गोंडवाना के आव्हान पर आदिवासी बचाओ जन आक्रोश आंदोलन का 16 जुलाई को ऐलान
सिंगारदीप वन क्षेत्र के आदिवासी युवक को बेरहमी से मारपीट के मामले में बिछुआ में होगा आंदोलन
पवन शाह सरयाम के नेतृत्व में पीड़ित परिवार से मिले आदिवासी युवा की टीम
बिछुआ/छिंदवाड़ा। गोंडवाना समय।
छिंदवाड़ा जिले के कुंभपानी वन परिक्षेत्र के सिंगारदीप वन क्षेत्र से आदिवासी युवक को बेरहमी से मारपीट करने का मामला विगत दिनों सामने आया था। जिसमें सागौन चोरी के संदेह में एक वनरक्षक ने आदिवासी युवक के साथ मारपीट किया था जिसमें आदिवासी युवक को शरीर में निशान आ गये थे वहीं उसकी आंख तक सूज गई। इतना ही नहीं पूरे शरीर पर काले नीले जख्म अलग ही नजर आ रहे थे।
उक्त मामले को लेकर चौरई विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी समाज के युवाओं ने बिछुआ थाना पहुंचकर आरोपी वनरक्षक के खिलाफ एससी/ एसटी एक्ट और बीएनएस की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था। वहीं अब 16 जुलाई 2025 को बिछुआ मुख्यालय में आदिवासी युवा नेता पवन शाह सरयाम के नेतृत्व में आंदोलन का ऐलान किया गया है।
वहीं पवन सरयाम के साथ आदिवासी युवा टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान उन्हें न्याय दिलाने का पूरा भरोसा दिया गया है। सिंगरदीप ग्रामवासियों एवं पीड़ित परिवार से चर्चा कर 16 जुलाई 2025 को पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए बिछुआ मुख्यालय में गोंडवाना के आव्हान पर आदिवासी बचाओ जन आक्रोश आंदोलन का ऐलान किया गया है।
पीठ और हाथ-पैरों पर गहरे काले नीले निशान पड़ गए थे
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिंगारदीप निवासी शिवपाल उईके बीते सप्ताह 7 जुलाई को जंगल गया था। वह घरेलू उपयोग के लिए सूखी लकड़ी बीनने गया था। लौटते समय खेत के पास फॉरेस्ट गार्ड संजय नामदेव ने उसे रोका फिर बिना कोई बात सुने लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। शिवपाल उईके की मानें तो पिटाई इतनी भयंकर थी कि वन रक्षक द्वारा मारते समय दो लाठियां टूट गईं थी। पिटाई के कारण उसकी एक आंख सूज गई है, पीठ और हाथ-पैरों पर गहरे काले नीले निशान पड़ गए थे।
बिछुआ मुख्यालय में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने होगा आंदोलन
उक्त मामले में आदिवासी युवा नेता पवन सरेयाम बीते दिनों पीड़ित परिवार से मिलने बिछुआ ब्लांक के ग्राम सिंगारदीप पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़ित व उनके परिवारजनों का दु:ख दर्द सुना और पीड़ित के शरीर के जख्म देखा। इस दौरान पीड़ित ने बताया कि वन रक्षक के द्वारा उसे बेदर्दी से सीताफल की गीली लकड़ी से जमीन पर लेटा कर तब तक मारता गया जब तक लकड़ी ना टूट गई।
इस मामले आदिवासी युवा पवन शाह सरयाम का कहना है कि क्या जंगल के निकट में रहने वाला आदिवासी जलाऊ रोटी बनाने के लिए लकड़ी भी नहीं ला सकता है। वहीं पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान उन्हें न्याय दिलाने का पूरा भरोसा दिया गया है।
सिंगरदीप ग्रामवासियों एवं पीड़ित परिवार से चर्चा कर 16 जुलाई 2025 को पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए बिछुआ मुख्यालय में गोंडवाना के आव्हान पर आदिवासी बचाओ जन आक्रोश आंदोलन का ऐलान किया गया है।

