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न्याय ना मिलने पर 10 राज्यों के आदिवासियों के साथ आंदोलन की चेतावनी

न्याय ना मिलने पर 10 राज्यों के आदिवासियों के साथ आंदोलन की चेतावनी 

गोंडवाना कृषि आवासीय विद्यालय देवरी डॉ हीरालाल अलावा ने 1 लाख देने की घोषणा 

करंजिया महा आंदोलन में डॉ हीरालाल अलावा ने मुखरता से उठाई आवाज 


करंजिया/डिंडौरी। गोंडवाना समय। 

बीते माह 23 जून 2025 को वन विभाग द्वारा करंजिया ब्लाक के बरेंडा ग्राम में पीढ़ियों से निवासरत और खेती करते आ रहे किसानों के घर और खेतों को भरे बरसात में उजाड़ने के खिलाफ जयस के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज का महा आंदोलन करंजिया ब्लाक मुख्यालय में 8 जुलाई 2025 को आयोजित किया गया।


जिसमें जयस सरंक्षक व विधायक डॉ हीरालाल अलावा सहित मप्र के दर्जनों जिलों से जयस, आदिवासी युवा, समाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। 

संविधान बनने के पहले से ही आदिवासी जंगल में रह रहे है


अमानवीय तरीके से भारी बरसात में वन क्षेत्र में निवास करने वाले नागरिकों का घर उजाड़ने के खिलाफ सम्पूर्ण मप्र में आक्रोश है। डिंडौरी जिले के करंजिया में अयोजित कार्यक्रम में हजारों की संख्या में आदिवासी शामिल हुए।               

 
वहीं हजार किमी दूर मनावर से चलकर आए राष्ट्रीय जयस संरक्षक डॉ हिरा अलावा ने मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासियों को हटाने का कूटनीतिक और राजनैतिक षड्यंत्र कर रहे हैं। डॉ अलावा ने कहा कि सरकार संविधान के बनने के पहले से ही आदिवासी जंगल में रह रहे है। बंरेडा के आदिवासियों को न्याय नहीं मिला तो 10 राज्यों के आदिवासियों को खड़ा करके आंदोलन करेंगे। 

भरे बरसात में घर तोड़ने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग 


डॉ हीरालाल अलावा ने पिपरिया बजाग ब्लाक में बॉक्साइट खदान की जमींन की फर्ज़ी तरीके से रजिस्ट्री के खिलाफ भी जमकर हल्ला बोला। डॉ हीरालाल अलावा ने कहा कि भारत के संविधान में कहीं नहीं लिखा कि भरी बरसात में आदिवासियों को घर तोड़ दो।
             

वहीं 13 दिसंबर 2005 से पहले से निवासरत और खेती की जमीन का व्यक्तिगत और सामुदायिक पट्टा देने का अधिकार दिया है। भरे बरसात में घर तोड़ने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं हुई तो सम्पूर्ण मप्र के आदिवासी मिलकर कार्यवाही करेंगे। अभी तो धरना प्रदर्शन सिर्फ शुरूआत है आगे की लड़ाई इससे और शानदार होगी और 10 राज्यों के आदिवासी शामिल होंगे।

हमारी लड़ाई इस धरती कि है वो पट्टा सरकार हमको सौंपे

डिंडोरी के तेज तर्रार आदिवासी नेत्री मनेरी सरपंच संगीता प्रेम शाह मरावी ने कहा कि आदिवासियों की लड़ाई सिर्फ़ आज की नहीं है। हमारी लड़ाई तो तब से है जब से सरकारें आईं हैं। सरकार कहती हैं ग्राम सभा सबसे बड़ी समिति है परंतु आज की स्थिति यह है कि आपके गांव में घुसकर आपके घरो को उजाड़ते है, ये धरती सबकी है फिर सरकार ने कैसे आपके घर उजाड़ा दिया। संगीता मरावी ने कहा कि अलावा जी ने कहा कि धार से हजारों किमी दूर से आपके लिए लड़ने के लिए आए हैं। हमारी लड़ाई राशन और समग्र आईडी की नहीं है हमारी लड़ाई इस धरती कि है वो पट्टा सरकार हमको सौंपे।

गोंडवाना कृषि आवासीय विद्यालय की प्रशंसा कर संचालकों का बढ़ाया हौंसला 


डॉ हीरालाल अलावा ने दादा हीरा सिंह मरकाम जी के मिशन को आगे बढ़ाने वाले गोंडवाना कृषि आवासीय विद्यालय टिकरा देवरी का भी दौरा किया और गोंडी भाषा को सुनकर भावुक हो गए और आदिवासी भाषा और बोली को बचाए रखने के लिए संकल्प लिया।
         

