Sunday, February 9, 2020

बीज को पारंपरिक तरीके से सुरक्षित रखने वीजा बैंक की स्थापना

बीज को पारंपरिक तरीके से सुरक्षित रखने वीजा बैंक की स्थापना 

कोया भूमकाल क्रांति सेना व पांरपरिक ग्राम सभा कर रहा देशी बीज बैंक तैयार

विशेष संवाददाता 
तामेश्वर सिन्हा
कांकेर। गोंडवाना समय। 
चलो बटोरें अवशेषों को, फिर एक नई उड़ान भरें, आज झुका दे अम्बर को भी, अब ऐसी हुंकार भरें। कुछ ऐसे ही इरादे को लेकर छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला अन्तर्गरत सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार प्राप्त (सीआरएफ) गाँव खैरखेड़ा में कोया भूमकाल क्रांति सेना और पांरपरिक ग्राम सभा द्वारा देशी बीज बैंक तैयार किया है। यहां पर देश में विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए बीज संरक्षित किए गए हैं ताकि भविष्य में उन्हें उपयोग में लाया जा सके।

पारंपरिक बीज बहुत ही तेजी से होते जा रहे विलुप्त 

इस बीज बैंक को वीजा बैंक का नाम दिया गया है। बीज को गोंडी भाषा मे वीजा बोला जाता है। कोया भूमकाल क्रांति सेना के एक सदस्य संदीप सल्लाम बताते है किवीजा बैंक में अभी हमारे पास 100 प्रकार से अधिक बीज मौजूद है। इन बीजो की खासियत यह है कि यह पारंपरिक बीज है जो अनेक बीमारियों के इलाज में भी काम आता है। जैसे कि कोदो, कुटकी यह बीज छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना, महाराष्ट्र, उड़ीसा, मध्यप्रदेश से बीजो को संरक्षित किया गया है। संदीप सल्लाम आगे बताते है कि हम सभी देख रहे हैं कई बीज जो विलुप्ति के कगार पर है। पारंपरिक बीज बहुत ही तेजी से विलुप्त होते जा रहे है। यदि हाल रहा तो आने वाले समय में पारम्परिक बीज देखने को नहीं मिलेगी। हमें पता है आने वाले समय में पारम्परिक बीजों का महत्व कितना रहेगा, इसलिए इस बीज को संरक्षण के लिए वीजा बैंक स्थापित किया गया है। इस बीज को पारंपरिक तरीके से वीजा बैंक में सुरक्षित रखा गया है।

धान की करीब 17 हजार किस्में और उप किस्मों को सूचीबद्ध किया 

हम आपको बता दे कि भारत में जाने माने कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.एच. रिछारिया ने काफी श्रम से धान की करीब 17 हजार किस्में और उप किस्मों को सूचीबद्ध किया था, जिसे छत्तीसगढ़ में संरक्षित रखा गया है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.एच. रिछारिया ने स्थापित किया था कि देसी किस्मों में हरित क्रांति की किस्मों से कम ताकत नहीं रही है। हरित क्रांति की बौनी किस्मों और उससे जुड़ी तकनीक को भी उन्होंने चुनौती दी थी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.एच. रिछारिया ने किसानों और आदिवासियों की मदद से जो किस्में जुटाईं, जिसमें से नौ फीसदी ऐसी थीं जो बिना रासायनिक खादों के उपयोग के बहुप्रचारित बौनी किस्मों जितना उत्पादन देने की क्षमता रखती थीं। उनकी राय थी कि ऐसी किस्मों को ही भारत में धान की खेती का मुख्य आधार बनाना चाहिए लेकिन देसी बीजों को संरक्षित करने का काम सीमित आधार पर ही हो पाया।

इन बीजों को बांस के खोल में रखा जा रहा है

दरसल यह वीजा बैंक इसलिए खास है क्योंकि सीआरएफ के तहत खैरखेड़ा ग्राम को अधिकार पत्र मिला है, वहां की ग्राम सभा वीजा बैंक का निर्माण कर एक विशाल बीज बैंक तैयार कर देशी बीजो के संरक्षण की ओर अग्रसर है। इन बीजों को बांस के खोल में रखा जा रहा है। खेरखेड़ा में बने वीजा बैंक में दूर-दराज से अनेक किस्मो के देशी बीज आने का सिलसिला लगातार जारी है।

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