टेस्टिंग में ही टपकने लगी छिंदलई की नवीन पानी टंकी, जल जीवन मिशन की खुली पोल
जल जीवन मिशन की गुणवत्ता पर उठे सवाल, लोकार्पण से पहले जांच की मांग
ग्रामीणों ने लगाया विभाग-ठेकेदार की मिलीभगत का आरोप
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्राम पंचायत छिंदलई में बनाई गई नवनिर्मित पानी की टंकी अब लोकार्पण से पहले ही सवालों के घेरे में आ गई है।
लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई इस पानी टंकी में टेस्टिंग के दौरान ही रिसाव और सीपेज सामने आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई और विभागीय अधिकारियों की अनदेखी तथा ठेकेदार की मनमानी के कारण घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। साथ ही सूचना बोर्ड भी नजर नहीं आया है। जिसमें सभी लागत राशि कार्य प्रारंभ दिनांक सहीत अन्य सभी जानकारी का उल्लेख रहता है यही वजह है कि अभी टंकी का विधिवत संचालन शुरू भी नहीं हुआ और दीवारों से पानी रिसने लगा।
टेस्टिंग में खुली निर्माण कार्य की पोल
ग्रामीण बैगालाल बागेश्वर ने बताया कि जब पानी टंकी में परीक्षण के लिए पानी भरा गया, तब टंकी की दीवारों पर नमी और रिसाव साफ दिखाई देने लगा। टंकी के बाहरी हिस्से में गहरे व हल्के भूरे रंग के गीले धब्बे उभर आए,जिससे स्पष्ट हो गया कि निर्माण कार्य में कहीं न कहीं गंभीर खामियां हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि टेस्टिंग के दौरान ही यह स्थिति है,तोभविष्य में पूरी क्षमता से पानीभरने पर टंकी की हालत और खराब हो सकती है। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत के आरोप
गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना में भी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी हावी है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता की निगरानी करने वाले विभागीय अधिकारी केवल कागजों में निरीक्षण करते रहे, जबकि जमीनी स्तर पर ठेकेदार ने मनमाने तरीके से कार्य कराया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब निर्माण कार्य के दौरान नियमित तकनीकी जांच होनी चाहिए थी,तब आखिर अधिकारियों ने रिसाव जैसी गंभीर खामी को कैसे नजरअंदाज कर दिया? इससे विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत की आशंका और गहरा गई है।
गर्मी में पेयजल संकट फिर भी लापरवाही
क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। शासन द्वारा गांव-गांव शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यदि निर्माण कार्य इसी तरह घटिया स्तर का होगा तो योजना का लाभ ग्रामीणों तक कैसे पहुंचेगा, यह बड़ा सवाल बन गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि टंकी का लोकार्पण तत्काल रोका जाए तथा स्वतंत्र तकनीकी टीम गठित कर निर्माण कार्य की जांच कराई जाए। साथ ही दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई कर रिसाव की समस्या पूरी तरह दूर करने के बाद ही टंकी को उपयोग में लाया जाए।
ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में यह टंकी ग्रामीणों के लिए खतरा बन सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जनता के पैसों की बबार्दी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
जब नया मटका भरते हैं तो ऐसा ही पानी रिसाव होता है
वहीं जब इस संबंध में श्री विजय तिवारी एसडीओ पीएचई लालबर्रा से नवीन पानी टंकी से पानी रिसाव व सूचना बोर्ड नदारद को लेकर दूरभाष पर चर्चा किया गया तो उन्होंने कहा कि जब नया मटका भरते हैं तो ऐसा ही पानी रिसाव होता है। साइन बोर्ड लगायेंगे लेकिन साइन बोर्ड का प्रावधान नहीं था। वह यह योजना है जिसमें साइन बोर्ड का प्रावधान नहीं था।

