Thursday, June 11, 2020

काले-गोरे का फर्क

काले-गोरे का फर्क

रचना-
राजा रावेन राज तिलक धुर्वे।
गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन इंडिया 
अमेरिका व वर्तमान परिदृश्य में घटित हालिया विश्वव्यापी घटना में नस्लभेदी मानसिकता होने के कारण मैनुएल एलिस और जॉर्ज फ्लॉयड एवं ऐसे ही अन्यों को जो इस व्यवस्था से पीड़ित हैं, विश्व में सभी भेदभाव पूर्ण जीवन जी रहें लोगो को गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन की ओर समर्पित ये कविता। प्रकृति की तरफ से मानव के लिए सन्देश को कुछ शब्दों में सहेजने का प्रयास हैं।

क्यों ? काले-गोरे का तूमने है फर्क बनाया,
इंसान को इंसानियत का हैं दुश्मन बनाया।
मैंने तो यहां केवल इंसान था बनाया,
तूमने ना जाने कितनो को शैतान बनाया।
क्यों ? काले-गोरे का तूमने है फर्क बनाया।
अरे वह भी इंसान हैं, तूम भी इंसान हो,
फिर तुमने इस अंतर को भला क्यों अपनाया।
अपने फायदे के लिए तुमने जाति-धर्म बनाया,
किसी को ऊंचा तो किसी को नीचा बनाया।
मैंने तो नदी पर्वत पहाड़ जंगल बनाया,
और तूमने असला बम बारूद  हथियार बनाया।
अपने ही देश के लोगों में नफरत बढ़ाया,
और अधिकार मांगने वाले को गोली से उड़ाया।
तुमने देश में अपनी सत्ता का गलत फायदा उठाया,
अपनी बात कहने वालो को मारा और गला दबाया।
मैंने तो तुम्हें मानवता-प्रेम का पाठ था पढ़ाया,
पर तुमने छल कपट लालच कहां से पाया।
मानव ने खुद को मानवता का कातिल बनाया,
क्यों? काले-गोरे का तुमने है फर्क बनाया।


रचना-
राजा रावेन राज तिलक धुर्वे।
गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन इंडिया 

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