बिना अनुमति के बोरिंग रोकने जमीनी स्तर पर कड़ी कार्रवाई की सख्त आवश्यकता
जल संरक्षण वास्तव में प्रशासन चाहता है तो निगरानी सुनिश्चित करनी होगी
आखिर किनकी मिलीभगत से बिना अनुमति के बोर मशीनें हो रही संचालित?
उगली। गोंडवाना समय।
सिवनी जिले के जनपद पंचायत केवलारी अंतर्गत उपतहसील उगली क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा देने, जल की एक-एक बूंद को संरक्षित करने के लिये और जल संकट की गंभीर स्थिति के बीच अवैधानिक बोरवेल खनन लगातार जारी है। प्रशासन द्वारा जिले को जल अभावग्रस्त घोषित किए जाने के बावजूद बिना अनुमति के बोर मशीनों का संचालन होना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
रात के समय बोरिंग का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में रात के समय बोरिंग का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है। अंधेरे का फायदा उठाकर मशीनें लाई जाती हैं और सुबह होने से पहले ही बोरिंग पूरी कर ली जाती है। बोरिंग करने वाल बोरबेल के संचालकों के द्वारा धड़ल्ले से राजस्व विभाग को चढ़ोत्तरी चढ़ाये जाने की बातें कहना, भी विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किनकी मिलीभगत से बिना अनुमति के बोरबेल मशीनें संचालित हो रही हैं? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? प्रतिबंध के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में होने वाले बोरबेल मशीन के संचालन की जानकारी क्या ग्राम कोटवार, सरपंच, सचिव व अन्य प्रशासनिक ईकाई के जिम्मेदारों को नहीं होती है।
निगरानी के लिए ईमानदारों की विशेष टीम गठित की जाए
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि जहां एक ओर छोटे किसान यदि सार्वजनिक जल स्रोतों से सिंचाई करते हैं तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होती है, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों द्वारा नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध बोरिंग पर तत्काल रोक लगाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके तहत निगरानी के लिए ईमानदारों की विशेष टीम गठित की जाए, रात के समय नियमित गश्त बढ़ाई जाए तथा सीसीटीवी कैमरे एवं ड्रोन के माध्यम से सख्त नियंत्रण स्थापित किया जाए, ताकि अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
जल संरक्षण के लिये बोरबेल प्रतिबंध पर मुनादी कराकर दी जाये जानकारी
जल संरक्षण करने के लिये साथ ही गांव-गांव में मुनादी के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की भी मांग की गई है, ताकि बिना अनुमति बोर कराने वालों को इसके कानूनी परिणामों की जानकारी हो सके। इसके अलावा संबंधित विभागों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए जाएं, जिससे किसी भी स्थिति में अवैध बोरिंग न हो सके।
यदि वास्तव में प्रशासन चाहता है कि बिना अनुमति के बोरिंग बंद हो, तो जमीनी स्तर पर कड़ी कार्रवाई और ईमानदारी से निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। केवल आदेश जारी करने से स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं बरती गई, तो क्षेत्र में जल स्तर और तेजी से गिरेगा, जिससे आने वाले समय में भीषण जल संकट उत्पन्न हो सकता है।


