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राज्यसभा में आदिवासी शून्य क्यों ? कांग्रेस के 30 साल के 'छल' का हिसाब मांगेगा गोंडवाना: कुंवर सुमित नर्रे

राज्यसभा में आदिवासी शून्य क्यों ? कांग्रेस के 30 साल के 'छल' का हिसाब मांगेगा गोंडवाना: कुंवर सुमित नर्रे 

ऐतिहासिक अन्याय : राजा नरेशचंद्र सिंह जी के बाद आज तक कोई आदिवासी मुख्यमंत्री क्यों नहीं? 


भोपाल। गोंडवाना समय। 

रानी दुर्गावती सेना के संस्थापक एडवोकेट कुंवर सुमित नर्रे ने मध्य प्रदेश की राजनीति में एक ऐतिहासिक 'शक्ति-संवाद' जारी करते हुए कांग्रेस के 30 वर्षों के आदिवासी विरोधी इतिहास पर कड़ा प्रहार किया है। श्री सुमित नर्रे ने स्पष्ट कर दिया है कि अब समाज केवल 'वोट बैंक' नहीं, बल्कि सत्ता में बराबर का हिस्सेदार बनेगा।

मुख्यमंत्री पद पर 'ऐतिहासिक वनवास' का हिसाब 

एडवोकेट कुंवर सुमित नर्रे संस्थापक: रानी दुर्गावती सेना एवं भंवरगढ़ वंशज ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि ने एक चुभता हुआ सवाल उठाते हुए कहा—आजादी के बाद से मध्य प्रदेश की धरती ने केवल एक आदिवासी मुख्यमंत्री देखा, राजा नरेशचंद्र सिंह जी। उनके बाद से आज तक किसी भी दल ने आदिवासी समाज के व्यक्ति को मुख्यमंत्री की कुर्सी के योग्य क्यों नहीं समझा? क्या 21% से अधिक आबादी वाले समाज में नेतृत्व की कमी है या यह जानबूझकर किया गया राजनैतिक दमन है? रानी दुर्गावती सेना अब यह मांग करती है कि मध्य प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री आदिवासी समाज से ही होना चाहिए।

राज्यसभा टारगेट : प्रतिनिधित्व या प्रतिशोध ? 

उन्होंने तथ्यों के साथ कांग्रेस को घेरते हुए प्रश्न किया—क्या हमारे समाज में एक भी योग्य नेतृत्व कांग्रेस को नजर नहीं आता? जब बात वोट की होती है तो कांग्रेस आदिवासियों के द्वार पर होती है, लेकिन जब राज्यसभा में सम्मान देने की बात आती है, तो पार्टी केवल गैर-आदिवासी चेहरों को चुनती है। पिछले तीन दशकों में एक भी आदिवासी नेता को संसद के उच्च सदन में न भेजना आदिवासियों के प्रति कांग्रेस की संकीर्ण मानसिकता का प्रमाण है।

भाजपा का 'सम्मान' बनाम कांग्रेस का 'उपेक्षा' 

श्री नर्रे ने निष्पक्ष तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस के पतन का मुख्य कारण आदिवासियों की उपेक्षा है। वहीं, भाजपा ने अनुसुइया उइके, डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और संपतिया उइके जैसे चेहरों को आगे बढ़ाकर 'अंत्योदय' का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि रानी कमलापति के गौरव को पुनर्स्थापित करना और देश को प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति देना सम्मान का प्रतीक है, जबकि कांग्रेस ने गोंडी भाषा और गोंडवाना राज्य की मांगों को सदैव ठुकराया है।

निर्णायक हुंकार: वही राज करेगा, जो सम्मान करेगा 

सत्ता के भविष्य का निर्णायक उद्घोष करते हुए कुंवर सुमित नर्रे ने कहा—मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री वही बनेगा और सरकार में वही दल टिकेगा, जो आदिवासी समाज के स्वाभिमान की रक्षा करेगी। जो दल आदिवासियों को राज्यसभा व कैबिनेट में उचित स्थान नहीं देगा, उसे गोंडवाना की जनता सत्ता से उखाड़ फेंकेगी। मैं रानी दुर्गावती का सिपाही और गोंडवाना का वंशज होने के नाते यह ऐलान करता हूँ कि अब और अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। यह लड़ाई केवल पद की नहीं, बल्कि 'नारे राजवंश' और संपूर्ण गोंडवाना के अस्तित्व और अस्मिता की है।

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