जनजाति आयोग के पत्रों पर गंभीरता नहीं दिखा रहे जांच अधिकारी कर्मचारी
पोतलई और सोनाडोंगरी में जनजातियों की जमीनों के लुटरों को दिया संरक्षण
सिवनी जिले में जनजाति वर्ग के अन्याचारों पर गंभीरता से नहीं होती कार्यवाही
सिवनी। गोंडवाना समय।
जनजाति वर्ग की जमीनों की भूमाफियाआें के द्वारा की जाने वाली लूट, जनजाति वर्गों के साथ होने वाले अन्याय, अत्याचारों, शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वालों को जब स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिलता है और अत्याचारियों को संरक्षण मिलता है।
ऐसी स्थिति में जनजाति आयोग के शरण में जनजाति वर्ग का सदस्य न्याय पाने की उम्मीद से जाता है। वहीं जनजाति आयोग के द्वारा भी पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिये पत्र लिखा जाता है और कार्यवाही हेतु निर्देशित किया जाता है।
भूमाफियाओं के हौंसले बुलंद होते है
जनजाति आयोग के द्वारा लिखे गये अधिकांश पत्रों में जो समय सीमा निर्धारित की जाती है। इसके साथ ही अधिकांशतय: जिस विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत व सांठगांठ से जनजाति वर्ग की जमीन भूमाफियाओं के द्वारा लूटी जाती है उन्हीं को जांच व कार्यवाही के संबंध में जिम्मेदारी दे दी जाती है।
अब जब जनजाति वर्ग की जमीन को जिन भूमाफियाओं के द्वारा राजस्व व अन्य विभाग के कर्मचारियों की सांठगांठ से लूटी जाती है उन्हें जांच की जिम्मेदारी दी जायेगी तो कैसे जनजाति वर्ग को न्याय मिलेगा। वरन भूमाफियाओं के हौंसले बुलंद होते है।
मूर्ख बनाकर लाभ कमा रहा सूरज वर्मा
जनजाति बाहुल्य जिला सिवनी में अधिसूचित क्षेत्र कुरई ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पोतलई में जनजाति वर्ग की जमीन को सूरज वर्मा, अशोक वर्मा, रजिस्ट्रार कार्यालय सिवनी और पोतलई ग्राम के तात्कालीन पटवारी और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से लगभग ढाई एकड़ से अधिक जमीन पर सूरज वर्मा ने 26 वर्षों से शासन, प्रशासन व ग्राम के पटवारी की सांठगांठ खेती करके लाखों रूपये कमा चुका है।
अवैधानिक रूप से सूरज वर्मा आज भी पढ़े लिखे अधिकारियों व कर्मचारियों की आंखों में धूल झौंककर मूर्ख बनाकर लाभ कमा रहा है। इस संबंध में जनजाति वर्ग का पीड़ित परिवार न्याय पाने के लिये जनजाति आयोग के शरण में पहुंचा और जनजाति आयोग नई दिल्ली ने पत्र भी लिखा लेकिन कार्यवाही करने वाले संबंधित विभाग के कर्मचारियों के द्वारा गंभीरता से उक्त प्रकरण पर संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।
जनजाति वर्ग की जमीन लूटने वाला सूरज वर्मा को ही सही बताया जा रहा है। इस मामले में ग्राम पोतलइ के जो भी पटवारी पूर्व में रहे है और वर्तमान में है उन्हें पूरे प्रकरण की जानकारी है। वहीं कुरई तहसील के पूर्व के अधिकारियों व कर्मचारियों को जानकारी है।
सोनाडोंगरी में भी जनजाति वर्ग की जमीन हड़पने की साजिश हुई
सिवनी तहसील व बण्डोल थाना क्षेत्र के ग्राम सोनाडोंगरी में भी राष्ट्रीय राजमार्ग की जमीन को गैर आदिवासी वर्ग के द्वारा सिवनी कलेक्टर कार्यालय से खरीदने के लिये ली गई अनुमति में जिस तरह से फर्जीवाड़ा किया गया है। वहीं हकीकत स्वयं अनुमति के दस्तावेज ही सत्य उगल रहे है। भूमाफियाआें को संरक्षण व सांठगांठ के कारण जनजाति वर्ग की जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई है।
औने पौने दामों में खरीदकर अब करोड़ों में बेचने की तैयारी है। सोनाडोंगरी में जनजाति वर्ग की जमीन को खरीदने के बाद विक्रेता की मृत्यू हो चुकी है। जिसकी जानकारी परिवार को बाद में मिली तो बेवा पत्नि ने शिकवा शिकायत किया है।
वहीं जनजाति आयोग में भी शिकायत किया है। जनजाति आयोग के द्वारा सोनाडोंगरी के मामले में कार्यवाही हेतु लिखे गये पत्र के बाद क्या कार्यवाही हुई, कब कार्यवाही हुई और जांच की जिम्मेदारी उन्हें ही दी गई जिन्होंने भूमाफियाओं को संरक्षण दिया, जहां से अनुमति मिली।
