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नक्शा-खसरा के लिए दो हजार रूपए मांगने वाले पटवारी को जेल

नक्शा-खसरा के लिए दो हजार  रूपए मांगने वाले पटवारी को जेल

न्यायालय से चार साल की सुनाई गई सजा

सिवनी। गोंडवाना समय।
जिला अदालत के विशेष न्यायाधीश राजऋषि श्रीवास्तव ने भ्रष्टाचार में लिप्त एक पटवारी को चार साल के लिए जेल भेज दिया है। मंगलवार दोपहर प्रकरण में सुनवाई के बाद दिए गए फैसले में कोर्ट ने खसरा, नक्शा व नामांतरण के बदले रिश्वत लेते पकड़े गए छपारा के पटवारी दिनेश वाडिवा को (38) को चार साल जेल और 10 हजार रुपए के जुमार्ने से दंडित किया है।
                     विशेष लोक अभियोजक दीपा मर्सकोले ने अभियोजन के संबंध में बताया कि छपारा तहसील के हल्का पटवारी क्र 32 व 24 में पदस्थ पटवारी दिनेश वाडिवा को लोकायुक्त दल जबलपुर ने एक जून 2015 को छपारा तहसील के एक कमरे में फरियादी संतकुमार परते से 1000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
                 इंदिरा आवास बनाने में लगा रहा था अड़ंगा विशेष लोक अभियोजक दीपा मर्सकोले ने बताया कि भ्रष्टाचार में लिप्त पटवारी दिनेश वाडिवा छपारा के ढुलबजा गांव निवासी संतराम परते की जमीन का खसरा व नकल निकालने तथा नामांतरण करने के बदले दो हजार रूपए की रिश्वत मांग रहा था।  पटवारी एक हजार रूपए फरियादी से पहले ही ले चुका था। दूसरी किश्त लेते हुए लोकायुक्त ने पटवारी को गिरफ्तार  किया था। ससुर से दान में मिली जमीन पर इंदिरा आवास योजना के तहत घर बनाने 75 हजार रुप्ए की राशि फरियादी ने स्वीकृत कराई थी। लेकिन पटवारी इसके लिए जमीन का खसरा नक्शा नहीं दे रहा था।
               कोर्ट ने रिश्वतखोर पटवारी दिनेश वाडिवा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, में तीन साल जेल और 5 हजार जुमार्ने की सजा सुनाई है जबकि धारा 13 (1) (डी) में कोर्ट ने आरोपित को चार साल कैद और 5 हजार अर्थदंड से दंडित किया है। प्रकरण में शासन की ओर से जिला लोक अभियोजक दीपा मर्सकोले द्वारा पैरवी की गई।
             कार्यप्रणाली में नहीं आया बदलाव  छपारा तहसील में कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त टीम के पहुंचते ही हड़कंप मच गया था। दफ्तर में मौजूद  अन्य पटवारी, आरआई व कर्मचारी दफ्तर से भाग निकले थे। पिछले कुछ सालों में लोकायुक्त कई पटवारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़कर जेल की सलाखों के पीछे भेज चुका है। इसके बावजूद पटवारियों की कार्यप्रणाली में बदलाव नहीं आया है और जिले में कई ऐसे पटवारी हैं जो अभी भी बिना पैसे लिए कोई काम नहीं कर रहे हैं।

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