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पेंच टाईगर रिजर्व कर्मझिरी वन क्षेत्र में 10 वर्षीय बाघ मृत

पेंच टाईगर रिजर्व कर्मझिरी वन क्षेत्र में 10 वर्षीय बाघ मृत 

जलाशय के पास निस्तेज अवस्था में गश्ती के दौरान दिखा 

सिवनी। गोंडवाना समय। 
पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी के कोर परिक्षेत्र कर्माझिरी के वनक्षेत्र में 3 अप्रैल 2020 को गश्ती के दौरान एक जलाशय के पास एक नर बाघ (टी-21) उम्र लगभग 10 वर्ष को निस्तेज अवस्था में लेटा हुआ पाया गया। इसकी सूचना तत्काल संबंधित स्टॉफ के द्वारा परिक्षेत्र अधिकारी, कर्माझिरी के माध्यम से क्षेत्र संचालक, उप संचालक एवं वन्यप्राणी चिकित्सक को दी गयी। दूरभाष पर ही इस संबंध में परिक्षेत्र अधिकारी कर्माझिरी को लगातार निगरानी करने के निर्देश तत्समय ही क्षेत्र संचालक द्वारा दे दिये गये। मौके पर क्षेत्र संचालक विक्रम सिंह परिहार, उप संचालक श्री एम.बी. सिरसैया एवं वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा ने रेस्क्यू टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर हाथियों से एवं पैदल भी उसे देखा गया, अत्यधिक कमजोर एवं बीमार दिखा। 

बाघ ने 4 अप्रैल को सुबह के समय त्याग दिये प्राण 

अधिकाशंत: वह पानी के अंदर ही रहा, बहुत प्रयास करने के बाद ही पानी से बाहर निकला। उस दौरान दिख रहे लक्षणों के अनुसार बाघ को डार्ट द्वारा दवाई देकर इलाज किया गया। इस कार्यवाही के पूर्ण होने में लगभग 6 घंटे का समय लगा। शाम को एवं रात्रि में भी बाघ की निगरानी की गयी। वह जलाशय के पास ही रहा। अगले दिन, दिनांक 04 अप्रेल 2020 को प्रात: सुबह 5 बजे से स्टाफ के द्वारा निगरानी की गयी, किन्तु इन सब प्रयासों के बावजूद बाघ टी 21 ने दिनांक 04 अप्रेल 2020 को सुबह लगभग 8.55 मिनट पर अपने प्राण त्याग दिये। 

शव परीक्षण कर अन्वेषण हेतु सेम्पल संरक्षित किये गये

इसके उपरांत तत्काल ही एन.टी.सी.ए. के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यप्राणी एवं अन्य को सूचना दी गयी तथा एन.टी.सी.ए. के क्षेत्रीय कार्यालय नागपुर के अधिकारी श्री हेमंत कामड़ी की उपस्थिति में एवं क्षेत्र संचालक तथा उप संचालक के समक्ष वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा एवं पशु चिकित्सक डॉ. मृणालनी के द्वारा शव परीक्षण किया गया एवं प्रयोगशाला में अन्वेषण हेतु सेम्पल संरक्षित किये गये। 

सभी अवयव पंजे, नाखुन एवं दांत पूरी तरह से सुरक्षित थे

मृत बाघ के सभी अवयव पंजे, नाखुन एवं दांत पूरी तरह से सुरक्षित थे। मृत बाघ के शरीर पर किसी भी तरह के घाव, गोली के निशान, फंदे के निशान आदि नहीं थे। शव परीक्षण उपरांत सभी के समक्ष बाघ को पूरे अवयवों के साथ (संरक्षित सेम्पलों को छोड़कर) दाह संस्कार किया गया।

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