 2018 में दूसरे प्रयास में पहली बार इंरव्यू कॉल हुआ लेकिन इनमें भी अंतिम सफलता नहीं मिली।
            पटवारी पद पर रहते हुये तैयारी करना मुश्किल हो रहा था जिस कारण मुझे अवैतनिक अवकाश लेकर तैयारी करना पड़ा। एमपीपीएससी 2019 में तीसरे प्रयास में मेरा सहायक संचालक (वित्त विभाग) के पद पर चयन हुआ। इसके साथ ही डी.एस.पी. पद के लिए प्रथम प्रतिक्षा सूची में नाम है। इस सफलता का श्रेय मेरे माता-पिता एवं भाई, बहनों एवं मेरे गुरूजनों को देना चाहता हूूँ, जिन्होनें मुझे हर वक्त मेरी मदद की है। 

शिक्षा ही एक मात्र ऐसा माध्यम है जो हमारे अस्तित्व की रक्षा कर सकती है

चंचलेश कुमरे सभी सगाजनो ंको सेवा जोहार करते हुये कहते है कि समाज के नाम संदेश अपने बच्चों को शिक्षित करें, जागरूक करें क्योंकि शिक्षा ही एक मात्र ऐसा माध्यम है जो हमारे अस्तित्व की रक्षा कर 
सकती है।

संध्या कुमरे ने सफलता का श्रेय माता-पिता की पे्ररणा व गुरूजनों को दिया 


संध्या कुमरे पिता तिरू. श्री मेहताब सिंह कुमरे का चयन वाणिज्य कर निरीक्षक एमपीपीएसी 2019 में हुआ है। वह मूलत: निवास तह. उमरेठ तहसील परासिया जिला-छिंदवाड़ा की है। संध्या कुमरे की स्कूली शिक्षा शास.कन्या शिक्षा परिसर छिंदवाड़ा में हुई है।
                संध्या कुमरे ने स्नातक बी.एस.सी.नर्सिंग (एम.कॉम.मेडिकल कॉलेज इन्दौर) की है। वहीं संध्या कुमरे ने सिविल सेवा तैयारी स्टॉफ नर्स की सेवा में रहते हुये की है। संध्या कुमरे का कहना है कि सिविल सेवा की तैयारी करना काफी मुश्किल था लेकिन माता-पिता की प्रेरणा एवं छोटे भाई चंचलेश कुमरे के सहयोग से 2018 में पी.एस.सी. की तैयारी प्रारंभ की एवं पी.एस.सी. परीक्षा 2019 में प्रथम प्रयास में वाणिज्य कर निरीक्षक का पद प्राप्त हुआ। जिसका श्रेय मेरे परिवार को और मेरे गुरूजनों को जाता है। 

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