गोंडवाना समय

Gondwana Samay

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Monday, February 8, 2021

आईपीएफ महिला मंडल बालाघाट ने दादा मोती रावण कंगाली जी की जयंती मनाई एवं सेवा भाव से किया मदद

आईपीएफ महिला मंडल बालाघाट ने दादा मोती रावण कंगाली जी की जयंती मनाई एवं सेवा भाव से किया मदद

गोंडी भाषा, गोंडी सभ्यता व प्राचीन इतिहास का गौरवशाली इतिहास को बताया


बालाघाट। गोंडवाना समय।

गोंडी भाषा के प्रचंड विद्वान, गोंडी भाषा प्रचारक, साहित्यकार, समाजसेवी धर्म गुरु दादा डॉ मोती रावण कंगाली जी की जयंती आईपीएफ महिला मंडल भरवेली एवं बालाघाट ने बड़ा देव ठाना भरवेली में दादा मोती रावण कंगाली जी के द्वारा साहित्य व समाज के क्षेत्र दिये योगदान व इतिहास से 7 फरवरी 2021 को याद कर उनके कार्यो पर प्रकाश डाला गया एवं सेवा भाव से जरूरतमंदो की मदद किया। 

बैगा दंपत्ति को जरूरत की सामग्री की प्रदान 


दादा मोती रावण कंगाली जी जयंती कार्यक्रम के अवसर पर भरवेली के नजदीक गाँव पीपरटोला में निवासरत बैगा दम्पति को जो कि आज भी जंगल के पास बांस के बने टट्टे के मकान व आड़ में रहते है, उन्हें आईपीएफ महिला मंडल टीम के द्वारा चटाई, कम्बल, मच्छरदानी, टॉवल सेवा भाव से प्रदान कर बैगा दम्पति को साफ-सफाई, स्वच्छता संबंधी जानकारी दी गई।

दादा कंगाली के उत्तम कार्योँ का दिख रहा समाज में परिणाम 

तत्पश्चात भरवेली के बड़ा देव ठाना में गोंगो कर दादा मोती रावण कंगाली जी के छायाचित्र में हल्दी चावल का टीका व फूल अर्पित कर उनको याद किया। जिसमें तिरूमाय वंदना घनश्याम सिंह तेकाम ने उनके सामाजिक कार्यो पर विस्तार से विचार रखते हुए गोंडी भाषा, गोंडी सभ्यता व प्राचीन इतिहास का गौरवशाली इतिहास को बताया। इसी क्रम में सरिता अशोक मरावी ने दादा मोती रावण कंगाली जी के कार्यो की सराहना करते हुए आज दिख रहे उनके कार्यो के उत्तम परिणाम को बताया तथा समाज को भाषा का महत्व बताया। 

जयंति कार्यक्रम में मुख्य रूप से ये रही उपस्थित 

दादा मोती रावण कंगाली जी जयंती कार्यक्रम का मंच संचालन रमा तेकाम ने किया तो वही रेखा मुकेश सैय्याम ने कार्यक्रम के अंत में  सभी उपस्थित मातृशक्तियों एवं बच्चों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में नीलू महेंद्र मसराम, रेखा पारस इड़पांचे, सुकवारो धुर्वे, कविता कैलाश उइके, गौरी सैय्याम, ममता सुनऊ परते, प्रमिला सिरसाम, लक्ष्मी  सरियाम, गीत अनिल उइके, दुर्गेश्वरी सुरेश उइके,  कौशल्या दीपक उइके, ईठा धर्मेन्द्र सैय्याम, पूर्वी, आकांक्षा सैय्याम ( आशु ) मुख्य रूप से उपस्थित रही। 


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