विश्व आदिवासी दिवस पर छत्तीसगढ़ सरकार की चुप्पी : आदिवासी समुदाय में आक्रोश
रायपुर। गोंडवाना समय।
विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त 2025) के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उनकी सरकार की चुप्पी ने राज्य के आदिवासी समुदाय में गहरी नाराजगी और निराशा पैदा की है।
आदिवासी समुदाय से आने वाले मुख्यमंत्री, जो स्वयं को गर्व से आदिवासी बताते हैं, ने इस महत्वपूर्ण दिन पर न तो कोई शुभकामना संदेश जारी किया और न ही आदिवासी समुदाय के लिए किसी नई योजना या पहल की घोषणा की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स, फेसबुक, और अन्य डिजिटल मंचों के साथ-साथ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी इस अवसर पर उनकी उपस्थिति नदारद रही।
सोशल मीडिया हैंडल पर नजरे रखा रहा
सरगुजा संभाग के सूरजपुर जिले में सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता श्री बी.पी.एस. पोया ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, मैं सुबह से रात 11 बजे तक मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल और मीडिया चैनलों पर नजर रखे रहा, यह उम्मीद करते हुए कि वह विश्व आदिवासी दिवस पर शुभकामनाएं देंगे और आदिवासी समुदाय के लिए कोई बड़ी योजना की घोषणा करेंगे। लेकिन यह इंतजार न केवल मेरा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदाय का था, जो व्यर्थ गया।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व आदिवासी दिवस
विश्व आदिवासी दिवस, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1994 में 'वर्ल्ड इंडीजीनस पीपल्स डे' के रूप में घोषित किया गया था, आदिवासी समुदाय की संस्कृति, सभ्यता, अस्मिता, और संवैधानिक अधिकारों को समझने और संरक्षित करने का अवसर प्रदान करता है।
यह दिन विश्व भर के 193 देशों में आदिवासियों के अधिकारों के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़, जहां 2011 की जनगणना के अनुसार 30.62% (लगभग 78 लाख) और वर्तमान अनुमानों के अनुसार 35% आबादी आदिवासी समुदाय की है, वहां इस दिन की अनदेखी ने गहरे सवाल खड़े किए हैं।
आदिवासी मुख्यमंत्री पर उठे सवाल
पोया ने इस ओर ध्यान दिलाया कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और अर्थव्यवस्था में आदिवासी समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान है। वे जल, जंगल, जमीन, और खनिज संपदा के संरक्षक हैं, जो राज्य की पहचान और प्रगति का आधार हैं। फिर भी, इस महत्वपूर्ण दिन पर मुख्यमंत्री की चुप्पी को उन्होंने आदिवासी समुदाय का अपमान करार दिया।
छत्तीसगढ़ में 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले आदिवासी संगठनों ने आंदोलन के माध्यम से आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग की थी, जिसके परिणामस्वरूप श्री विष्णु देव साय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, पोया का कहना है कि आदिवासी समुदाय अब यह महसूस करने लगा है कि यह नियुक्ति केवल "नाम मात्र" की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अन्य राज्यों की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन आदिवासी संस्कृति और उनके तीज-त्योहारों की उपेक्षा करते हैं।
आदिवासी समुदाय की संस्कृति, अधिकारों, और विकास को प्राथमिकता दें
पोया ने सवाल उठाया, क्या मुख्यमंत्री के सलाहकार और सोशल मीडिया हैंडल संचालक आदिवासी समुदाय से घृणा करते हैं ? या उन्हें विश्व आदिवासी दिवस की जानकारी ही नहीं थी ? यह असंभव है, क्योंकि गूगल और सोशल मीडिया पर कई दिनों से इस दिन का प्रचार-प्रसार हो रहा था। उन्होंने इसे जानबूझकर की गई उपेक्षा करार दिया और कहा कि सरकार आदिवासी समुदाय के विकास के लिए कोई ठोस योजना लागू करने में रुचि नहीं दिखा रही।
आदिवासी समुदाय की मांग और चेतावनी
पोया ने चेतावनी दी कि आदिवासी समुदाय की अवहेलना और उनके अधिकारों की अनदेखी सरकार के लिए भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकती है। उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ की 35% आबादी का तिरस्कार करना न केवल अन्याय है, बल्कि यह सरकार और उसके नेतृत्व के लिए राजनीतिक रूप से खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर गहन चिंतन करें और आदिवासी समुदाय की संस्कृति, अधिकारों, और विकास को प्राथमिकता दें। पोया ने यह भी सुझाव दिया कि यदि मुख्यमंत्री इस तरह की गलतियां दोहराते हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा आदिवासी समुदाय के सुख-दुख और प्रगति की अनदेखी करने वाले मुख्यमंत्री को इस जिम्मेदारी पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
सरकार से अपील
सर्व आदिवासी समाज और अन्य सामाजिक-राजनीतिक कार्यकतार्ओं ने मांग की है कि सरकार विश्व आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर सक्रिय भागीदारी दिखाए और आदिवासी समुदाय के लिए ठोस नीतियां लागू करे। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं शामिल हैं। साथ ही, आदिवासी समुदाय की पहचान को जनगणना में अलग कॉलम और धर्म कोड के माध्यम से मान्यता देने की मांग भी दोहराई गई।
