Thursday, January 30, 2020

13 साल बाद हुई पीएससी की सचिव रेणू पंत की विदाई!

13 साल बाद हुई पीएससी की सचिव रेणू पंत की विदाई!

इंदौर। गोंडवाना समय। 
मध्य प्रदेश लोक सेवा में आयोग में 12 जनवरी 2020 को पूछे गये भील जनजाति को लेकर सवाल पर मध्य प्रदेश ही नहीं देश भर के जनजाति समुुदाय के आक्रोश और जनजाति संगठनों के साथ साथ जयस के द्वारा इंदौर की सड़कों से लेकर पुलिस कार्यालयों में पहुंचकर कार्यवाही की आवाज उठाना और जयस कार्यकर्ता रविराज बघेल के द्वारा अजाक थाना में जिम्मेदारों की नामजद एफआईआर के लिये शिकायत देकर प्रकरण दर्ज कराने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही भील जनजाति के अपमान के मामले में व्यापम का मुद्दा उठाने वाले डॉ आनंद राय ने भी शुरूआत से ही इस मामले में सरकार के संज्ञान में लाने में हर स्तर पर प्रयास किया। जनप्रतिनिधियों में भी जयस के राष्ट्रीय संरक्षक मनावर के विधायक डॉ हीरालाल अलावा के साथ साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री व विधायक कांतिलाल भूरिया ने विधानसभा के सदन में भील जनजाति के मामले में मुखरता के साथ अपनी बात रखा और मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ से कार्यवाही की मांग किया था। वहीं सरकार और कुछ नौकरशाह के प्रारंभिक संरक्षण के चलते बिना नाम पता यानि अज्ञात के रूप में अजाक थाना में एफआईआर तो दर्ज हुई लेकिन बचाव के लिये सम्माननीय न्यायालय की चौखट से राहत भी मिली और सुनवाई भी चल रही है। सम्माननीय न्यायालय का निर्णय क्या आयेगा यह भविष्य में सामने आयेगा।

श्रीमती रेणू पंत अब ये संभालेंगी जिम्मेदारी 

वहीं मध्य प्रदेश सरकार ने भाजपा के राज से ही लगभग 13 वर्षों से पीएससी में जमी हुई पीएससी की सचिव रेणू पंत जी की विदाई कर दिया है और मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव श्री सुधि रंजन मोहन्ती के द्वारा मध्य प्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय के द्वारा 30 जनवरी 2020 को आदेश के तहत श्रीमती रेणू पंत भाप्रसे (2000) विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी-सह-सचिव मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग इंदौर को अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक स्थानापन्न विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी मध्य प्रदेश मंत्रालय पदस्थ किये जाने का जारी किया है। वहीं इनके स्थान पर श्री दिनेश जैन भाप्रसे (2011) अपर कलेक्टर जिला इंदौर को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ साथ अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक सचिव मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग इंदौर का प्रभार अतिरिक्त रूप से सौंपा जाने का आदेश जारी किया गया है।

प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत की महत्वपूर्ण कविता का जाने क्या है अर्थ  

आजादी के लिये अंग्रेजों के साथ संघर्ष करने का भील जनजाति का महत्वपूर्ण स्थान है और अपना प्रमुख स्थान इतिहास में आज भी संजोये हुये है लेकिन बीते 12 जनवरी 2020 को मध्य प्रदेश के पीएससी में पूछे गये भील जनजाति पर पूछे गये प्रश्न ने कई सवाल छोड़ा और भील जनजाति को अपना संघर्षमय इतिहास बताने के लिये सड़कों पर तक उतरना पड़ा। इसके लिये मध्य प्रदेश के सिर्फ जनजाति समुदाय ने ही आवाज नहीं उठाई बुद्धिजीवि समाजिक संघर्ष में अपनी आवाजों को हमेशा बुलंद करने वाले कुछेक समाजिक कार्यकर्ताओं ने आगे आकर पीएससी की परीक्षा में भील जनजाति को लेकर पूछे गये सवाल पर सरकार, शासन-प्रशासन को हर स्तर पर जिम्मेदारों पर कार्यवाही करने के लिये मजबूर कर दिया। अब यदि हम बात करें हिंदी के प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत की रचित कविता भारतमाता ग्रामवासिनी भारत और भारतवासियों की दशा का वर्णन करती है। इस कविता का उद्देश्य ये स्पष्ट करना है कि असली भारत तो गांवों में निवास करता है परन्तु भारत के गांवों में बसने वाले उन ग्रामीणों की दशा अत्यन्त दयनीय है। उनके पास पहनने को पर्याप्त वस्त्र नही, खाने को भरपेट भोजन नही, वो अशिक्षित हैं, भोले-भाले हैं, पीड़ित और शोषित हैं, उनको सदैव दबाया जाता रहा है। कवि ये स्पष्ट करना चाहते है कि भारतमाता के असली स्वरूप को देखना है तो भारत के गांवों में जाओं और भारतमाता इन ग्रामीणों के रूप में है पर भारतमाता प्रवासिनी बन कर रह गयी है क्योंकि अपने ही देश में उसको इन ग्रामीणों के रूप में सताया जाता रहा है। अंग्रेजों ने इनको प्रताड़ित किया लेकिन त्याग, बलिदान, संघर्ष से अंग्रेजों को भगा दिया गया है। इस कविता में कवि में गुलाम भारत के निवासियों की स्थिति और अपनी आजादी के लिये किये गये प्रयासों का चंद पंक्तियों के माध्यम से भारतमाता की असली संतानों की संघर्षशीलता का महत्व बताया है।

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