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Tuesday, December 1, 2020

नियमित दवा लेकर जिया जा सकता है स्वस्थ्य जीवन-डॉ के. सी. मेश्राम

नियमित दवा लेकर जिया जा सकता है स्वस्थ्य जीवन-डॉ के. सी. मेश्राम 

वर्ल्ड एड्स दिवस के अवसर पर आयोजित हुई कार्यशाला

एआरटी केन्द्र में कुल 2180 एचआईवी पॉजिटिव मरीज पंजीकृत


सिवनी। गोंडवाना समय। 

विश्व एड्स दिवस के अवसर पर जिला एड्स नियंत्रण समिति द्वारा प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार जिले में विविध कार्यक्रमों का मंगलवार 1 दिसंबर 2020 को आयोजन किया गया। आईसीटीसी केंद्र के परामर्शदाता श्री अशोक गौवंशी ने बताया कि मुख्य कार्यक्रम जिला चिकित्सालय सिवनी में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. के.सी. मेश्राम, जिला एड्स कंट्रोल सोसायटी के नोडल अधिकारी डॉ. जयज काकोडिया, श्री दिनेश चौहान (जिला कार्यक्रम प्रबंधक) एनएचएम, दीपिका ताराम (जिला विधिक सहायता अधिकारी) ने संबोधित किया। 

इस बार की थीम वैश्विक एकजुटता एवं सांझा जिम्मेदारी रखी गई


कार्यशाला में सीएमएचओ डॉ. के.सी. मेश्राम ने कहा कि एचआईवी एड्स से पीड़ित व्यक्ति यदि नियमित रूप से एआरटी की दवाई लेता है एवं परामर्श के अनुसार अपनी दिनचर्या बनाये रखता है तो वह स्वस्थ व्यक्तियो की तरह पूरा जीवन जी सकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एआरटी केन्द्र में कुल 2180 एचआईवी पॉजिटिव मरीज पंजीकृत है, इसमें 8 गर्भवती महिलाएं है। एड्स एक ऐसी बीमारी है, जिसमें इंसान की संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। इस बार की थीम वैश्विक एकजुटता एवं सांझा जिम्मेदारी रखी गई है। वर्ष 1959 में अफ्रीका के कॉन्गो में एड्स का पहला मामला सामने आया था, जिसमें कि एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। जब उसके रक्त की जांच की गई तो पुष्टि हुई कि उसे एड्स है। वर्ष 1986 में यह बीमारी भारत आई।

एचआईवी पीड़ित को टीबी होने की भी संभावना

जिला एड्स नियंत्रण कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. जयज काकोडिया ने बताया कि एचआईवी पीड़ित व्यक्ति को टीबी होने की संभावना भी बहुत अधिक होती है। एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति जो दवाइयां समय पर नहीं लेते हैं या बीच में छोड़ देते है उनको वापस मुख्य धारा में जोड़ने का कार्य किया जाता है ताकि मरीज समय पर दवाई ले सके और एक अच्छा जीवन जी सके। एड्स के उपचार में एंटी रेट्रोवाईरल थेरपी दवाईयों का उपयोग किया जाता है। इन दवाइयों का मुख्य उद्देश्य एचआईवी के प्रभाव को काम करना, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना और अवसरवादी रोगों को ठीक करना होता है। समय के साथ-साथ वैज्ञानिक एड्स की नई-नई दवाइयों की खोज कर रहे हैं लेकिन अभी तक एड्स से बचाव ही एड्स का बेहतर इलाज है। हमारे कर्मचारियों द्वारा एचआईव्ही मरीजो की गोपनीयता का पूरा ख्याल रखा जाता है।

नि:शुल्क अधिवक्ता कराया जाता है उपलब्ध 

कार्यशाला में दीपिका ताराम (जिला विधिक सहायता अधिकारी ने जानकारी देते हुये बताया कि एचआईव्ही संक्रमित मरीजो के विधिक अधिकारों का अगर उल्लंघन होता है तो वे हमारे माध्यम से न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत कर सकते है। इसके लिये हमारे द्वारा नि: शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। 

प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न कार्यक्रम अतिथियों द्वारा प्रदान किए गए

एड्स विषय पर कम्युनिटी हेल्थ आॅफिसर, जिले में संचालित एफआईसीटीसी के कर्मचारी गण, एआरटी सेंटर,आईसीटीसी,एसटीआई क्लीनिक का स्टाफ एवं विहान, आहान और जंय मंगल संस्थान के कार्यकर्ता सहित अस्पताल प्रबंधन के कर्मचारी मौजूद थे। जिसमें एड्स विषय पर भाषण, संगोष्ठी, प्रश्नोत्तरी, प्रशस्ति प्रत्र, स्मृति चिन्ह समेत अन्य गतिविधियां आयोजित की गई। कार्यक्रम में एचआईवी जांच, उपचार व उत्कृष्ट कार्य के लिए विभाग के कई कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न कार्यक्रम अतिथियों द्वारा प्रदान किए गए। कार्यक्रम में अशोक गौवंशी (परामर्शदाता),अवनेश कुमार ठाकुर (डाटा मैनेजर), अजय गुप्ता (फार्माशिष्ट), सोनू यादव, मीना यादव, फौजिया अंजुम (परामर्शदाता) सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत मे मीना यादव द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।


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