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आदिवासियों की संवैधानिक अधिकारों की आवाज उठाने भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत संसद पहुंचे

आदिवासियों की संवैधानिक अधिकारों की आवाज उठाने भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत संसद पहुंचे

बाप के राजकुमार का बांसवाड़ा में हुआ 'राज', धनबल के आगे जनता ने किया विश्वास 


राजस्थान। गोंडवाना समय। 

डूंगरपुर-बांसवाड़ा लोकसभा सीट से भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार रोत को भारी मतों से जीत मिली है, उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी महेंद्रजीत सिंह मालवीया को पटखनी दी है।
                


 डूंगरपुर. बांसवाड़ा लोकसभा सीट से भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार रोत 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीत गए हैं। रोत शुरूआत से ही बढ़त बनाए हुए थे, भाजपा प्रत्याशी महेंद्रजीत सिंह मालवीया शुरूआत से ही पीछे चल रहे थे. राजकुमार रोत ने अपनी जीत को लेकर बांसवाड़ा लोकसभा क्षेत्र की जनता का आभार जताया है। 

भारत आदिवासी पार्टी पर भरोसा किया 


राजकुमार रोत ने कहा कि क्षेत्र की जनता भाजपा की नीति और नीयत को समझ गई थी। भाजपा ने अब तक इस क्षेत्र के विकास के को लिए कोई काम नहीं करवाया। इस वजह से लोगो ने भाजपा को नकार दिया। लोगों ने अब भारत आदिवासी पार्टी पर भरोसा किया है। क्षेत्र की जनता से जो वादे किए गए हैं और जो मांगे यहां की जनता की है, उसे संसद में उठाकर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। 

राजकुमार के दो हमनाम प्रत्याशियों ने 1 लाख 16 हजार 381 मत प्राप्त किए 


बांसवाड़ा डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से बाप के प्रत्याशी राजकुमार रोत को 8 लाख 20 हजार 831 वोट मिले। वहीं उनके ही दो हमनाम प्रत्याशियों ने एक लाख 16 हजार 388 मत प्राप्त कर लिए। भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार रोत ने पहले ही आरोप लगाया था कि भाजपा ने साजिश करते हुए उनके दो हमनाम प्रत्याशी उतारे हैं।
                 इसका उनको जीत के अंतर में नुकसान भी उठाना पड़ा है। बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत को भले ही 2 लाख 47 हजार 54 वोटो से जीत हासिल हुई हो, लेकिन उनके ही दो हम नाम प्रत्याशियों के चलते उनके खाते में एक लाख से अधिक वोटो की कमी आई है। यदि यह हमनाम प्रत्याशी नहीं होते तो उनको इससे भी अधिक वोटो से जीत हासिल होती। विजेता प्रत्याशी राजकुमार के दो हमनाम प्रत्याशियों ने 1 लाख 16 हजार 381 मत प्राप्त किए हैं। 

तो राजकुमार रोत का जीत का अंतर 4 लाख 25 हजार 653 मतों का हो जाता 

जहां भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार रोत को अपने दो हमनाम प्रत्याशियों के कारण वोटों का नुकसान पहुंचा उसी तरह कांग्रेस के बागी प्रत्याशी अरविंद डामोर के कारण भी डामोर को मिले 61 हजार 211 वोटों का नुकसान हुआ, जबकि कांग्रेस ने भारत आदिवासी पार्टी को समर्थन दिया था लेकिन डामोर ने अपना नामांकन पत्र वापस नहीं लिया।
            जिससे ईवीएम मशीन में कांग्रेस का चुनाव चिन्ह रहा जिसके कारण अरविंद डामोर को 61 हजार 211 वोट मिले. यदि यह सभी वोट भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार को मिलते तो उनको 9 लाख 99 हजार 430 मत प्राप्त होते और उनकी जीत का अंतर बढ़ जाता। 

राजकुमार रोत ने करीब ढ़ाई लाख के अंतर से मालवीय को हराया 

राजकुमार रोत ने 2,47,054 वोटों के अंतर से यह चुनाव जीता है इसके साथ ही मालवीय की छोड़ी गई बागीदौरा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी अपनी पार्टी का परचम लहरा दिया। इससे उनकी पार्टी के फिर से 3 विधायक हो गए हैं।
            अब वे खुद की चौरासी सीट से इस्तीफा देंगे, उसके बाद भी उनकी इस सीट के लिए होने वाले उपचुनाव पर नजर रहेगी। राजस्थान के आदिवासी बाहुल्य डूंगरपुर-बांसवाड़ा में युवा नेता राजकुमार रोत जो कि महज 26 साल की उम्र में विधायक बनने वाले राजकुमार रोत अब बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं।                     यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। राजकुमार रोत ने इस इलाके के दिग्गज आदिवासी नेता माने जाने वाले महेन्द्रजीत मालवीय को करीब ढाई लाख वोटों से शिकस्त दी है। मालवीय लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से पाला बदलकर बीजेपी में आए थे।
                बीजेपी ने मालवीय के इलाके में प्रभाव को देखते हुए उनको लोकसभा चुनाव में उतारा था लेकिन 31 साल के राजकुमार उन पर भारी पड़ गए। राजकुमार रौत इससे पहले विधानसभा चुनाव में इलाके की बीजेपी के एक और दिग्गज नेता को करारी हार का स्वाद चखा चुके हैं। छात्र जीवन से एनएसयूआई के जरिए राजनीति में प्रवेश करने वाले राजकुमार साल 2014 में इसके जिलाध्यक्ष बने।

26 साल की उम्र में पहली बार में ही विधायक बने

डूंगरपुर के चौरासी इलाके के खरबरखुनिया गांव के इस युवा ने साल वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के बैनर तले चौरासी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। वे महज 26 साल की उम्र में पहली बार में ही विधायक बन गए लेकिन राजकुमार रौत कुछ बड़ा करना चाहते थे। लिहाजा उन्होंने विधानसभा चुनाव 2023 से पहले उन्होंने बीटीपी से नाता तोड़कर अपनी खुद की भारत आदिवासी पार्टी बना लिया। 

पहले बार के चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी के तीन प्रत्याशी जीते 

राजकुमार रौत ने 2023 का विधानसभा चुनाव अपनी पार्टी से लड़ा और आदिवासी बाहुल्य इस इलाके में करीब एक दर्जन अन्य सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए। राजकुमार रौत ने इस चुनाव में चौरासी विधानसभा सीट से बीजेपी की दिग्गज नेता सुशील कटारा को 69 हजार वोटों से हराया।
                 राजकुमार रोत ने इससे पहले भी सुशील कटारा को ही हराया था लेकिन तब जीत का अंतर कम था। कटारा बीजेपी राज में मंत्री रह चुके हैं और इलाके के कद्दावर नेता माने जाते हैं। इस चुनाव में राजकुमार रोत की पार्टी ने चौरासी के साथ ही डूंगरपुर की आसपुर और प्रतापगढ़ के धरियावाद सीट पर भी अपने प्रत्याशी जीताए. वहीं आधा दर्जन सीटों के इस पार्टी प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे। 

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