भाजपा के पदाधिकारी ही झाबुआ पावर प्लांट के सामने नतमस्तक-गोंगपा
गोंगपा नेता मनीराम काकोड़िया ने उठाये सत्ता-शासन को कटघरे में किया खड़ा
घंसौर/सिवनी। गोंडवाना समय।
आदिवासी विकासखंड घंसौर के ग्राम बरेला में स्थापित झाबुआ पावर प्लांट लिमिटेड द्वारा आसपास की ग्राम पंचायतों में सीएसआर के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अनुबंध किया गया था, जो समाचार पत्रों में पूर्व में प्रकाशित भी हुआ था, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है।
ग्रामीणों के साथ धरना दे रहे भाजपा पदाधिकारी
इसी को लेकर दिनांक 26 सितंबर 2026 से झाबुआ पावर प्लांट के मुख्य गेट के सामने भाजपा के जिला मंत्री, युवा मोर्चा विधानसभा प्रभारी, सांसद प्रतिनिधि एवं अन्य जनप्रतिनिधि क्षेत्रीय ग्रामीणों के साथ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन, कुपोषण और शोषण की समस्या जस की तस बनी हुई है। जब सत्ता पक्ष के पदाधिकारी ही सरकार द्वारा स्थापित उद्योग और उसकी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर धरना देने को बाध्य हों, तो यह स्पष्ट है कि सरकार अपनी दिशा से भटक गई है।
यदि यही स्थिति रही तो आगामी त्रि-स्तरीय पंचायत एवं विधानसभा चुनाव 2028 में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। घंसौर जैसे बहुल्य आदिवासी क्षेत्र की जनता यदि जागरूक हुई तो यह गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के लिए सुनहरा अवसर रहेगा।
2028 के चुनाव में जनता इसका जवाब देगी-मनीराम काकोड़िया
गोंगपा नेता मनीराम काकोड़िया ने बताया कि बरेला स्थित झाबुआ पावर प्लांट ने सीएसआर के तहत विकास का वादा किया था, पर जमीन पर कुछ नहीं हुआ। इसी कारण 26 सितंबर 2026 से भाजपा के जिला मंत्री और सांसद प्रतिनिधि सहित जनप्रतिनिधि खुद प्लांट के गेट पर ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे हैं। जब सत्ता पक्ष के लोग ही अपनी सरकार के उद्योग के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर हों, तो समझिए आदिवासी क्षेत्रों की हकीकत क्या है। बरेला झाबुआ पावर प्लांट द्वारा सीएसआर के वादे पूरे न करने पर भाजपा पदाधिकारी ही 26 सितंबर से ग्रामीणों के साथ मुख्य गेट पर धरने पर है वहीं आदिवासी विकास के दावे खोखले है।



