दीवार पर राजचिन्ह बना दिया, लेकिन गोंडवाना लिखने की स्याही खत्म हो गई
कमलेश गोंड, राष्ट्रीय संवाददाता
नैनपुर। गोंडवाना समय। नैनपुर स्थित राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह मरावी बालक शासकीय उत्कृष्ट सीनियर आदिवासी छात्रावास की दीवार पर गोंडवाना राज्य के राजचिन्ह का चित्रण तो किया गया, लेकिन उसके साथ गोंडवाना शब्द लिखने से परहेज किया गया। चित्र के नीचे मात्र राज्य चिन्ह लिखकर छोड़ देना कोई साधारण भूल नहीं है, बल्कि गोंडवाना की ऐतिहासिक पहचान, अस्मिता और स्वाभिमान को अधूरा दिखाने का प्रयास प्रतीत होता है।
विडंबना यह है कि छात्रावास के ठीक सामने माननीय एसडीएम महोदय का निवास स्थित है, फिर भी यह अधूरा कार्य किसी की नजर में नहीं आया। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर गोंडवाना नाम के प्रति जानबूझकर अपनाई गई उपेक्षा.... है ? जब गोंडवाना के अमर बलिदानी महायोद्धा राजा शंकर शाह मरावी और उनके वीर पुत्र रघुनाथ शाह मरावी के नाम पर छात्रावास संचालित है, तब गोंडवाना राज्य के राजचिन्ह के साथ गोंडवाना लिखने में आखिर संकोच क्यों.. है..?क्या इतिहास को केवल चित्रों तक सीमित कर दिया जाएगा और उसकी पहचान को छिपा दिया जाएगा?
ऐसा नहीं होगा...रंगों से चित्र बना देना पर्याप्त नहीं है , इतिहास को उसका नाम भी देना होगा। दीवार पर प्रतीक दिखाकर पहचान छिपाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। ताज्जुब की बात यह है कि राजचिन्ह बनाने में कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन गोंडवाना लिखने की बारी आई तो शायद स्याही खत्म हो गई। इतना ही नहीं, छात्रावास की दीवार पर केवल राजा शंकर शाह मरावी का चित्र प्रदर्शित करना भी अधूरा इतिहास प्रस्तुत करने जैसा है।
देश की स्वतंत्रता के लिए पिता राजा शंकर शाह मरावी और पुत्र रघुनाथ शाह मरावी दोनों ने एक साथ अंग्रेजी हुकूमत के सामने अपने प्राणों की आहुति दी थी। दोनों को तोप के मुंह से बांधकर शहीद किया गया था। इसलिए जिस छात्रावास का नाम दोनों महान बलिदानियों के नाम पर है, वहां दोनों वीरों को समान सम्मान और स्थान मिलना चाहिए।
प्रशासन 24 जून 2026 के पहले छात्रावास की दीवार पर की गई अधूरी पेंटिंग को तत्काल पूर्ण कराया जाए, गोंडवाना राज्य के राजचिन्ह के साथ उसकी वास्तविक पहचान स्पष्ट रूप से अंकित की जाए तथा राजा शंकर शाह मरावी और रघुनाथ शाह मरावी दोनों के चित्र सम्मानपूर्वक प्रदर्शित किए जाएं।
अन्यथा हम गोंडवाना के लोग इस सांस्कृतिक उपेक्षा और ऐतिहासिक असम्मान के विरोध में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने को बाध्य होंगे। क्योंकि गोंडवाना कोई मात्र शब्द नहीं है, यह हमारी पहचान, हमारा इतिहास, हमारा स्वाभिमान और हमारे पुरखों के बलिदान की विरासत है। इसे मिटाने, छिपाने या अधूरा दिखाने की हर कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा।