झाबुआ पॉवर प्लांट अपने अनुबंध की शर्तों से मुकरने के साथ ही कर रहा अन्याय
20 एकड़ जमीन झाबुआ पावर प्लांट में गई लेकिन परिवार के सदस्य को नहीं मिला रोजगार
घंसौर। गोंडवाना समय।
सिवनी जिले में आदिवासी बाहुल्य विकासखंड घंसौर के अंतर्गत स्थित बरेला (घंसौर) क्षेत्र में स्थापित झाबुआ पॉवर प्लांट को लेकर क्षेत्रिय ग्रामीणों ने विरोध का मोर्चा खोल दिया है।
बीते 26 सितंबर 2026 से प्रारंभ हुये विरोध धरना प्रदर्शन का स्वरूप 2 अक्टूबर 2026 से बदलकर क्रमिक भूख हड़ताल के रूप में बदलकर प्रांरभ भी हो गया है।
ग्रामवासी एवं आंदोलनकारियों की मांग है कि झाबुआ पावर लिमिटेड (एनटीपीसी) बरेला संयंत्र के द्वारा प्रभावित क्षेत्र की गंभीर बुनियादी समस्याओं का समाधान कराने की ओर कोई पहल नहीं किया जा रहा है। झाबुआ पॉवर प्लांट की स्थापना के समय प्रभावित क्षेत्र और समाज के सर्वांगीण विकास के लिये जो वादे किए गए थे, वे आज भी अधूरे हैं।
इसके विरोध में झाबुआ पॉवर प्लांट के समीप क्षेत्रीय संघर्ष समिति के द्वारा क्रमिक भूख हड़ताल प्रारंभ की गई है। जिसमें प्रमुख रूप से जिला पंचायत सदस्य शिवांगी रामस्वरूप उइके, पप्पू मरावी, शनि उइके, जितेंद्र नेमा, कामता प्रसाद तिवारी, चमार सिंह कुर्याम, रामकुमार धार्मिक, ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सभी ग्रामीण क्षेत्रवासी शामिल हो रहे है।
तो उन्हें मजदूर वर्ग का दिया जा रहा रोजगार
क्षेत्रीय ग्रामीण रामकुमार धार्मिक ने जानकारी देते हुये बताया कि झाबुआ पॉवर प्लांट के विरोध में क्षेत्रीय संघर्ष समिति बनाई गई है। जिसमें सभी प्रभावित ग्रामों के लगभग 10 ग्राम पंचायत का क्षेत्र इससे प्रभावित है। झाबुआ पॉवर प्लांट प्रबंधन के द्वारा रोजगार, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क आदि क्षेत्र के विकास के लिये वायदा किया गया था। वहीं जिनकी जमीन गई उन्हें भी रोजगार भी नहीं दिया जा रहा है।
इसके साथ यदि रोजगार भी दिया जा रहा है तो उन्हें मजदूर वर्ग का रोजगार दिया जा रहा है। झाबुआ पॉवर प्लांट प्रबंधन के द्वारा हमारे साथ अन्याय किया जा रहा है। झाबुआ पावर प्लांट प्रबंधन को क्षेत्रवासियों की मांगों को पूरा करना चाहिये एवं क्रमिक भूख हड़ताल को समाप्त कराने में भूमिका निभाना चाहिये।
गांधी जयंति के अवसर पर भूख हड़ताल प्रारंभ
क्षेत्रीय ग्रामीण दुर्जनपुर निवासी दौलत रजक ने जानकारी देते हुये अनशन स्थल से बताया कि झाबुआ पावॅर प्लांट दुर्जनपुर का निवासी हूं।
झाबुआ पॉवर प्लांट प्रबंधन ने कार्य प्रारंभ करने के पूर्व यह कहा था कि सीएसआर के माध्यम से क्षेत्र में मूलभूत आवश्यकताओं के कार्य करायेंगे। झाबुआ पॉवर प्लांट अपने अनुबंध की शर्तों से मुकर रहा है। गांधी जयंति के अवसर पर भूख हड़ताल प्रारंभ की गई है।
पलायन करने को मजबूर है बच्चे
नेतराम भलावी गोरखपुर निवासी पूर्व सरपंच भी रहे है उन्होंने बताया कि हमारी 20 एकड़ जमीन पावर प्लांट में गई है। इसके बाद भी हमें पर्याप्त आर्थिक मुआवजा भी नहीं मिला। वहीं हमारे बच्चों को कोई रोजगार नहीं दिया गया है। हमारे बच्चे रोजगार के लिये पलायन करने को मजबूर है। हम झाबुआ पॉवर प्लांट जाते है तो वहां पर हमें आज आना कल आना कहकर टाला जाता है।
यह धरना प्रदर्शन विशाल जनसमुह के रूप में सामने आयेगा
शिवांगी उइके जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि 26 सितंबर 2026 से धरना प्रारंभ किया गया था। इसके बावजूद भी झाबुआ पॉवर प्लाँट द्वारा हमारे मांगों को अनसुना किया गया है। कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
झाबुआ पॉवर प्लाँट प्रबंधन एवं शासन प्रशासन की मनमानी के चलते हमारे द्वारा 2 अक्टूबर 2026 से क्रमिक भूख हड़ताल प्रारंभ कर दिया गया है। यदि शीघ्र ही हमारी मांगों पर संज्ञान नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों यह धरना प्रदर्शन विशाल जनसमुह के रूप में सामने आयेगा।