आवासीय विद्यालय के संचालक और बच्चों को मार्गदर्शन दिया और सफल संचालन के लिए 1 लाख रूपए सहयोग देने की घोषणा किया। गोंडवाना कृषि आवासीय विद्यालय में एक हजार किमी से आकर राष्ट्रीय जयस संरक्षक डॉ हिरा अलावा ने एक लाख रुपए देकर आदिवासी एकता का शानदार परिचय दिया और बच्चों और शिक्षकों को शुभकामनाएं भी दिया।

बिना नोटिस भरे बरसात में उनके घरों को तोड़ा गया 


बरेंडा पहुंचकर डॉ हीरालाल अलावा ने ग्रामीणों से वातार्लाप किया ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित जमीनों पर इन परिवारों का सदियों से कई पीढ़ीयो से कब्जा है और निवासरत है फिर भी बिना नोटिस भरे बरसात में उनके घरों को तोड़ा गया। महिलाओं से मारपीट किया गया बच्चों को मारा और अनाज को तितर बितर कर दिया। जिसके कारण पीड़ित परिवार तिरपाल के पंडालों में रहने पर मजबूर हैं। बिजली के तार और खंबे भी गिरा दिए गए ये अमानवीय ही नहीं अंसवैधानिक है क्योंकि संविधान में कहीं भी नहीं लिखा कि भारी बरसात में आदिवासियों का घर तोड़ा जाए।

महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया 

जयस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। जिसमें ग्राम बारेंडा ब्लॉक करंजिया जिला डिंडोरी अनुसूचित क्षेत्र के बैगा एवं गोंड आदिवासी परिवारों को बरसात के मौसम में बेदखल कर उनके घर तोड़े जाने के अत्याचार पर तत्काल संज्ञान एवं न्याय की संबंधी प्रमुख मांगों को रखा गया। डिंडोरी जिले के अनुसूचित क्षेत्र में स्थित ग्राम बारेंडा ब्लॉक करंजिया जिला डिंडोरी एवं आसपास के गाँवों में निवासरत बैगा और गोंड आदिवासी परिवारों के घरों को भरे बरसात के मौसम में वनविभाग द्वारा तोड़ा गया और उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन से जबरन बेदखल कर दिया गया।

वनाधिकार के तहत तत्काल अधिकार पत्र प्रदान किया जाए 

यह कार्रवाई उस स्थिति में की गई है जबकि प्रभावित आदिवासी परिवारों ने वनाधिकार मान्यता कानून 2006 के तहत वर्ष 2006, 2008, 2010, 2011 एवं 2012 में व्यक्तिगत/सामूहिक वनाधिकार के दावे प्रस्तुत किए थे। उनके दावों में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि वे तीन पीढ़ियों से अधिक समय से इसी भूमि पर निवासरत हैं।
             प्रभावित परिवारों के दावों का वनाधिकार मान्यता कानून 2006 के तहत तुरंत निष्पक्ष और पारदर्शी निस्तारण किया जाए एवं जो वाकई में तीन पीढ़ियों से निवास कर रहें उनके वनाधिकार के तहत तत्काल अधिकार पत्र प्रदान किया जाए।
        बरसात के मौसम में जिनके घर तोड़े गए, उन्हें तत्काल अस्थायी एवं स्थायी आवास की व्यवस्था दी जाए। जिन अधिकारियों ने कानून की अनदेखी करते हुए कार्रवाई की, तत्काल उन पर विभागीय कार्रवाई एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
                प्रभावित परिवारों को तत्काल उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी विस्थापन, बेदखली या तोड़फोड़ के पहले पेसा कानून एवं वनाधिकार मान्यता कानून 2006 के तहत ग्राम सभा की अनिवार्य अनुमति सुनिश्चित की जाए।
            भविष्य में इस प्रकार की अमानवीय कार्रवाई रोकने हेतु स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं जिसमे ये उल्लेख हो कि सदियों से वन में निवासरत आदिवासियों एवं अन्य परम्परागत वन निवासियों को बिना वनाधिकार मान्यता कानून 2006 के तहत दावा प्रक्रिया पूर्ण सेटलमेंट न किया जाए तब तक किसी भी तरह की कार्यवाही पर रोक सुनिश्चित किया जाए।
            कार्यवाही का आदेश देने वाले अधिकारियों पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत मुकदमा दायर कर कार्यवाही की जाए। बजाग विकास खंड अंतर्गत ग्राम तातर, पिपरिया एवं अन्य ग्रामों में आदिवासियों की सैकड़ों एकड़ जमीन बड़े उद्योगपतियों द्वारा आदिवासियों के नाम से खरीदी गई है जो आदिवासियों के हक अधिकारों पर डाका डालने से कम नहीं है।
        अत: इस बहुचर्चित और असंवैधानिक कृत्य पर कार्यवाही करते हुए इस खरीद फरोस्त में शामिल लोगों पर मुकदमा दायर कर कठोर सजा दिलाए ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।



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